बिजनेस स्टैंडर्ड - रुइया के हाथों में महान पावर!
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रुइया के हाथों में महान पावर!

महान पावर के ऋणदाता बैंकों ने आर्सेलरमित्तल की सशर्त बोली को किया खारिज
देव चटर्जी और ईशिता आयान दत्त / मुंबई/कोलकाता 09 11, 2019

कब क्या हुआ...

सितंबर 2014 : उच्चतम न्यायालय ने महान बिजली परियोजना सहित सभी कंपनियों के कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द कर दिया
दिसंबर 2018 : आर्सेलरमित्तल ने 4,800 करोड़ रुपये की सशर्त बोली लगाई, रुइया ने एकमुश्त निपटान के लिए 3,450 करोड़ रुपये की पेशकश की
अप्रैल 2019 : उच्चतम न्यायालय ने बैंकों और बिजली कंपनियों के प्रवर्तकों के साथ समझौता करने की राह खोली
सितंबर 2019 : बैंक महान परियोजना का नियंत्रण रुइया को सौंपने के पक्ष में आए

बिजनेस स्टैंडर्ड रुइया के हाथों में महान पावर!मध्य प्रदेश में 1,200 मेगावॉट की महान बिजली परियोजना के लिए आर्सेलरमित्तल की बोली बैंकों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहने से एस्सार समूह के रुइया अपनी इस परियोजना पर फिर से नियंत्रण हासिल करने की तैयारी में हैं। आर्सेलरमित्तल ने खुद की जांच-परख के आधार पर इस कंपनी के लिए पिछले साल दिसंबर में 4,800 करोड़ रुपये की गैर-बाध्यकारी बोली लगाई थी। इसके खिलाफ रुइया ने एकमुश्त निपटान के लिए 3,450 करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान की पेशकश की थी। जांच के बाद एलएन मित्तल के स्वामित्व वाली आर्सेलरमित्तल ने अपनी पेशकश में संशोधन करते हुए बोली में नई शर्तें जोड़ दीं। 

बैंकिंग सूत्रों ने कहा कि आर्सेलरमित्तल ने बिजली कंपनी पर उच्च आकस्मिक देनदारी का हवाला देते हुए अपनी पेशकश को संशोधित कर दिया। आर्सेलरमित्तल द्वारा बोली में शर्तें जोडऩे के बाद ऋणदाताओं ने रुइया से कंपनी के लिए पुनर्गठन प्रस्ताव सौंपने का अनुरोध किया। रुइया कंपनी में अतिरिक्त पूंजी निवेश कर सकते हैं, जिससे कंपनी अन्य देनदारियों को पूरा कर सकती है। इस पर अंतिम निर्णय अगले कुछ हफ्तों में आने की उम्मीद है।

पावर फाइनैंस कंपनी की अगुआई में आरईसी और आईसीआईसीआई बैंक कंपनी के बोलीदाताओं से अपने फंसे कर्ज को कम करने पर बातचीत कर रहे थे। कंपनी की कोयला खदान को सितंबर 2014 में उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद वह 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने में विफल रही थी। इस बारे में संपर्क करने पर एस्सार के एक अधिकारी ने कोई टिप्पणी देने से मना कर दिया। आर्सेलरमित्तल के प्रवक्ता ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। 

बिजली कंपनियों को उच्चतम न्यायालय के उस फैसले से राहत मिली थी जिसमें अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक के फरवरी 2018 के आदेश को दरकिनार कर दिया था। आरबीआई ने बैंकों से कहा था कि वे पुंसे कर्ज मामले में बिजली कंपनियों सहित अन्य सभी कंपनियों को ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता के तहत राष्ट्रीय कंपनी लॉ पंचाट (एनसीएलटी) में ले जाएं।  बिजली कंपनियों ने शिकायत की थी कि आरबीआई के परिपत्र से उनका परिचालन ठहर सकता है, वहीं बैंकों को 2.25 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज फंसने का डर था। उच्चतम न्यायालय के आदेश ने जबरिया दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के बजाय समझौते की राह खोल दी।

रुइया और मित्तल एस्सार स्टील के अधिग्रहण को लेकर भी आमने-सामने थे। एनसीएलटी ने एस्सार स्टील के लिए आर्सेलरमित्तल की 42,200 करोड़ रुपये की पेशकश को मंजूरी दे दी है। हालांकि यह मामला भी अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित है। एस्सार स्टील के बैंक और असुरक्षित लेनदारों ने अग्रिम नकद भुगतान के तरीकों को लेकर एक-दूसरे पर मामला दायर किया है।  इसके अलावा आर्सेलरमित्तल ओडिशा में एस्सार समूह की स्लरी पाइपलाइन के अधिग्रहण पर भी 2,500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। बोली लगाने के लिए पात्रता हासिल करने के वास्ते आर्सेलरमित्तल को अदालत के आदेश के बाद उत्त्तर गैल्वा स्टील्स के बकाया भुगतान केलिए 7,000 करोड़ रुपये भुगतान करने पड़े थे। इस कंपनी में आर्सेलरमित्तल सह-प्रवर्तक थी। हालांकि बाद में उसने इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी एक अन्य डिफॉल्ट कंपनी केएसएस पेट्रॉन को बेच दी थी।
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