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ई-आकलन से बनी रहेगी गोपनीयता

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली September 13, 2019

सरकार द्वारा शुरू नई ई-आकलन योजना के तहत सामान्य परिस्थितियों में करदाताओं और आय कर अधिकारियों के बीच आमने-सामने कोई संवाद नहीं होगा, लेकिन प्रारूप आकलन आदेश पर करदाता को कोई आपत्ति होने की स्थिति में उसे वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। नई ई-आकलन योजना गुरुवार से लागू हो गई है। जांच-पड़ताल आकलन के बाद अपील व्यक्तिगत प्रस्तुति के जरिये जारी रहेगी।  हालांकि इस महत्त्वाकांक्षी योजना में योजना लागू होने के आकलन वर्ष, ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों में विवाद समाधान समूह (डीआरटी) के तहत निपटान के प्रावधान और जोखिम प्रबंधन रणनीति आदि के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। ई-आकलन योजना, 2019 को इसलिए लागू किया गया है ताकि कर रिटर्न के आकलन में कर अधिकारी और करदाता के बीच कोई संवाद नहीं हो। इसके तहत उन मामलों को निपटाया जाएगा, जिन्हें इस साल धारा 143 (2) के तहत सीमित जांच-पड़ताल के लिए चुना गया है। 
 
यह जांच राष्ट्रीय और क्षेत्रीय ई-आकलन केंद्रों के जरिये की जाएगी। ये केंद्र कर अधिकारियों को मामलों का आवंटन ऑटोमेटेड फॉर्म में करेंगे। इस नई योजना के तहत करदाताओं के साथ और आकलन केंद्रों के बीच संवाद केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप से होगा। संवाद का प्रमाणन डिजिटल रूप में होगा। सबसे अहम बात यह है कि करदाता को इन केंद्रों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होना पड़ेगा।  अगर किसी मामले में प्रारूप आकलन आदेश में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाता है तो करदाता को  मौका दिया जाएगा। इसमें उसे नोटिस जारी कर यह जवाब मांगा जाएगा कि क्योंकि आकलन को आकलन आदेश के मुताबिक पूरा नहीं किया जाना चाहिए। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की तरफ से गुरुवार को जारी राजपत्र अधिसूचना में कहा गया है, 'करदाता या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को व्यक्तिगत सुनवाई की मांग करने की मंजूरी होगी ताकि वह मौखिक रूप से अपनी बात कह सके और इस योजना के तहत किसी केंद्र में आयकर अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रख सके। ऐसी सुनवाई बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होगी।'
 
इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय केंद्र आकलन आदेश की जांच जोखिम प्रबंधन रणनीति और बोर्ड के पहले से निर्धारित मानकों के आधार पर करेगा। हालांकि इस अधिसूचना में इन मापदंडों की विस्तृत जानकारी नहीं मुहैया कराई गई है।  कर विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना जटिल नजर आ रही है और इसे लेकर कुछ स्पष्टीकरण जारी किए जाने जरूरी हैं। नांगिया एडवाइजर्स (एंडरसन ग्लोबल) के निदेशक संदीप झुनझुनवाला ने कहा, 'तकनीक आने से करदाता धीरे-धीरे आयकर रिटर्न ऑनलाइन भरने लगे हैं। हालांकि नई पहल का मकसद करदाताओं के लिए आकलन की प्रक्रिया को आसान बनाना है, लेकिन ई-आकलन के लिए बनाई गई बहुत सी नोडल संस्थाओं से आम करदाता के लिए शुरुआत में योजना और उसकी प्रक्रियाओं को समझना जटिल बना सकती हैं। रोचक बात यह है कि योजना को नाकाम होने से बचाने के लिए आकलन के किसी भी चरण में मामले को क्षेत्र आकलन अधिकारी को हस्तांतरित करने का प्रावधान किया गया है।'
 
एक अन्य कर विशेषज्ञ ने कहा कि अगर गोपनीयता बरकरार रखी जा सकती है तो यह बहुत अच्छा विचार है। सिरिल अमरचंद मंगलदास में पार्टनर और हेड (टैक्स) एस आर पटनायक ने कहा, 'मेरा मानना है कि मेरा मानना है कि अब भी करदाता और कर अधिकारियों के बीच आमने-सामने बैठक होना जरूरी है। विशेष रूप से उन मामलों में जहां कर अधिकारियों कर रिटर्न के ब्योरों और घोषणा के आधार पर कुछ स्पष्टीकरणों की जरूरत है और करदाता ये स्पष्टीकरण देने को तैयार है। एक विकल्प यह हो सकता है कि ऐसे मामलों को देख रहे कुछ अधिकारी करदाता से स्पष्टीकरण मांगें और करदाता की जानकारी उजागर किए बिना उसे संबंधित विभाग को भेज दें।'
Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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