बिजनेस स?टैंडर?ड - सितंबर तिमाही में भी बना रहेगा आय पर दबाव
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सितंबर तिमाही में भी बना रहेगा आय पर दबाव

सुंदर सेतुरामन /  September 11, 2019

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के शोध प्रमुख गौतम दुग्गड़ ने सुंदर सेतुरामन के साथ बातचीत में कहा कि जून तिमाही का आय सीजन कमजोर रहा और कई कंपनियों की आय में कमी दर्ज की गई। वृहद आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए कॉरपोरेट आय पर सितंबर तिमाही में भी दबाव बने रहने के संकेत दिख रहे हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
जून तिमाही में कॉरपोरेट आय निराशाजनक रही। सितंबर तिमाही से क्या उम्मीदें हैं?
 
जून तिमाही में आय सीजन कमजोर रहा और निफ्टी की आय वृद्घि 5 प्रतिशत पर सिमट गई जबकि हमने 12 प्रतिशत वृद्घि का अनुमान जताया था। आय में कमी की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 90 कंपनियों ने वित्त वर्ष 2020 के लिए 3 प्रतिशत आय कटौती की आशंका जताई है और सिर्फ 30 कंपनियां अपनी आय में वृद्घि की संभावना देख रही हैं। इसके परिणामस्वरूप, हमने निफ्टी के वित्त वर्ष 2020 की आय वृद्घि के अपने अनुमानों को 4 प्रतिशत तक घटाकर 560 रुपये कर दिया है। सितंबर तिमाही के लिए भी उम्मीद कमजोर दिख रही है, क्योंकि अर्थव्यवस्था में कमजोर रुझान है और खपत में कमी आई है। 
 
भविष्य में आय पर आर्थिक मंदी का क्या प्रभाव पड़ेगा?
 
खपत में मंदी महज दो तिमाही पुरानी समस्या है। इसके अलावा, निजी पूंजीगत खर्च का रुझान भी नरम बना हुआ है। जिंस कीमतों में गिरावट से भी संकेत मिलता है कि आय पर दबाव बरकरार रह सकता है। रुपये में गिरावट से निर्यात-केंद्रित क्षेत्रों को कुछ राहत मिल सकती है। हम मौजूदा समय में वित्त वर्ष 2020 में निफ्टी कंपनियों के लिए 13 प्रतिशत मुनाफा वृद्घि की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन कॉरपोरेट बैंकों को छोड़कर (आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक और एसबीआई), निफ्टी की वित्त वर्ष 2020 की मुनाफा वृद्घि महज 3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। दरअसल, हमारे अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 के लिए निफ्टी की लगभग आधी मुनाफा वृद्घि एसबीआई से आएगी। 
 
क्या आप किसी तरह के सुधार का संकेत देख रहे हैं? कुल वृहद आर्थिक परिदृश्य पर आपका क्या नजरिया है?
 
सुधार के दो स्पष्ट संकेत हैं। इनमें आरबीआई द्वारा ब्याज दर कटौती के बाद पूंजी की लागत में कमी और मॉनसून में अच्छा सुधार आना शामिल हैं। भारत के लिए संपूर्ण वृहद परिदृश्य मिश्रित बना हुआ है। कुछ अन्य सकारात्मक बदलावों में ब्याज दरों में वैश्विक नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट शामिल हैं। हालांकि भारत की एकमात्र सबसे बड़ी चिंता वृद्घि को लेकर है। जब तक वृद्घि में सुधार नहीं आएगा, तब तक कच्चे तेल में नरमी और कम ब्याज दरों के बावजूद चुनौतियां बरकरार रह सकती हैं। जून के लिए जीडीपी वृद्घि का आंकड़ा चिंताजनक है। इससे सरकार के राजकोषीय अनुमानों पर दबाव पड़ सकता है और लंबे समय से प्रतीक्षित कॉरपोरेट आय में सुधार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
इसका आपके सेंसेक्स और निफ्टी लक्ष्यों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
जहां तक सूचकांक के लक्ष्यों का सवाल है तो मौजूदा मूल्यांकन और आय अनुमानों को देखते हुए हम यह मान सकते हैं कि निफ्टी सीमित दायरे में बना रहेगा।
 
क्या इसकी संभावना है कि निफ्टी मूल्यांकन दीर्घावधि औसत पर पहुंच सकता है?
 
निफ्टी वित्त वर्ष 2020 के लिए अनुमानित आय के 19 गुना पर कारोबार कर रहा है। मूल्यांकन लंबी अवधि के औसत की तुलना में महंगा है। हालांकि लंबी अवधि के औसत के दृष्टिकोण से सूचकांक का मूल्यांकन कुछ हद तक अस्पष्ट दिख रहा है, क्योंकि सूचकांक का स्वरूप पिछले दशक में उन क्षेत्रों के पक्ष में दिखा है जो ऊंचे मल्टीपल पर कारोबार करते हैं। इसलिए मूल्यांकन की सामान्य तुलना इस संदर्भ में सही तरीका नहीं हो सकती है। निफ्टी में 10-15 शेयर अपने दीर्घावधि औसत की तुलना में ऊपर कारोबार कर रहे हैं। इनमें मुख्य तौर पर कंज्यूमर, निजी बैंक और कुछ आईटी शेयर शामिल हैं। शेष 35 या 40 शेयर अपने दीर्घावधि औसत के मुकाबले बड़ी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं और इनमें खासकर तेल एवं गैस, यूटीलिटीज, फार्मा सेक्टर शामिल हैं।
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