बिजनेस स्टैंडर्ड - आरसेप का नाजुक वक्त
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 12, 2019 07:12 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

आरसेप का नाजुक वक्त

संपादकीय /  September 09, 2019

केंद्र सरकार जल्द ही भारत के आर्थिक अभिविन्यास के बारे में एक अहम फैसला करने जा रही है। मुक्त व्यापार संबंधी प्रस्तावित समझौते क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसेप) को लेकर जारी बातचीत की समयसीमा खत्म होने के करीब है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान) के 10 सदस्यों को चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के अलावा भारत से भी जोडऩे के लिए प्रस्तावित इस मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर चल रही बातचीत के नवंबर में होने वाले आसियान सम्मेलन तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। गत वर्षों में यह साफ हो चुका है कि आरसेप समझौते के संपन्न होने की राह में भारत का नजरिया  बड़ा अवरोध रहा है। दरअसल भारत की यह चिंता वाजिब है कि चीन के साथ एफटीए का हिस्सा बनना उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए बहुत नुकसानदेह हो सकता है। चीन के साथ व्यापार में भारत पहले से ही बड़े घाटे की स्थिति में है। लिहाजा चीनी उत्पादों पर लगने वाला सीमा शुल्क कम करने की जरूरत टालने की कोशिश होती रही है। आरसेप गठजोड़ के अन्य देशों ने यह मान लिया है कि करीब 90 फीसदी उत्पादों पर शुल्क ही नहीं लगेगा। ऐसे में अगर भारत इस प्रक्रिया का हिस्सा बने रहना चाहता है तो उसे निश्चित तौर पर कुछ समझौते करने होंगे और गत दिनों बैंकॉक में हुई मंत्रिस्तरीय बैठक में इसका उल्लेख भी किया गया। आरसेप के कुछ सदस्यों ने कथित तौर पर भारत से यह जानना चाहा है कि क्या वह इस समूह का हिस्सा बने रहना चाहता है?

संबंधित खबरें
आरसेप से परे
 
सवाल है कि भारत अपने वार्ताकारों को इस मुद्दे पर किस हद तक समझौता करने की छूट देगा और बातचीत के अंत में उभरने वाली स्थिति बाकी देशों को कितनी स्वीकार्य होगी? भारत ने पहले ही आसियान, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ एफटीए समझौते किए हुए हैं लेकिन अभी तक इन्हें पूरी तरह अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। चिंता की बात केवल चीन से आने वाले सस्ते सामान ही नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दुग्ध उत्पादों को भी लेकर भारत आशंकित है। वाणिज्य मंत्रालय हालिया समय में कई बार यह कह चुका है कि एफटीए समझौते भारतीय उद्योग के लिए उतने फायदेमंद नहीं रहे हैं। एफटीए वाले देशों के साथ व्यापार में भारत का आयात तो बढ़ गया है लेकिन इन देशों को किए जाने वाले भारतीय निर्यात में वैसी वृद्धि नहीं हुई है। लेकिन निर्यात में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने का ठीकरा व्यापार समझौते पर फोडऩा निरर्थक है। यह घरेलू स्तर पर भारतीय उद्योग को प्रतिस्पद्र्धी बढ़ाने के लिए अहम सुधारात्मक कदम उठाने की अनिच्छा का नतीजा है।
 
इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत ने अपनी आयात शुल्क नीति में एक तरह का संरक्षणवादी नजरिया अपनाया हुआ है और आयात विकल्प तलाशने की कोशिश करता है। चीनी आयात को लेकर भारत की चिंता भी हद से ज्यादा है। इस संदर्भ में चीन समेत कई देशों के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते का अंग बनना भारत की आयात नीति की मौजूदा दिशा से खासा अलग होगा। ऐसे में सरकार के पास दो विकल्प रह जाते हैं। पहला, वह मौजूदा संरक्षणवादी रवैया जारी रख सकती है लेकिन उसकी कीमत आरसेप समूह से बाहर होकर और दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में अलग-थलग पड़कर चुकानी होगी। दूसरा रास्ता यह है कि भारत आरसेप समझौते का एक साधन के तौर पर इस्तेमाल करे, जिस तरह चीन ने विश्व व्यापार संगठन की अपनी सदस्यता का फायदा इस सदी के शुरुआती वर्षों में उठाया था। भारत इस समूह का सदस्य बनने के साथ ही घरेलू स्तर पर अहम सुधार लागू कर सकता है। निस्संदेह दूसरा विकल्प अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक लाभ और भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के भी लिहाज से बेहतर होगा। सवाल है कि क्या सरकार के भीतर जरूरी कड़े फैसले लेने की राजनीतिक इच्छा है?
Keyword: RSEP, asian, FTA,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आईआईपी में गिरावट आर्थिक सुस्ती गहराने का संकेत है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.