बिजनेस स्टैंडर्ड - छोटे और मझोले उद्योगों के माध्यम से सरकार का रोजगार बढ़ाने पर जोर
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छोटे और मझोले उद्योगों के माध्यम से सरकार का रोजगार बढ़ाने पर जोर

मेघा मनचंदा और ज्योति मुकुल /  September 06, 2019

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग के मंत्री नितिन गडकरी को उनके काम के लिए जाना जाता है। मेघा मनचंदा और ज्योति मुकुल के साथ बातचीत में मंत्री ने कहा कि एनएचआई के वित्तपोषण का मुख्य स्रोत संपत्ति से रकम जुटाना बनेगा। संपादित अंश...

 
राजमार्ग क्षेत्र आर्थिक मंदी से कितनी दूर है? क्या 45 किलोमीटर प्रति दिन सड़क निर्माण का काम पटरी पर है?
 
हां, पूरी तरह से पटरी पर है। पिछले 5 साल में राजमार्ग क्षेत्र का प्रदर्शन बहुत बेहतर रहा है। हमने रिकॉर्ड 59,000 किलोमीटर राजमार्गों का आवंटन किया है और 43,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बनाई हैं। 2013-14 में रोजाना निर्माण का औसत 13 किलोमीटर था, जो अब 32 किलोमीटर है। अभी बारिश का मौसम चल रहा है, लेकिन हमने हर दिन 23 किलोमीटर सड़क बनाई है। मुझे विश्वास है कि इस क्षेत्र का प्रदर्शन आने के वर्षों में भी बेहतर बना रहेगा। 
 
क्या निजी क्षेत्र से निवेश बहाली और निजी क्षेत्र की सड़क कंपनियों को बैंकों की ओर से वित्तपोषण के संकेत हैं? 
 
जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि राजमार्गों के निर्माण के लिए धन की कोई कमी नहीं है। हम भारतीय स्टेट बैंक और एलआईसी के साथ दीर्घावधि ऋण के लिए बात कर रहे हैं। संपत्तियों का मुद्रीकरण एक विकल्प है, जिस पर हम काम कर रहे हैं। सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए हाल में कुछ कदम उठाए हैं। उन फैसलोंं से बैंकों में नकदी बढ़ेगी। बैंकों के विलय से उनकी वित्तीय स्थिति दुरुस्त होगी। मुझे पूरी उम्मीद है कि प्राइवेट बिल्डरों को वित्तपोषण की सुविधा मिल सकेगी। 
 
एनएचएआई की उधारी को लेकर पीएमओ ने चिंता जताई है?
 
मैं साफ करना चाहता हूं कि पीएमओ ने एनएचआई की उधारी को लेकर चिंता नहीं जताई है। दरअसल उन्होंने कुछ सुझाव भेजे हैं, जो उन्हें मिले थे और उस पर हमारी राय मांगी है। टोल ऑपरेट ट्रांसफर (टीओटी) के मामले में हमारा अनुभव बेहतर रहा है। एनएचएआई 85,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर काम कर रहा है। पूरी हो चुकी सभी परियोजनाओं के मुद्रीकरण की योजना टीओटी और इनविट के माध्यम से बन रही है। 
 
एनएचएआई की आकस्मिक देनदारी कम करने के लिए सरकार की क्या योजना है, जो बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये हो गई है?
 
एनएचएआई नई परियोजनाओं के वैल्यू कैप्चर फाइनैंसिंग के लिए फ्लोटिंग एसपीवी का निवेश मॉडल विकसित कर रहा है। एसपीवी बनाने के लिए एनएचएआई ने राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढांचा कोष (एनआईआईएफ) के साथ समझौता किया है। इस मॉडल के लिए हम बाजार से फीडबैक लेने की प्रक्रिया में हैं। सऊदी अरब ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र मेंं 100 अरब डॉलर निवेश की पेशकश की है। सड़क मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि इस वित्तपोषण का एक हिस्सा एनएचएआई और एनआईआईएफ के एसपीवी मेंं लगाया जा सकता है। इस धन का इस्तेमाल भारतमाला एक्सप्रेसवे के विकास के लिए हो सकता है। 
 
कर्ज घटाने को लेकर सरकार की क्या योजना है? क्या आप वित्त मंत्रालय से ज्यादा बजट समर्थन मांग रहे हैं? 
 
