बिजनेस स्टैंडर्ड - मानेसर में कारोबार मंदा, त्योहार से आस
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, September 15, 2019 11:51 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

मानेसर में कारोबार मंदा, त्योहार से आस

अर्णव दत्ता /  September 10, 2019

मानेसर में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर स्थित इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) से करीब दो किलोमीटर दूर कुछ मजदूर, मजदूर यूनियन के नेता और कार्यकर्ता इक_े हुए हैं। ये सभी मानेसर-गुडग़ांव इलाके में कई वाहन कंपनियों के ठेका मजदूरों की छंटनी के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए आए हैं। दोपहर बाद 4 बजे के करीब श्रम संगठन सीटू के कुछ नेता भी उनके साथ आ जुड़ते हैं और विरोध तेज हो जाता है। लाउडस्पीकर पर भाषण गूंज रहे हैं और उनके बीच आंदोलनकारियों के नारों की आवाज भी तेज होती जा रही है। 

 
सीटू की हरियाणा इकाई के महासचिव सतबीर सिंह छोटा सा भाषण देकर हटे हैं और वह बहुत संजीदा नजर आते हैं। पिछले कुछ महीनों में सिंह हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र में ऐसी कभी सभाओं में शामिल हुए हैं। मानेसर-गुडग़ांव क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा वाहन निर्माण केंद्र है और इस उद्योग में जारी सुस्ती ने यहां तगड़ी चोट की है। कारों की बिक्री में साल भर पहले के मुकाबले 20 फीसदी गिरावट आई है और मारुति सुजूकी, होंडा मोटरसाइकल ऐंड स्कूटर्स इंडिया (एचएमएसआई) और हीरो मोटोकॉर्प जैसी कंपनियों को उत्पादन में कमी करनी पड़ी है। इससे हजारों ठेका कर्मचारियों की छंटनी हुई है। सीटू के हिसाब से ऐसे कम से कम 40,000 ठेका कर्मचारी हैं, जिनके अनुबंध पिछले कुछ महीनों में नहीं बढ़ाए गए हैं। कार्यकर्ताओं का दावा है कि आंकड़ा 50,000 है, जिनमें 1 साल में बंद हुए दर्जनों कारखानों में काम करने वाले मजदूर भी हैं।
 
कारों की मांग घटी तो उनके लिए कल-पुर्जे आदि बनाने वाले 15-16 कारखानों (आईएमटी मानेसर और धारूहेड़ा में ओमैक्स का संयंत्र, बिनोला में ऑटोमैक्स का संयंत्र और सिधरावली में स्पीडोमैक्स संयंत्र) में भी काम बंद हो गया है और  हजारों अस्थायी कामगारों की छंटनी हो गई है।  मानेसर-गुडग़ांव इलाके में सात बड़े वाहन कारखाने हैं। मारुति सुजूकी के यहां तीन कारखाने हैं और देश की सबसे बड़ी दोपहिया कंपनी हीरो मोटोकॉर्प के दो कारखाने हैं। सुजूकी मोटरसाइकल और एचएमएसआई का भी एक-एक कारखाना यहां है। इनके अलावा बड़ी वाहन कंपनियों पर निर्भर 1,500 छोटी और मझोली इकाइयां भी हैं। अच्छे दिनों में इनमें 2 लाख से ज्यादा ठेका मजदूर काम करते थे।
 
मारुति सुजूकी देश की सबसे बड़ी कार कंपनी है और यात्री वाहन बाजार में उसकी करीब 56 फीसदी हिस्सेदारी है। लेकिन मंदी की सबसे तगड़ी चपत भी इसी कंपनी को लगी है। मारुति के गुडग़ांव संयंत्र में श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष राजेश कुमार का कहना है कि कारखाने में उत्पादन 30-35 फीसदी तक कम किया गया है। कुमार बताते हैं, 'कमजोर मांग की वजह से उत्पादन घटाया गया है। अभी तक किसी स्थायी कामगार को नहीं निकाला गया है, लेकिन हजारों अस्थायी कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं और ठेका कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई है।' कुमार के मुताबिक तीनों कारखानों में 10,000 अस्थायी कर्मचारी थे। अब घटकर 6,000 ही रह गए हैं।
 
