बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-वाहन नहीं है वायु प्रदूषण का समाधान
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ई-वाहन नहीं है वायु प्रदूषण का समाधान

दिलाशा सेठ /  September 10, 2019

वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के सरकारी प्रयास लागत और प्रदूषण में कटौती के मामले में गलत साबित हो सकते हैं। ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन के विशेषज्ञ और शिकागो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन ने यह बात कही है। वह फिलहाल उद्योग से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए गुजरात और महाराष्ट्र सरकार की मदद कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ई-वाहनों के लिए चार्जिंग ग्रिड कोयले पर ही निर्भर रही तो ई-वाहनों का कुल प्रभाव 'और भी बुरा' हो सकता है। 

 
ग्रीनस्टोन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'ई वाहनों के साथ चार्जिंग की समस्या है। अगर ग्रिड मुख्यत: कोयले पर ही निर्भर रहती हैं तो इसका कुल प्रभाव नकारात्मक हो सकता है। अमेरिका में कुछ जगहों पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाना, साधारण पेट्रोल-डीजल वाहनों को चलाने से अधिक नुकसानदायक हैं क्योंकि यहां ज्यादातर ग्रिड कोयला आधारित हैं जो कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन करता है।' उन्होंने कहा, 'अगर हमारा लक्ष्य पर्यावरण प्रदूषण को कम करना है तो मुझे ऐसा लगता है कि यह करने के दूसरे कारगर तरीके मौजूद हैं।'
 
भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र लगातार मंदी की मार झेल रहा है और अगस्त महीने में बिक्री बुरी तरह प्रभावित रही। सायम का कहना है कि इस महीने थोक वाहन बिक्री वर्ष 1997-98 के बाद सबसे कम रही। यात्री वाहन बिक्री भी 31.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 10 महीने के निचले स्तर पर आ गई। इसका एक कारण केंद्र सरकार द्वारा ई-वाहनों को खरीदने के लिए जोर दिया जाना और पेट्रोल-डीजल इंजनों को वर्ष 2030 तक चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की पहल को माना जा सकता है। हालांकि कुछ समय पहले ही आर्थिक मंदी और ऑटो क्षेत्र में नौकरियों में कमी की खबरों के बीच सरकार ने मदद करने का भरोसा जताया है। 
 
सरकार के प्रारंभिक लक्ष्यों से असहमति जताते हुए ग्रीनस्टोन बताते हैं कि नॉर्वे जैसे देश में, जहां फिलहाल 36 प्रतिशत वाहन इलेक्ट्रिक हैं, वहीं भी 100 प्रतिशत ई-वाहनों का लक्ष्य 2045-2050 से पहले हासिल नहीं किया जा सकता। हालांकि इस लक्ष्य को पाने के लिए ई-वाहनों की उच्च लागत के चलते सरकार को भारी सब्सिडी देनी होगी। ग्रीनस्टोन ने कहा, 'कैलिफोर्निया का ई-वाहन बाजार 2-4 प्रतिशत के करीब ही है। अमेरिका में भी 1-2 प्रतिशत ही ई-वाहन हैं। विश्व के किसी भी हिस्से में, चाहे वह चीन हो, अमेरिका या नॉर्वे, भारी सब्सिडी दिए बिना ई-वाहनों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता। इसके लिए काफी अधिक सब्सिडी की जरूरत होगी।' 
 
वह इंटरनैशनल ग्रोथ सेंटर (आईसीजी) में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आए हुए थे। आईसीजी इंडिया प्रोग्राम के प्रोग्राम निदेशक और पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणव सेन ने कहा कि बैटरियों से होने वाले प्रदूषण के बारे में भी विचार करना होगा।ग्रीनस्टोन ने बताया कि अधिक खर्चीला होने के कारण नॉर्वे ने भी ई-वाहन से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं और वहां पर बैटरियों के उपयोग को लेकर भी लंबी बहस चल रही है। वह कहते हैं, 'कोई नहीं जानता कि उपयोग होने के बाद बैटरी का निपटान कैसे हो या उसका दोबारा उपयोग किस तरह किया जाए।'
 
वस्तु एवं सेवाकर परिषद ने पिछली बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी दरें 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी थीं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी ई-वाहनों की खरीद और बैटरी निर्माण पर कर लाभ देने की घोषणा की है। इसके चलते ऑटो क्षेत्र से भी जीएसटी दरों में कटौती की मांग आ रही है जो वर्तमान में 28 प्रतिशत (सेस के अतिरिक्त) है। ग्रीनस्टोन ने बताया कि ई-वाहनों के अलावा लागत प्रभावी दूसरे तरीकों के जरिये भी प्रदूषण में कमी की जा सकती है। वह सूरत में उद्योग आधारित 'कैप ऐंड ट्रेड' उत्सर्जन परमिट परियोजना चलाते हैं। इसके तहत उच्च गुणवत्ता वाले डेटा के साथ रियल टाइम ट्रैकिंग के जरिये उद्योग को उत्सर्जन परमिट खरीदने और बेचने की अनुमति मिलती है। 
 
नीति आयोग की योजना के अनुसार वर्ष 2030 के बाद बिक्री के लिए उपलब्ध सभी वाहन इलेक्ट्रिक होंगे। साथ ही, सभी दोपहिया या तिपहिया वाहन वर्ष 2023 तक और वाणिज्यिक वाहन 2026 तक ई-वाहनों में तब्दील हो जाएंगे। सड़क, परिवहन तथा राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने वर्ष 2017 में घोषणा की थी कि भारत का वाहन उद्योग वर्ष 2023 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक हो जाएगा। उन्होंने उद्योग संगठन के एक कार्यक्रम में कहा था, 'मैं यह करने जा रहा हूं। चाहे आपको पसंद आए या नहीं। मैं आपसे यह पूछ नहीं रहा। मैं इसे लागू कर दूंगा।' हालांकि आर्थिक मंदी के चलते पिछले सप्ताह गड़करी ने स्पष्ट किया था कि सरकार का पेट्रोल या डीजल से चलने वाले वाहनों को प्रतिबंधित करने का कोई इरादा नहीं है। 
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