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आसियान के साथ एफटीए की होगी समीक्षा

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली September 10, 2019

आसियान-भारत मुक्त व्यापार समझौते (एआईएफटीए) की अब समीक्षा की जाएगी। ऐसा घरेलू उद्योगों की ओर से बार बार इसकी आलोचना किए जाने के बाद किया जा रहा है। उद्योगों का कहना है कि इस समझौते से भारत से निर्यात के मुकाबले आयात में ज्यादा तेज वृद्घि हो रही है। आज बैंकॉक में आसियान समूह का प्रतिनिधित्व करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की थाई उप प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री जुरिन लक्षानसावित से मुलाकात के बाद दोनों पक्षों ने समझौते की समीक्षा करने का निर्णय लिया। 16वीं आसियान इंडिया इकनॉमिक मिनिस्टर्स (एईम) बैठक में दोनों पक्षों ने वस्तु व्यापार में पहले से अधिक उपयोग के अनुकूल, आसान और कारोबार के लिए व्यापार सुगमता पर समझौता करने का निर्णय लिया।
 
दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के 10 देशों के समूह के साथ मुक्त व्यापार क्षेत्र 1 जनवरी 2010 से प्रभाव में आया था। 2018-19 में इस ब्लॉक को किया जाने वाला निर्यात 37.4 अरब डॉलर का रहा था जो 9 फीसदी अधिक है। दूसरी तरफ आयात इससे काफी अधिक 59.31 अरब डॉलर का रहा जो पिछले वर्ष के 47.31 अरब डॉलर से 25 फीसदी अधिक है। एक वरिष्ठï सरकारी अधिकारी ने कहा, 'सरकार समझौते के भावी सुधारों पर चर्चा करते हुए काफी संख्या में शुल्क के दायरों पर गुण दोष की दृष्टिï से विश्लेषण करेगी और उद्योग संगठनों को अपने विचार देने के लिए कहा जा सकता है।' हालांकि, भारत का मानना है कि यह समझौता भारतीय कारोबार को अपने दक्षिण एशियाई समकक्षों से जुडऩे में अहम रहा है और घरेलू उद्योगों को मिल रही रियायती दरों का बेहतर उपयोग करने की जरूरत है।
 
बढ़ती लागत
 
नीति आयोग के एक अध्ययन के मुताबिक भारतीय निर्यातकों द्वारा क्षेत्रीय व्यापार समझौतों (आरटीए) की उपयोगिता दर बहुत कम (5 से 25 फसदी के बीच) है। इसमें कहा गया था कि जिन क्षेत्रों में कारोबार घाटा बदतर हालात में पहुंच गए वह आसियान को होने वाले भारतीय निर्यात का करीब 75 फीसदी था जबकि व्यापार लाभ वाले क्षेत्रों में भी मामूली सुधार ही दिखाई पड़ा। नीति आयोग ने बिना किसी लाग लपेट के कहा था, 'समग्र तौर पर यह समझा जा सकता है कि एआईएफटीए के तहत व्यापार की भारतीय गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं आया है।' 
 
शुरुआती समझौते के तहत आसियान के सदस्य देश और भारत इस बात पर सहमत हुए थे कि वे सभी सामानों के 76.4 फीसदी पर आयात शुल्क को सक्रिय तौर पर घटाकर और हटाकर अपने अपने बाजारों को खोलेंगे। तब से भारत ने करीब 9000 उत्पादों पर शुल्क समाप्त कर दिए। भारत ने अपने निर्यात के करीब 10 फीसदी उत्पादों को शुल्क कटौती से बाहर रखा था। विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि थाइलैंड, फिलिपींस, म्यांमार, ब्रूनेई और वियतनाम ने भारत के मुकाबले अधिक उत्पादों को निर्यात से बाहर रखा है।
 
उद्योग संगठनों ने भी संकेत दिए हैं कि भारत का मलेशिया और सिंगापुर के साथ अलग से आरटीए है जबकि वे व्यापक एआईएफटीए का हिस्सा बने हुए हैं। इस सबके कारण दक्षिण कोरिया और जापान के साथ मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों की अधिक सख्त समीक्षा की मांग उठने लगी है। इन समझौतों से इन देशों के साथ भारत के कारोबारी घाटे में कमी नहीं आ पाई है। पिछले वार्षिक बजट के आंकड़े बताते हैं कि आसियान के साथ कारोबारी समझौते के कारण भारत की राजस्व हानि 2018-19 में दोगुने से अधिक बढ़कर 26,000 करोड़ के पास पहुंच गया है।  
 
आरसेप का भय 
 
दूसरी तरफ सरकार को डर है कि प्रस्तावित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसेप) के मूर्त रूप लेने पर इसके लिए राजस्व नुकसान का आंकड़ा 60,000 करोड़ रुपये की ऊंचाई पर पहुंच सकता है। आसियान के साथ भारत केमौजूदा एफटीए के आधार पर आरसीईपी उन सभी देशों को शामिल करेगा जिनके साथ आसियान का कारोबारी समझौता है। इन देशों में न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल है और यह सबसे महत्त्वाकांक्षी कारोबारी समझौता है जिस पर फिलहाल बातचीत जारी है। 
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