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वाहन बिक्री में सचमुच मंदी या जीएसटी में राहत पाने की रणनीति!

टी ई नरसिम्हन /  September 10, 2019

बेनी और सी प्रसन्ना चेन्नई के नजदीक वाहनों का अड्डा कहलाने वाले उरागदम में एक दोपहिया संयंत्र में प्रशिक्षु थे। लेकिन 700 ठेका मजदूरों के साथ उनकी भी छंटनी हो गई। कोयंबटूर में एक कारखाने में श्रमिक एस शिवा की नौकरी भी चली गई। अब वह ड्राइविंग करते हैं और पिछली नौकरी के मुकाबले आधा ही कमाते हैं। बेनी, प्रसन्ना और शिवा उन 80,000 से 1 लाख लोगों में शामिल हैं, जो वाहन मंदी के कारण तमिलनाडु में नौकरी गंवा चुके हैं। मगर इस क्षेत्र से जुड़े कई लोगों का आरोप है कि मांग तो घटी है, लेकिन कुछ उपकरण निर्माता (ओईएम) कंपनियां वाहनों और कल-पुर्जों पर जीएसटी घटाने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की खातिर ठेका मजदूरों को निकाल रही हैं। बहरहाल छंटनी का सिलसिला बरकरार है। डेमलर, यामाहा, निसान, अपोलो टायर्स, अशोक लीलैंड और टीवीएस समूह की कंपनियों ने अपने ठेका कर्मी घटाए हैं। इन कंपनियों ने कामकाजी दिन भी घटाए हैं। सीटू, तमिलनाडु के महासचिव ए सुंदरराजन का आरोप है कि 1,000 ठेका कर्मी और प्रशिक्षु निकाले हैं। 

 
डेमलर इंडिया ने इससे इनकार करते हेए केवल 200 अस्थायी कर्मी घटाने की बात कबूल की है। डेमलर के अधिकारी ने कहा, 'कुछ दिन उत्पादन बंद करना पड़ा। हमने कुछ समय तक एक पाली में उत्पादन का फै सला किया है। कुछ ठेका कर्मी हटाने होंगे और मांग के मुताबिक अनुबंध करने होंगे। मगर स्थायी श्रमिकों की छंटनी नहीं होगी।' 1,000 ठेका कर्मियों की छंटनी के सीटू के दावे के बीच अपोलो टायर्स के एक अधिकारी ने कहा, 'रीप्लेसमेंट बाजार में हमारे टायरों की मांग बनी हुई है और वाहन बिक्री में मंदी से ओई की मांग घटी है। उत्पादन को बाजार मांग के अनुरूप ढालना होगा और  ठेका कर्मियों की संख्या भी दुरुस्त करनी होगी।'
 
700 स्थायी श्रमिकों की छंटनी की खबरों पर भेजे ईमेल का यामाहा इंडिया ने जवाब नहीं दिया। निसान ने भी रेनो-निसान के चेन्नई संयंत्र में 1,000 अस्थायी श्रमिकों की छंटनी का दावा नकार दिया। टीवीएस गु्रप की कंपनियों, अशोक लीलैंड, हुंडई और रॉयल एनफील्ड ने आंतरिक सूचना जारी कर उत्पादन में कमी की घोषणा की है। अशोक लीलैंड जैसी कुछ कंपनियां कर्मचारियों को हटाने की योजना बना रही हैं। श्रमिक मुहैया कराने वाली एक कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि पहले वे चेन्नई की एक कार कंपनी को रोज 1,000 मजदूर देते थे मगर अब 400 ही भेजते हैं। सीआईईएल एचआर सर्विसेज के मुख्य कार्याधिकारी आदित्य नारायण मिश्रा के अनुसार कार्यदिवस घटने से 3 माह में श्रमिकों की आय 12-15 फीसदी घट गई।
 
दक्षिण के मैनचेस्टर में संकट
 
कोयंबटूर के बाहरी छोर पर स्थित अरासुर में चार महीने पहले कारखाने जोर-शोर से चल रहे थे। अब वहां भुतहा सन्नाटा है और कई कारखानों में उत्पादन 50-60 फीसदी तक घट गया है। इससे 50,000 नौकरियों पर संकट आ गया, जिनमें ज्यादातर छोटी एवं मझोली इकाइयां हैं। कोयंबटूर टाइनी ऐंड स्मॉल फाउंड्री ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं श्री जयराम फाउंड्रीज के मालिक ए शिव षण्मुखकुमार ने बताया कि प्रमुख कारखाने वाहन क्षेत्र के लिए हर महीने लगभग 8,000-10,000 टन का उत्पादन कर रहे थे, जबकि 400 छोटी इकाइयां करीब 2,000 टन की क्षमता के साथ पंप सेक्टर की जरूरत पूरी कर रही थीं। बड़े कारखानों के ऑर्डर एकदम घटे तो वे पंप बनाने लगे। इससे छोटी इकाइयां डूब गईं क्योंकि कीमत के मामले में वे बड़ी कंपनियों से मुकाबला नहीं कर सकीं।
 
एक बड़ी फाउंड्री के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि 6 महीने पहले उनकी कंपनी ने चेन्नई में ओईएम की जरूरतें पूरी करने के लिए 4 करोड़ रुपये में 10 मशीन खरीदीं। तीन महीने ऑर्उर रद्द होने लगे। अब कर्ज की ईएमआई और 300 लोगों के वेतन पर उनकी कंपनी हर महीने 8 लाख रुपये खर्च करती है, जबकि अब केवल 60 कर्मचारियों जितना काम होता है। मगर एक बड़ी कार कंपनी के वेंडर का कहना है कि मंदी है, लेकिन उतनी गंभीर नहीं है जितनी दिखाई जा रही है। न तो स्थायी श्रमिक छांटे गए और न ही संयंत्र बंद हुए। एक कलपुर्जा निर्माता कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'ओईएम मंदी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे हैं ताकि सरकार पर जीएसटी दर 28 से घटाकर 18 फीसदी करने का दबाव बनाया जा सके।'
Keyword: vehicle, car, electric, petrol, diesel, GST,,
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