बिजनेस स्टैंडर्ड - कर्ज को बाहरी बेंचमार्क से जोडऩा फायदेमंद
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कर्ज को बाहरी बेंचमार्क से जोडऩा फायदेमंद

तिनेश भसीन /  September 08, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए निर्देश के मुताबिक सभी बैंकों को 1 अक्टूबर से अपने खुदरा ऋणों को हर हाल में बाहरी बेंचमार्क दर से जोडऩा पड़ेगा। जाहिर है कि ऐसा होने पर अगले महीने से आवास और वाहन ऋण की ब्याज दरों में कुछ कमी आ सकती है। इसकी उम्मीद इसलिए है कि जिन सरकारी बैंकों ने अपनी बेंचमार्क दरों को सितंबर में रीपो दर से जोड़ा है, उनसे मिलने वाले नए कर्जों की ब्याज दर कम से कम 20 आधार अंक सस्ती हो गई है। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक का ही उदाहरण ले लीजिए। यह बैंक रीपो दर से जोडऩे के बाद केवल 8.05 फीसदी की दर पर आवास ऋण प्रदान कर रहा है और इस समय देश में यह सबसे सस्ती आवास ऋण दर है। बैंक की सीमांत लागत पर आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) से जुड़ी आवास ऋण ब्याज दर करीब 30 आधार अंक अधिक यानी 8.35 फीसदी है। पंजाब नैशनल बैंक की रीपो दर और एमसीएलआर से जुड़ी आवास ऋण दरों में 25 आधार अंक का अंतर है। 

 
वाहन ऋण पर नजर डालें तो अंतर और भी ज्यादा हो जाता है। इंडियन बैंक की वाहन ऋण ब्याज दर की बात करें तो एमसीएलआर पर आधारित ब्याज दर 9.45 फीसदी है और रीपो दर से जुड़ी ब्याज दर 8.85 फीसदी है। इस तरह दोनों दरों में 60 आधार अंक का फर्क है। माईलोनकेयर के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी गौरव गुप्ता कहते हैं, 'नए कर्ज पर ब्याज दरों में गिरावट केवल बेंचमार्क में तब्दीली की वजह से नहीं आई है। हकीकत यह है कि बैंकों ने पहले भारतीय रिजर्व बैंक की दर कटौती का फायदा अपने ग्राहकों को दिया ही नहीं था। यह फायदा ग्राहकों को अब मिल रहा है क्योंकि बैंकों को नए बेंचमार्क अपनाने पड़ रहे हैं।'
 
आरबीआई के गवर्नर ने भी कहा था कि केंद्रीय बैंक ने इस साल रीपो दर में कुल 75 आधार अंक की कटौती की है (अगस्त में की गई 35 आधार अंक की कटौती इसमें शामिल नहीं थी) लेकिन बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए ब्याज दरों में केवल 29 आधार अंक की कमी की है। उन्होंने इस पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि यह कटौती आरबीआई की उम्मीद के मुताबिक नहीं है। इसीलिए केंद्रीय बैंक ने सभी बैंकों को अपने खुदरा ऋण बाहरी बेंचमार्क से जोडऩे का निर्देश दिया। यह काम 1 अक्टूबर से शुरू करना होगा और सूक्ष्म, लघु तथा मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को देने वाले कर्ज भी इसी बेंचमार्क से जोडऩे होंगे। आरबीआई ने बैंकों के सामने बेंचमार्क की फेहरिस्त भी रखी है, जिनमें से कोई बेंचमार्क उन्हें चुनना पड़ेगा। इनमें रीपो दर, फाइनैंशियल बेंचमाक्र्स इंडिया (एफबीआईएल) द्वारा प्रकाशित तीन महीने और छह महीने के ट्रेजरी बिल की प्राप्तियां अथवा एफबीआईएल द्वारा ही प्रकाशित कोई भी अन्य बेंचमार्क बाजार ब्याज दर शामिल हैं। आरबीआई ने यह भी कहा है कि जिन ग्राहकों ने पहले ही फ्लोटिंग ब्याज दर पर कर्ज ले रखा है, उन्हें भी नए बेंचमार्क से जुड़ी ब्याज दर का फायदा मिलना चाहिए और इसके लिए उनसे किसी तरह का शुल्क नहीं वसूला जाना चाहिए। हां, इस बदलाव के लिए बैंक ग्राहकों से 'वाजिब' प्रशासनिक या कानूनी शुल्क ले सकते हैं। बैंक आम तौर पर तीन तरह के कर्ज फ्लोटिंग दर पर देते हैं - आवास ऋण, वाहन ऋण और संपत्ति के बदले ऋण।
 
