बिजनेस स?टैंडर?ड - विलय योजना से आरइन्फ्रा, आरपावर को फायदा
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विलय योजना से आरइन्फ्रा, आरपावर को फायदा

अमृता पिल्लई / मुंबई September 06, 2019

रिलायंस ग्रुप की दो कंपनियां- रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर (आरइन्फ्रा) और रिलायंस पावर (आरपावर) अपने ऑडिटरों के साथ इस मुद्दे पर तालमेल बिठाती नहीं दिख रही हैं कि वे अपनी पूंजी और सामान्य भंडार के साथ किस प्रकार का व्यवहार करें। कुछ मामलों में इससे दोनों कंपनियों के लाभ एवं नुकसान खाते प्रभावित हुए हैं। पिछली चार तिमाहियों के दौरान इन दोनों कंपनियों के ऑडिटरों ने इन भंडारों से सात निकासी अथवा जमा मामलों पर ध्यान केंदित किया है। इनमें से तीन समायोजन अथवा निकासी की रकम 7,346 करोड़ रुपये की है।

 
रिलायंस ग्रुप के प्रवक्ता ने कहा, 'हमने सामान्य भंडार/पूंजी भंडार से निकासी की है जो विभिन्न अदालतों द्वारा मंजूर व्यवस्था के प्रावधानों के तहत की गई है। ऑडिटरों ने अपनी रिपोर्ट में पात्रता के लिए उन्हें उपयुक्त नहीं पाया लेकिन केवल इस तथ्य का उल्लेख किया जो लेखा मानदंडों के लिहाज से जरूरी था। हम अपनी नीति के तहत इन सब मामलों पर किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ की राय लेते हैं। खुलासे के उच्चतम मानदंडों का पालन करते हुए हम इन मामलों में काफी पारदर्शिता के साथ खुलासा करते हैं।'
 
सात में से छह मामलों में ऑडिटरों ने इशारा किया है कि जमा अथवा एकीकरण में लेखा मानदंडों को नजरअंदाज किया गया। हालांकि इसके केंद्र में विलय अथवा एकीकरण की योजनाएं हैं जो कंपनी को इस प्रकार की निकासी के लिए अनुमति देती हैं। इस प्रकार की योजनाओं को आमतौर पर अदालतों से मंजूरी मिली होती है। वित्त वर्ष 2019 के नतीजों के लिए रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के ऑडिटरों ने सामान्य भंडार से 6,616.02 करोड़ रुपये की निकासी और उसका इस्तेमाल लाभ एवं नुकसान (पीऐंडएल) खाते में अप्रत्याशित घाटे की भरपाई करने में किए जाने पर ध्यान आकर्षित किया था। ऑडिटरों ने लिखा था कि यह निकासी एकीकरण की योजना पर लागू होती है जिसके तहत कुछ प्रावधानों को नजरअंदाज किया गया है।
 
एक वरिष्ठ लेखा विशेषज्ञ ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, 'विलय एवं एकीकरण की अधिकतर योजनाएं किसी अदालत अथवा ट्रिब्यूनल से मंजूरी प्राप्त होती हैं और लेखा उपचार तभी किया जाता है जब वह प्रभावी होती है। हालांकि लेखा मानकों के अनुपालन के साथ इस प्रकार के उपचार में अंतर हो सकता है लेकिन ऑडिटरों के लिए यह जरूरी है कि वे इस पर अपनी राय दें ताकि निवेशक उसके प्रभाव का आकलन कर सकें।' वित्त वर्ष 2019 में रिलायंस पावर ने अपने सामान्य भंडार से इसी तरह की 101.70 करोड़ रुपये की निकासी की थी जिसका इस्तेमाल कंपनी के लिए प्राप्तियों के समायोजन में किया गया था। लेखा विशेषज्ञ ने कहा, 'सामान्य तौर पर इससे लाभ एवं नुकसान खाता और प्रति शेयर आय प्रभावित होती है। यदि इस प्रकार के उपचार का इस्तेमाल नुकसान की भरपाई करने में किया जाता है तो उसक प्रभाव कंपनी की शुद्ध हैसियत पर नहीं पड़ता है।'
 
आरइन्फ्रा ने भी जून 2019, मार्च 2019 और सितंबर 2018 तिमाहियों में विदेशी मुद्रा विनिमय का फायदा उठाने के लिए अपने सामान्य भंडार में तीन बार इस प्रकार की जमा कराई। कंपनी ने दिसंबर 2018 में समाप्त तिमाही के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार के नुकसान की भरपाई के लिए इस प्रकार की निकासी की थी। कंपनी के अंकेक्षकों ने लेखा मानकों को नजरअंदाज करने वाली योजनाओं के तहत इन सब मामलों पर ध्यान आकर्षित किया है। एक अन्य मामले में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने जून 2019 में समाप्त तिमाही के लिए 313.92 करोड़ रुपये का कर पूर्व मुनाफा दर्ज किया है। कंपनी के अंकेक्षकों के अनुसार, यदि कंपनी के पूंजी भंडार से भरपाई नहीं की गई होती तो यह आंकड़ा 629.35 करोड़ रुपये कम हो सकता है। लेखा फर्म बीएसआर ऐंड कंपनी और पाठक एचडी ऐंड एसोसिएट्स 9 अगस्त तक आरइन्फ्रा और आरपावर दोनों के लिए ऑडिटर थीं। बीएसआर ने 9 अगस्त को दोनों कंपनियों के लिए ऑडिटर पद से इस्तीफा दे दिया था। जबकि पाठक एचडी इन दोनों कंपनियों के लिए एकमात्र ऑडिटर बरकरार है।
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