बिजनेस स्टैंडर्ड - संपूर्ण बाजार धारणा कमजोर बनी हुई है : निश्चल माहेश्वरी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, September 15, 2019 11:41 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

संपूर्ण बाजार धारणा कमजोर बनी हुई है : निश्चल माहेश्वरी

पुनीत वाधवा /  September 08, 2019

सरकार ने अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने के लिए पिछले कुछ दिनों के दौरान कई घोषणाएं कीं। सेंट्रम ब्रोकिंग में मुख्य कार्याधिकारी (संस्थागत इक्विटी एवं परामर्श) निश्चल माहेश्वरी ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि ताजा घटनाक्रम को देखते हुए भारतीय बाजार 'तेजी पर बेचें' के बजाय 'गिरावट पर खरीदें की रेटिंग का हकदार बन गया है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
क्या वित्त मंत्री द्वारा घोषित शुरुआती उपायों को लेकर बाजार ज्यादा उत्साहित हैं?
 
निवेशकों ने इन घोषणाओं का स्वागत किया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) और घरेलू निवेशकों पर अधिभार वापस लेकर, ऋण प्रवाह आसान बनाकर और तेज क्रियान्वयन पर जोर देकर सरकार ने बाजार कारोबारियों को बहुप्रतीक्षित राहत प्रदान की है। इस तरह की रियायत की लंबे समय से जरूरत थी। हालांकि सरकार वाहन क्षेत्र के लिए और ज्यादा कुछ कर सकती थी। कर कटौती या किसी अन्य तरह से बजट सहायता से धारणा में सुधार आया है। एमएसएमई और बैंक जैसे क्षेत्रों को सही दिशा में आगे बढऩे में मदद मिलेगी। क्रियान्वयन और उसके प्रभाव पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी।
 
ताजा घोषणाओं के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) पर आपका क्या नजरिया है?
 
पीएसबी में सरकार द्वारा अतिरिक्त पूंजी डालने से अच्छी गुणवत्ता वाले कई पीएसयू बैंकों में निवेश पर विचार किया जा सकता है। जहां तक एनबीएफसी का सवाल है, आपको नकदी समर्थित कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। पीएसबी के समेकन की घोषणा निश्चित तौर पर सही दिशा में उठाया गया एक कदम है। विलय से ऋण वृद्घि को मजबूती मिलने और डगमगाती अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मदद मिल सकती है।
 
इन घटनाक्रम को एफपीआई किस नजरिये से देख रहे हैं?
 
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) और एफपीआई ने इन कदमों का स्वागत किया है। इन घोषणाओं के बाद एफआईआई बिकवाली में कमी आई है। लेकिन अमेरिका-चीन व्यापारिक तनाव को लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के साथ साथ घरेलू खपत में नरमी को देखते हुए संपूर्ण बाजार धारणा कमजोर बनी हुई है। सरकार द्वारा घोषित उपायों से अल्पावधि में निवेश की निकासी सीमित होने की संभावना है। वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही में सुधार के संकेतों के साथ हम निवेश प्रवाह में तेजी देख सकते हैं। 
 
उभरते बाजारों (ईएम) में निवेश स्थान के तौर पर भारत की क्या हैसियत है?
 
अन्य ईएम की तरह भारत ने भी इस साल कमजोर प्रदर्शन किया है। जुलाई में एफआईआई ने लगभग 3 अरब डॉलर की इक्विटी बिकवाली की। उम्मीद थी कि नई सरकार अर्थव्यवस्था में वृद्घि को मजबूत बनाने क लिए सुधारों की घोषणा करेगी। हालांकि बढ़ती वैश्विक चिंताओं और घरेलू वित्तीय व्यवस्था पर मौजूदा तनाव की वजह से धारणा प्रभावित हुई है। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार एवं निवेश में भी कमजोरी के बीच भारत को अब ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है जिसमें खपत वृद्घि घट रही है, वाहन एवं एफएमसीजी क्षेत्रों में बिक्री में कमी आई है और कॉरपोरेट आय में नरमी दिखी है। इक्विटी में निवेश के लिए अल्पावधि परवेश न सिर्फ भारत में नाजुक बना हुआ है बल्कि सभी उभरते देशों में यही स्थिति है। 
 
क्या आपके अनुसार भारत 'तेजी में बिकवाली' वाला बाजार है या फिर 'गिरावट पर खरीदारी' का?
 
वित्त मंत्री द्वारा ताजा घोषणाओं और कई अन्य संभावित उपायों से भारत 'तेजी में बिक्री' के बाजार से हटकर 'गिरावट पर खरीदारी' का बाजार बन गया है। बाजार में गिरावट से कई शेयरों का मूल्यांकन आकर्षक हो गया है। ताजा उपायों से मौजूदा मंदी से निपटने के समाधानों पर काम करने की सरकार की इच्छा शक्ति का संकेत मिलता है। 
 
आप किन क्षेत्रों पर सकारात्मक और किन पर नकारात्मक हैं?
 
हम अपने पोर्टफोलियो के नजरिये से रक्षात्मक बने हुए हैं और खपत, आईटी, फार्मा तथा यूटिलिटी पर नकारात्मक हैं। हमारा बैंकिंग (निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों) पर समान नजरिया है। हम वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए धातु क्षेत्र से परहेज करेंगे और लार्ज-कैप और चुनिंदा मिड-कैप पर ध्यान देंगे।
 
हमें वैश्विक केंद्रीय बैंकों से किस तरह की नीतिगत प्रतिक्रिया की उम्मीद है?
 
जी-4 केंद्रीय बैंकों द्वारा निवेश बढ़ाने और मुद्रास्फीति दबाव को नियंत्रित करने के प्रयास में अपनी आगामी समीक्षाओं में ढील दिए जाने का संकेत मिला है। मौजूदा परिवेश से सोने की चमक बढ़ी है। यदि व्यापारिक तनाव बढ़ा और अनिश्चितता में इजाफा हुआ तो हम सोने और बॉन्ड जैसी सुरक्षित समझे जाने वाले परिसंपत्ति वर्गों में निवेश बरकरार रख सकते हैं। 
Keyword: equity, PE, MF, market,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या 5जी परीक्षण में चीन की कंपनियों से परहेज करना है सही कदम?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.