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मिड और स्मॉलकैप के लिए बदल रहे हालात

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली September 12, 2019

मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट के लिए हालात में अब सुधार आ रहा है। जुलाई 2019 में पेश बजट के बाद आई भारी गिरावट से बीएसई मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप सूचकांकों में 30 अगस्त तक 9.8 प्रतिशत और 12.6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि सेंसेक्स में उस अवधि के दौरान 6.5 प्रतिशत की कमजोरी आई। हालांकि उसके बाद इन दोनों सेगमेंट में सितंबर में तेजी आनी शुरू हो गई है।

सितंबर में अब तक, बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक लगभग 3 प्रतिशत चढ़ा है जबकि सेंसेक्स में 0.2 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह की स्थिति मिडकैप शेयरों को लेकर है। बीएसई मिडकैप सूचकांक इस महीने 12 सितंबर तक लगभग 1.3 प्रतिशत मजबूत हुआ है। 

विश्लेषकों का कहना है कि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में गिरावट पिछले कुछ वर्षों के दौरान काफी ज्यादा रही है, जिससे मौजूदा समय में निवेश करने या दीर्घावधि तक निवेश बनाए रखने वाले निवेशकों को एक अच्छा अवसर मिला है। हालांकि वे अस्थायी उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क बने हुए हैं, लेकिन दीर्घावधि परिदृश्य पर सकारात्मक हैं।

इक्विनोमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम का कहना है, 'बी समूह शेयरों (जिनमें मुख्य रूप से मिड और स्मॉलकैप शामिल हैं) का संयुक्त बाजार पूंजीकरण 10 साल पहले के 20 लाख करोड़ रुपये से फिसलकर अब 8.87 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इससे 56 प्रतिशत की भारी गिरावट का पता चलता है। लेकिन ताजा तेजी में, जो लोग कम से कम 12-24 महीनों के लिए निवेश में बने रहना चाहते हैं, वे अच्छी गुणवत्ता के शेयरों पर विचार कर सकते हैं।'

सितंबर में कुछ शेयरों में अच्छी तेजी आई है। अच्छी तेजी दर्ज करने वाले शेयरों में शंकर बिल्डिंग प्रोजेक्टï्स (81 प्रतिशत तक), गोवा कार्बन (48 प्रतिशत), 3आई इन्फोटेक (44 प्रतिशत), स्टार पेपर मिल्स (43 प्रतिशत), रुचिरा पेपर्स (41 प्रतिशत), बजाज हिंदुस्तान (39 प्रतिशत) और ईरोज इंटरनैशनल (34 प्रतिशत) शामिल हैं। हालांकि कुछ शेयरों में खबरों की वजह से भी ज्यादा तेजी दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए, प्रभात डेरी का शेयर उन खबरों से चढ़ गया कि कंपनी ने सूचीबद्घता समाप्त करने की योजना बनाई है। 

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अर्थव्यवस्था, खासकर वाहन उद्योग में स्पष्ट रूप से मंदी और नकदी की किल्लत से कार्यशील पूंजी चक्र और संपत्ति में कमी दर्ज की गई है जिससे प्रवर्तकों पर भी प्रभाव देखा गया है। इससे मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट पर दबाव पड़ा है। हालांकि उनका कहना है कि इन मुद्दों को लेकर बाजार प्रतिक्रिया अत्यधिक देखी गई है। 

इक्विरस कैपिटल की इंडिया स्ट्रेटेजी रिपोर्ट में कहा गया है, 'बाजार में पिछले 15 साल में स्मॉलकैप सूचकांक के कमजोर प्रदर्शन के साथ अत्यधिक प्रतिक्रिया दिखी है। जहां स्मॉलकैप सूचकांक मौजूदा समय में जुलाई 2016 के स्तरों पर है, वहीं निफ्टी लगभग 35 प्रतिशत ऊपर है, सेंसेक्स लगभग 40 प्रतिशत और मिडकैप सूचकांक जुलाई 2016 की तुलना में लगभग 17.5 प्रतिशत ऊपर है। निफ्टी और स्मॉलकैप सूचकांकों का मूल्यांकन लीमन के बाद के और 2013 के निचले स्तरों को छू रहा है। अब यह गिरावट निफ्टी के अनुरूप हो सकती है।'

आईडीबीआई कैपिटल में शोध प्रमुख ए के प्रभाकर भी मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट्स के लिए आगामी राह को लेकर आश्वस्त बने हुए हैं और उन्होंने निवेशकों को अब अच्छे चयन के आधार पर खरीदारी करने और अगले 12-24 महीनों तक निवेश बनाए रखने की सलाह दी है। 

प्रभाकर का कहना है, 'मिड और स्मॉलकैप शेयरों में पिछले 21 महीनों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और कुछ खास शेयरों का मूल्यांकन खरीदारी के लिहाज से आकर्षक बन गया है। निवेशक यदि अच्छी वृद्घि और गुणवत्ता वाले शेयर खरीदते हैं तो उन्हें चिंता नहीं करनी चाहिए। जीवन बीमा, होटल, उर्वरक, बिजली, खास बैंकिंग शेयर और इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर मैं उत्साहित हूं।' 
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