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ऑडियो के सहारे पैठ बना रहे ओटीटी मंच

उर्वी मलवाणिया /  September 13, 2019

पायरेसी और बड़े बॉलीवुड स्टूडियो के चक्र में फंसे संगीत कारोबार को ओवर-दी-टॉप (ओटीटी) के बढ़ते कारोबार के सहारे राहत मिल सकती है। संगीत प्रेमियों के लिए अलग-अलग भाषाओं और पसंद को ध्यान में रखते हुए एमेजॉन म्यूजिक, स्पॉटिफाई, यूट्यूब के साथ साथ गाना, जियो म्यूजिक और हंगामा जैसी स्थानीय कंपनियां विभिन्न आय और उम्र वर्ग के लोगों के लिए डेटा और तकनीकी नवोन्मेष की मदद से बेहतरीन पैकेज तैयार कर रही हैं। हालांकि इस काम में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक ही जगह से अपने प्लेटफॉर्म पर गाना लेकर आने वाली इन कंपनियों को गाना सुनाने के लिए बेहतरीन अनुभव उपलब्ध कराना होता है। 

 
स्पॉटिफाई इंडिया में प्रबंध निदेशक अमरजीत बत्रा कहते हैं, 'भारत में हमने दो कारणों से अपनी शुल्क दरों को कस्टमाइज किया है। पहला, ग्राहक दरों को लेकर संवेदनशील होते हैं और दूसरा, भारत फिलहाल बड़े पायरेसी आधारित बाजार से धीरे धीरे संगीत स्ट्रीमिंग की ओर बढ़ रहा है।' भारत के संगीत बाजार में काफी अधिक संभावनाएं मौैजूद हैं। हाल ही में डेलॉयट द्वारा जारी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में ऑडियो आधारित ओटीटी उद्योग का आकार 2,700 करोड़ रुपये है और इससे सालाना 270 करोड़ रुपये के करीब राजस्व आता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऑडियो आधारित ओटीटी ब्रांड बाजार में ग्राहकों की संख्या अगले 2 साल में फिलहाल के 15 करोड़ से बढ़कर 40 करोड़ हो जाएगी। हालांकि इस क्षेत्र में वृद्धि की बहुत अधिक संभावनाएं हैं लेकिन ब्रांड इस बात का भी खयाल रख रहे हैं कि उन्हें ये सेवाएं सहज तरीके से उपलब्ध करानी होंगी। 
 
इस कारोबार के शुरुआती निवेशकों में से एक और हंगामा के मुख्य कार्याधिकारी सिद्धार्थ रॉय कहते हैं कि कुछ वर्ष पहले से ही बाजार में बदलाव देखने को मिल रहा है। वह कहते हैं, 'आज के समय भारतीय उपभोक्ता स्ट्रीमिंग के तहत संगीत का आनंद ले रहे हैं। ये उपभोक्ता ही संगीत के लिए भुगतान प्रणाली स्थापित करने का रास्ता खोल रहे हैं।' हालांकि एक अन्य चुनौती भारतीय ग्राहकों को वर्गीकृत करना है। संगीत कई भाषाओं में सुना जाता है। इसके अलावा संगीत सुनने वाले चंचल प्रकृति के होते हैं और सस्ती दरों पर संगीत सुनने के लिए अलग-अलग ब्रांड चुनते रहते हैं। इसके लिए ऐप को कई तरह के पैकेज लाने होते हैं। बत्रा बताते हैं कि स्पॉटिफाई पर विज्ञापन वाला मुफ्त वर्जन और विज्ञापन के बिना सबस्क्रिप्शन आधारित मॉडल उपलब्ध हैं जो दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक प्लान के साथ बाजार में लाया गया है। कंपनी का सबसे छोटा सबस्क्रिप्शन प्लान 13 रुपये से शुरू होता है। 
 
ओटीटी प्लेटफॉर्म गाना के मुख्य कार्याधिकारी प्रशांत अग्रवाल कहते हैं कि डिजिटल भुगतान के चलते सबस्क्रिप्शन में तेजी आई है और इसके विभिन्न मॉडल के तहत बहुत से प्रयोग किए जा रहे हैं। वह कहते हैं, 'मुझे लगता है कि भारतीय ग्राहक पैकेज की कीमत से अधिक गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं। अगर हम उनके रुपयों के बदले अच्छी गुणवत्ता और बेहतर अनुभव उपलब्ध कराते हैं तो वे सबस्क्रिप्शन लेने पर बहुत खुश होंगे।' सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म अपने उपभोक्ताओं को वर्गीकृत करने के लिए डेटा का उपयोग कर रहे हैं। अग्रवाल कहते हैं, 'हमारे कारोबारी निर्णयों में डेटा की अहम भूमिका होती है। उदाहरण के लिए, हम जानते हैं कि हमारे 80 प्रतिशत से अधिक ग्राहक 2 भाषाओं में गाना सुनते हैं। हमने इस श्रेणियों को लाक्षित कर भाषा संबंधी पैक तैयार किए हैं।'
 
हालांकि ऐसा नहीं है कि भारतीय संगीत प्रेमी केवल हिंदी भाषा का ही चयन करते हैं। इसलिए ऑडियो कंपनियों द्वारा जुटाया गया डेटा उन्हें वर्गीकृत करने में मदद करता है। जैसे भोजपुरी श्रोता आमतौर पर एक ही भाषा में गाने सुनते हैं जबकि शेष औसतन 2 भाषाओं में संगीत सुनते हैं। स्थानीय भाषा का संगीत भी हिंदी संगीत लाइब्रेरी को समृद्ध करने में अहम भूमिका निभा रहा है। कई श्रोता अलगह-अलग भाषाओं में नए संगीतकारों को सुनने का इंतजार कर रहे हैं। अग्रवाल कहते हैं कि यह हिंदी फिल्म संगीत के लिए होने वाले खर्च को कम करने का अच्छा तरीका है। 
 
विज्ञापन के अलावा ये सभी मंच साझेदारी तथा स्पॉन्सरशिप के जरिये अपनी लाइब्रेरी और उत्पाद से भी कमाई करने की कोशिश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए हंगामा ने एक ब्रांडेड प्ले-लिस्ट तैयार की है जहां प्ले-लिस्ट में कोई उत्पाद या सेवा को शामिल किया गया है। दूसरे मंच इसके लिए पॉडकास्ट का उपयोग करते हैं।  बत्रा कहते हैं, 'पॉडकास्ट के क्षेत्र में भी असीम संभावनाएं हैं। वर्ष 2018 के एक वैश्विक शोध के अनुसार पॉडकास्ट सुनने वाले आधे श्रोताओं का कहना है कि पॉडकास्ट अधिक प्रासंगिक, बाधा रहित और रोचक होते हैं। भारत में हो सकता है कि यह फिलहाल थोड़ी जल्दी है लेकिन हमने देखा है कि ब्रांड और विज्ञापनदाता दिलचस्पी दिखा रहे हैं।'
Keyword: OTT, music, bollywood,,
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