मारुति के इंजन बनाने वाले कारखाने मानेसर पावरट्रेन में भी उत्पादन 20-25 फीसदी कम कर दिया गया है। यहां वरिष्ठ कामगार सुभाष प्रधान बताते हैं कि छंटनी कम हुई है। लेकिन पूरा उद्योग मंदी से जूझ रहा है तो कोई नहीं बच पाएगा। मंदी का असर छोटी और मझोली इकाइयों पर ही नहीं पड़ा है, बड़ी वाहन कंपनियों से ऑर्डर कम होने के कारण रीको कास्टिंग और शिवम ऑटोटेक जैसी नामी कंपनियों को भी उत्पादन घटाना पड़ा है। मारुति के लिए पुर्जे तैयार करने वाली कंपनी बेलसोनिका में अब केवल दो पालियों में काम हो रहा है। इस कंपनी ने भी इस साल 400 अस्थायी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है। ऐसे में कामगार वेतन बढ़ोतरी की उम्मीद ही नहीं कर सकते। बेलसोनिका में काम करने वाले अजीत चौहान ने कहा, 'गुडग़ांव जैसे इलाके में केवल 8-9 हजार रुपये में हमारा गुजारा कैसे होगा।'
 
कंपनी कितनी भी बड़ी हो, ठेका कर्मचारियों पर ही ज्यादा मार पड़ी है। मानेसर पावरट्रेन जैसे बड़े संयंत्रों में ठेके पर कर्मचारी रखे जाते हैं, जो आम तौर पर ओडिशा, बिहार और उत्तराखंड से आते हैं। इन कर्मचारियों को आईटीआई कॉलेजों और दूसरे कौशल विकास संस्थानों से भर्ती किया जाता है, लेकिन ज्यादातर अब अपने शहर लौट चुके हैं।
 
कंपनी छोटी, चिंता बड़ी
 
ऐसा नहीं है कि मौजूदा मंदी से सिर्फ बड़े वाहन निर्माता और कल-पुर्जा आपूर्तिकर्ता कंपनियों पर ही असर पड़ा है। बड़ी कल-पुर्जा कंपनियों को माल देने वाले छोटे आपूर्तिकर्ताओं की भी कमर टूट गई है। कृष्णा कास्टिंग में परिचालन देखने वाले राजसिंह तोमर बेहद मायूस हैं। करीब 20 कामगारों को ठेके पर रखने वाली इस छोटी सी इकाई का काम पिछले एक साल में करीब 50 फीसदी कम हो गया है। बिक्री लगातार घट रही है, इसलिए 8 कामगारों को और निकालने की योजना बनाई जा रही है।
 
इसी तरह कल-पुर्जा बनाने वाली कंपनियों को छोटे वाहन पुर्जे मुहैया कराने वाली जैना टूल्स ने भी जनवरी से अब तक अपने आधे कामगारों को निकाल दिया है। अब कंपनी केवल 60 फीसदी क्षमता पर काम कर रही है। मिनी ट्रक एसोसिएशन, कासन के संजय चौहान मानेसर में मारुति के कारखाने के बाहर अपने दफ्तर में अकेले बैठे हैं। वहां न तो ट्रक हैं न ही ट्रक चालक। ज्यादातर चालक काम पर आए ही नहीं हैं या गांव लौट चुके हैं। चौहान बताते हैं कि कारोबार में 75 से 80 फीसदी तक कमी आई है क्योंकि कल-पुर्जा संयंत्रों से आपूर्ति बहुत घट गई है। कार ढोने वाले बड़े कंटेनर ट्रक चलाने वाले किशन चौहान बिहार के मुंगेर जिले से यहां आए थे। अब वह गांव लौटने की सोच रहे हैं क्योंकि पिछले छह महीने में उनकी आमदनी तेजी से घटी है।
 
वाहन कल-पुर्जा बनाने वाली कंपनियों के संगठन एक्मा के महानिदेशक विनी मेहता बताते हैं कि मानेसर-गुडग़ांव इलाके में ही कम से कम 30,000 लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं। उनका कहना है कि सबसे छोटी वेंडर कंपनियों पर मंदी की सबसे तगड़ी मार पड़ी है।
 
त्योहारों से लगी आस
 
हालांकि बाजार में इस समय सूरत बदलने के कोई आसर नहीं दिख रहे हैं, लेकिन कई लोग मानते हैं कि तस्वीर जल्द ही सुधर जाएगी। मारुति के गुडग़ांव संयत्र में काम करने वाले कुमार कहते हैं कि कंपनी त्योहारी सीजन के लिए कई तरहकी छूट और विशेष बिक्री योजनाएं पेश करने जा रही है। इनसे बिक्री में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। मानेसर पावरट्रेन से प्रधान को भी इसी तरह की उम्मीद है।
Keyword: vehicle, car, electric, petrol, diesel, manesar,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या 5जी परीक्षण में चीन की कंपनियों से परहेज करना है सही कदम?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.