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सुस्ती में भी दौड़ीं लघु बचत योजनाएं

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली September 13, 2019

अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती के बीच देश का मध्यम वर्ग बचत के लिए लघु बचत योजनाओं में जमकर रकम डाल रहा है। आंकड़ों में बात करें तो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जुलाई) में डाकघर बचत जमा, राष्ट्रीय बचत पत्र और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) में निवेश (अप्रैल-जुलाई) में 37 प्रतिशत तक उछल गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2018-19 की समान अवधि में भी इन लघु बचत योजनाओं में निवेश 38 प्रतिशत बढ़ा था। कुल मिलाकर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इन योजनाओं को मजबूत आधार का खासा लाभ मिला है। 
 
अलग-अलग योजनाओं में निवेश का विश्लेषण करें तो बचत जमा और बचत पत्र में निवेश 41 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि पीपीएफ में इसमें करीब 20 प्रतिशत तेजी आई है। इसके अलावा किसान विकास पत्र और सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश पर मिलने वाला ब्याज बैंक जमा दरों के मुकाबले अधिक आकर्षक है। डाकघर बचत का दमदार प्रदर्शन लगातार जारी है और इसमें निवेश 2016-17 से अब तक 6 गुना बढ़ चुका है। हालांकि, पीपीएफ निवेश में जरूर नरमी दिखी है। लघु बचत योजनाओं में जमा रकम राष्ट्रीय लघु बचत कोष (एनएसएसएफ) में जमा होती है। एनएसएसएफ इस जमा रकम का एक हिस्सा केंद्र सरकार को राजकोषीय घाटा सीमित करने के लिए और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) जैसी दूसरी सरकारी एजेंसियों को देता है। इससे सरकार को आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बाजार से कम रकम उधार लेनी पड़ती है। इन कारणों से देश की अर्थव्यवस्था के लिए एनएसएसएफ संग्रह खासा अहम हो जाता है।
 
एक दूसरी अहम बात यह है कि मध्यम वर्ग के लिए बचत योजनाओं की तुलना करें तो वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में लघु बचत योजनाओं के अलावा बैंकों में जमा नकदी में भी खासा इजाफा हुआ है। हालांकि ये निवेश मोटे तौर पर म्युचुअल फंडों से हुई निकासी के नतीजे हैं।  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून 2019 के दौरान बैंक जमाओं में 1.14 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। दूसरी तरफ एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के अनुसार म्युचुअल फंडों में निवेश महज 12,000 करोड़ रुपये रहा है। पिछले साल इसी अवधि के दौरान (वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही) बैंक जमाओं में इजाफा कम (28,000 करोड़ रुपये) रहा था, जबकि म्युचुअल फंडों में निवेश 1.67 लाख करोड़ रुपये हो गया था।  विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा रुझान देखते हुए इतना तो स्पष्ट है कि लो जोखिम लेने से बच रहे हैं, क्योंकि पिछले एक साल से भी अधिक समय से बाजार में सुधार नहीं दिखा है। बैंक सावधि जमाओं पर मिलने वाले ब्याज के मुकाबले लघु बचत योजनाएं अब भी आकर्षक प्रतिफल दे रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसी वजह से लोग लघु बचत योजनाओं में रकम डाल रहे हैं। 
Keyword: PF fund, ppf, EPFO,,
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