भारतमाला परियोजना पूरी होने  के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण की जरूरत कम हो जाएगी। एनएचआई उसके बाद सड़क संपत्ति के प्रबंधन पर ज्यादा जोर देगी, जिसमें संपत्ति का मुद्रीकरण, कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट, परिचालन एवं रखरखा और क्षमता विस्तार शामिल है। 
 
बीओटी मॉडल की मौजूदा स्थिति क्या है?
 
मौजूदा बीओटी मॉडल की खामियां दूर करने के लिए सलाह की प्रक्रिया चल रही है, जिससे कि जरूरी बदलाव किया जा सके। इन परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण में देरी, उपयोग की चीजों को हटाने, पेड़ काटने, बाजार में धन की सीमित उपलब्धता  और परियोजना प्रबंधन में डेलवपरों की समस्या की वजह से देरी हो रही है। इसके अलावा परियोजना की व्यावहारिकता को लेकर भी सवाल है क्योंकि गलियारा बनने के बाद कुछ खंड संभवत: वित्तीय रूप से व्यावहारिक नहीं होंगे। लेकिन गलियारे का काम पूरा होने के बाद परिवहन की स्थिति सुधरेगी और पूरे गलियारे की व्यावहारिकता हो जाएगी। 
 
एनएचएआई में शीर्ष पद पर लगातार बदलाव हो रहे हैं। क्या आपको लगता है कि इसका प्राधिकरण के प्रदर्शन पर असर पड़ा है? 
 
मुझे ऐसा नहीं लगता। 
 
भारतमाला परियोजना की क्या स्थिति है? 
 
भारतमाला परियोजना के पहले चरण के तहत अब तक 9,613 किलोमीटर लंबी कुल 225 परियोजनाओं को अनुमोदन और मंजूरी मिल चुकी है। भरतमाला परियोजना के तहत 6,407 किलोमीटर सड़क का आवंटन हुआ है। 25,000 किलोमीटर के लिए डीपीआर तैयार किया जा रहा है। चिह्नित किए गए 191 कंजेशन प्वाइंट्स में से 13 के डिकंजेशन का काम कर लिया गया है और 80 प्वाइंट पर काम चल रहा है। इसके अलावा 93 कंजेशन प्वाइंट्स के मसलों के समाधान के लिए डीपीआर बन रही है। 
 
आर्थिक समीक्षा में नौकरियों के सृजन न होने के लिए एमएसएमई को जिम्मेदार बताया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? 
 
रोजगार देने मेंं एसएमई की अहम भूमिका होती है, जबकि इसमें बड़े उद्योगोंं की तुलना में कम लागत लगती है। यह बड़े उद्योगों के पूरक का भी काम करती हैं। राष्ट्रीय नमूना सर्वे के मुताबिक इस क्षेत्र मेंं 633.88 लाख इकाइयां हैं और उनमें 11.1 करोड़ नौकरियों का सृजन हुआ है। 
 
एमएसएमई के लिए सरकार की क्या योजना है?
 
एमएसएमई मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम प्रधानमंत्री रोजगार सृजनि कार्यक्रम (पीएमईजीपी) है, जिसके माध्यम से गावों और शहरों मेंं रोजगार का सृजन किया जाएगा। विनिर्माण क्षेत्र में ऐसी इकाइयों की अधिकतम लागत 25 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये है। 2018-19 के दौरान 73,427 इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिनमें करीब 5,87,416 लोगों को रोजगार मिला है। चालू वित्त वर्ष 2019-20 में 11,330 इकाइयों की स्थापना हुई है, जिससे 90,640 लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। खादी क्षेत्र में भी 2017-18 के 4,65,000 की तुलना में 2018-19 में रोजगार बढ़कर 4,95,000 हो गया है। ग्रामीण उद्योग क्षेत्र में भी रोजगार 2017-18 के 1.357 करोड़ की तुलना में 2018-19 में 1.420 करोड़ हो गया है।
 
वित्तीय उथल पुथल के बीच क्या एमएसएमई के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है?  
 
इस क्षेत्र के लिए वित्तपोषण के नए चैनल सृजित करने, इस क्षेत्र को निवेशकों के अनुकूल बनाए जाने, तकनीकी नवोन्मेष लाने, लॉजिस्टिक लागत घटाने, पर्याप्त कौशल और बाजार के समर्थन की जरूरत है।  इस क्षेत्र को गति देने के लिए बड़ा सोचने और नए व नवोन्मेषी विचार लाने की जरूरत है। 
Keyword: SME, MSME, jobs,,
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