बैंकिंग क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि बाहरी बेंचमार्क दर से जुड़े ऋण ज्यादा पारदर्शी होते हैं। इसकी वजह यह है कि बैंक बाहरी बेंचमार्क को अपने हिसाब से तय नहीं कर सकते। साथ ही बाहरी बेंचमार्क अपना लिया जाए तो नियामक द्वारा दरों में कटौती या बढ़ोतरी किए जाने पर ग्राहकों के लिए ब्याज दरों में भी कमीबेशी जल्द से जल्द हो जाती है। डिजिटल होम लोन ब्रोकर कंपनी स्विचमी के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी आदित्य मिश्रा समझाते हैं, 'कर्ज लेने वालों की बड़ी शिकायत यह रही है कि आरबीआई जब नीतिगत दरों में कटौती करता है तो उनके आवास ऋण की ब्याज दर में कमी बहुत देर में होती है। लेकिन केंद्रीय बैंक जैसे ही नीतिगत दरें बढ़ाता है, बैंक बयाज दरें फौरन बढ़ा देते हैं। जब कर्ज को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ दिया जाएगा तो इस तरह की शिकायतें अपने आप खत्म हो जाएंगी।'
 
आरबीआई ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि नीतिगत दरों में कटौती का फायदा एक निश्चित अवधि के भीतर ग्राहकों को मिल जाए। इसके लिए उसने कहा है, 'बाहरी बेंचमार्क के तहत ब्याज दर को तीन महीने में कम से कम एक बार ठीक किया जाएगा।' आरबीआई के नए नियम केवल बैंकों पर लागू होते हैं। हालांकि आरबीआई अब आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) का भी नियामक हो गया है, लेकिन उसने इन कंपनियों के लिए ऐसे नियमों की घोषणा नहीं की है। एचएफसी और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था की जानी चाहिए या उन्हें इससे बाहर रखना चाहिए, इस बारे में एक तरह की राय नहीं मिल रही है। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि इन कंपनियों को रकम अधिक ब्याज दर पर उधार मिलती है, इसलिए कौन सा बेंचमार्क अपनाना है और कौन सा नहीं, यह फैसला करने की छूट उन्हें दे दी जानी चाहिए।
 
मतलब साफ है। यदि आपने एचएफसी या एनबीएफसी से आवास ऋण लिया है तो जिस दर से आप ब्याज चुका रहे हैं और बेंचमार्क से जुडऩे के बाद बैंक जिस दर पर आवास ऋण देंगे, उनमें अच्छा खासा फर्क होगा। यदि आप कम दरों का फायदा उठाना चाहते हैं तो अपना कर्ज किसी बैंक में ले जाने पर विचार करें। यदि आपको अभी कम से कम 10 साल तक आवास ऋण चुकाना है तो ब्याज दर में 25 आधार अंक के अंतर से आपकी अच्छी खासी बचत हो सकती है। कंप्यूटर ऑन कीजिए, किसी भी ऑनलाइन कैलकुलेटर का इस्तेमाल कीजिए और देखिए कि अपना आवास ऋण बैंक में ले जाने पर आपको कितनी बचत हो सकती है। यह आंकड़ा सामने रखिए और फैसला कीजिए कि कर्ज एनबीएफसी या एचएफसी में ही रखना है अथवा बैंक में ले जाना है।
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