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फिर मुश्किल में फंसे म्युचुअल फंड निवेशक

जश कृपलानी / मुंबई September 13, 2019

प्राइवेट इक्विटी समर्थित डेवलपर फाइनैंसर अल्टिको कैपिटल में नकदी की समस्या डेट म्युचुअल फंड के निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती है। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, रिलायंस निप्पॉन लाइफ एएमसी और यूटीआई एमएफ का अगस्त के आखिर तक कंपनी में 537 करोड़ रुपये का निवेश था। उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, कंपनी की तरफ से 19.9 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान पर चूक को ध्यान में रखते हुए जब मूल्यांकन करने वाली एजेंसियां प्रतिभूतियों की कीमत को संशोधित करेंगी तब निवेशक मार्क टु मार्केट के प्रभाव का सामना कर सकते हैं। यह भुगतान बाह्य वाणिज्यिक उधारी से संबंधित था।

 
शुक्रवार को यूटीआई एमएफ ने कहा कि वह अल्टिको कैपिटल में निवेश को अलग करने के लिए अलग पोर्टफोलियो बनाएगी। यूटीआई एमएफ के क्रेडिट रिस्क फंड के जरिये अल्टिको में 200 करोड़ रुपये के निवेश (योजना की परिसंपत्ति का 5.85 फीसदी) को एक अलग पोर्टफोलियो में रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस निप्पॉन लाइफ एएमसी भी अल्ट्रा शॉर्ट ड््यूरेशन स्कीम के जरिये अल्टिको में 150 करोड़ रुपये के निवेश (योजना की परिसंपत्ति का 4.6 फीसदी) को अलग करने के लिए ट्रस्टी की मंजूरी मांगेगी।
 
सेबी के नियमों के मुताबिक, अगर कोई फंड हाउस इस तरह के मामलों में अलग पोर्टफोलियो बनाना चाहता है तो कॉरपोरेट इकाई के निवेश श्रेणी से नीचे डाउनग्रेड किए जाने के तुरंत बाद यह फैसला ले लेना चाहिए। ऐसा पोर्टफोलियो इसलिए बनाया जाता है ताकि सुनिश्चित हो सके कि सिर्फ मौजूदा निवेशक ही निवेश श्रेणी से नीचे डाउनग्रेड होने का खामियाजा भुगते और भविष्य की रिकवरी ठीक ठाक हो। ऐसे में इस पोर्टफोलियो के यूनिट का आवंटन इस घटनाक्रम के दिन सिर्फ मौजूदा निवेशकोंं को किए जाते हैं। साथ ही यह व्यवस्था किसी योजना के इलिक्विड परिसंपत्तियों को लिक्विड परिसंपत्तियों से अलग कर देती है।
 
गुरुवार को केयर रेटिंग्स ने कंपनी के ऋणपत्र को डाउनग्रेड कर निवेश श्रेणी से नीचे कर दिया था जब कंपनी ने ब्याज भुगतान में चूक की थी। अगस्त के आखिर में रिलायंस निप्पॉन लाइफ एएमसी के अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड के जरिए अल्टिको के दो ऋणपत्रोंं में निवेश किया गया था। एक ऋणपत्र अगले कुछ दिनों में यानी 26 सितंबर 2019 को परिपक्व हो रहा है। यह जानकारी वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों से मिली। एक्सचेंज को भेजी सूचना में अल्टिको कैपिटल ने कहा है, उसे भविष्य में भी पुनर्भुगतान करने में मुश्किल हो सकती है। पुनर्भुगतान में नाकामी की वजह गैर-परिवर्तनीय ऋण प्रतिभूतियोंं के ब्याज पुनर्भुगतान व निवेश निकासी के दायित्व में तेजी हो सकती है, जिसकी वजह से समयबद्ध्र पुनर्भुगतान में चूक हो सकती है।
 
इस बीच, यूटीआई एमएफ ने अल्टिको के फंडामेंटल पर भरोसा जताया है और कहा है कि यह डिफॉल्ट परिसंपत्ति-देनदारी के बेमेल के चलते हुआ, जो प्रतिभूतियों के डाउनग्रेड किए जाने और विभिन्न उधारी में तेजी के कारण हुआ। इस वजह से कंपनी को नकदी की स्थिति सुधरने तक भुगतान पर रोकने के लिए बाध्य होना पड़ा। यूटीआई एमएफ ने कहा, कंपनी के विभिन्न अनुपात को देखते हुए दबाव वाली परिसंपत्तियों के परिदृश्य में भी लेनदारों के बकाया भुगतान के लिए पर्याप्त गुंजाइश है।
 
अगस्त के आखिर में यूटीआई एमएफ का बाकी 133 करोड़ रुपये निवेश उसकी छह एफएमपी में था। यूटीआई फिक्स्ड टर्म इनकम फंड सीरीज-29 (30.8 करोड़ रुपये), यूटीआई एफटीआई सीरीज-27 (28 करोड़ रुपये) और यूटीआई एफटीआई सीरीज -33 (22.79 करोड़ रुपये) के जरिए भी निवेश किए गए हैं। पांच एफएमपी 2021 में परिपक्व हो रहे हैं, वहीं एक 2 सितंबर 2020 को परिपक्व हो रहे हैं। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। अल्टिको में रिलायंस निप्पॉन लाइफ एएमसी के एफएमपी के जरिए 53 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। 
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