बिजनेस स्टैंडर्ड - बारिश से सोयाबीन-उड़द को नुकसान
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बारिश से सोयाबीन-उड़द को नुकसान

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली September 13, 2019

मॉनसून के जुलाई में जोर पकडऩे के बाद उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। हालांकि पिछले कुछ दिनों से मध्य प्रदेश के कई भागों में लगातार हो रही भारी बारिश ने उनकी उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। सिनम ने मंदसौर से टेलीफोन पर कहा कि उन्हें अब बड़े नुकसान की आशंका है। लगभग पूरी फसल पानी में डूब गई है और बारिश में कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि बारिश आने का यह खराब वक्त है। देर से बुआई के कारण सोयाबीन की फसल अभी फलनी शुरू ही हुई थी। अब बड़े स्तर पर पानी भरने की वजह से यह मुर्झाने लगी है। इसमें सुधार की कोई उम्मीद नहीं है।
 
हाल ही में सिनम और उनके 30 ग्रामीण साथी मुआवजे की मांग के लिए जिलाधिकारी के कार्यालय गए थे। उन्होंने कहा कि अब तक कोई भी हमारे खेतों का सर्वेक्षण करने नहीं आया है और पटवारी कहता है कि उसे ऊपर से आदेश नहीं मिला है। मध्य प्रदेश में लगातार बारिश ने सैकड़ों-हजारों किसानों की अच्छी उपज और इससे जुड़ी आमदनी में सुधार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। वर्षों तक कम दाम रहने के बाद उम्मीद दिखाई दे रही थी। वर्ष 2019 में जिस 1.12 करोड़ हेक्टेयर रकबे में सोयाबीन बोई गई थी, उसमें से तकरीबन 55 लाख हेक्टेयर रकबा मध्य प्रदेश में था। उड़द के मामले में 37.5 लाख हेक्टेयर की बुआई में से 44 प्रतिशत मध्य प्रदेश में है।
 
बारिश और फसल क्षति की सूचना के बाद नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) के वायदा पर सोयाबीन के दाम  अस्थिर हो गए हैं। पिछले सप्ताह फसल क्षति की सूचना सही साबित होने की वजह से इंदौर में कीमतों में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बारिश रुकने के इंतजार की वजह से अभी पूरा मूल्यांकन तो नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल संभाग को छोड़कर पूरे होशंगाबाद, मंदसौर, इंदौर, उज्जैन, नीमच, रतलाम और अन्य स्थानों में बड़े भाग में सोयाबीन तथा उड़द फसल खड़ी है।
 
मौसम कार्यालय के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक सामान्य से 28 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। 1 जून से 30 सितंबर के बीच राज्य में सामान्य वर्षा 952 मिली मीटर रही है। इस साल हाल तक 1,100 मिली मीटर बारिश हो चुकी है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने कहा कि नुकसान का उचित मूल्यांकन तभी हो सकता है, जब बारिश रुक जाए और सर्वेक्षणकर्ता खेतों में कार्य कर सकें। सोपा ने 30 अगस्त के मूल्यांकन में अनुमान जताया था कि जिस 55 लाख हेक्टेयर में फसल बुआई की गई थी, उसमें से करीब 79 प्रतिशत की स्थिति सामान्य थी और बाकी हिस्से में स्थिति खराब थी। यह लगातार बारिश के मौजूदा दौर से पहली की स्थिति थी। इसने गुजरात और राजस्थान के भी कुछ हिस्सों को प्रभावित किया है। गुजरात के व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि कपास और मूंगफली की फसल पर कुछ असर पड़ा है। राजस्थान में मध्य प्रदेश से सटे इलाकों के खेतों पर कुछ प्रभाव देखा गया है।
 
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक एनपी सिंह ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया खेतों की शुरुआती सूचना से पता चलता है कि पांच लाख से 10 लाख हेक्टेयर तक में दलहन की कुल खड़ी फसल भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त होने के आसार हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे अन्य क्षेत्रों में अच्छी उपज से इसकी भरपाई हो जाएगी। कुल मिलाकर खरीफ की सभी दलहन लगभग 1.2 करोड़ हेक्टेयर में बोई जाती हैं। देश के कुल वार्षिक उत्पादन में खरीफ की दलहन का हिस्सा 40 प्रतिशत रहता है।
Keyword: agri, farmer, crop, monsoon,,
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