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शिवकुमार की बहुमुखी प्रतिभा सबके लिए फायदे का सौदा

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  September 06, 2019

कांग्रेस नेता डोड्डलहल्ली केंपेगौड़ा (डीके) शिवकुमार को इस सप्ताह के आरंभ में कथित धनशोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया। कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित राज्य होने के बावजूद शिवकुमार प्रांत के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन करवाने में कामयाब रहे। रामनगर, चेन्नपट्टना और उसके आसपास के इलाके शिवकुमार के विधानसभा क्षेत्र कनकपुरा में आते हैं। इन इलाकों में बंद का आह्वान किया गया और तमाम स्कूल बंद हो गए। सरकारी बसों पर पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा पत्थर फेंके गए। जाहिर सी बात है शिवकुमार न केवल बहुत लोकप्रिय हैं, बल्कि वह इतने संसाधन संपन्न भी हैं कि अपने क्षेत्र के लोगों से ऐसा विरोध प्रदर्शन करा सकते हैं। कांग्रेस के इस रणनीतिकार में कई और गुण हैं। यहां तक कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा तक ने उनकी गिरफ्तारी पर अफसोस जाहिर किया।

 
आखिर कौन हैं डी के शिवकुमार?
 
वर्ष 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए दिए शपथपत्र में उन्होंने और उनकी पत्नी ने 730 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताया। वह कुछ भी लिख सकते थे लेकिन दक्षिण कर्नाटक में सत्ता की चाबी जमीन और जाति ही है। शिवकुमार वोक्कालिंगा समुदाय के हैं। वह उसी इलाके के एक कृषक परिवार में पैदा हुए है जहां एचडी देवेगौड़ा पैदा हुए। देवेगौड़ा को कर्नाटक में वोक्कालिंगा समुदाय का सबसे बड़ा नेता माना जाता है। स्वाभाविक था कि देवेगौड़ा उन्हें लंबे समय तक नौसिखुआ के तौर पर देखते रहे। 
 
शिवकुमार कॉलेज के दिनों से ही कांग्रेस में हैं। सबसे पहले उन्होंने युवा कांग्रेस की सदस्यता ली। सन 1983 से 1985 तक वह प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव रहे। उनकी पहली चुनावी जीत सन 1987 में हुई जब उन्होंने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता। सन 1985 में 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने एचडी देवेगौड़ा के खिलाफ साथनूर से चुनाव लड़ा। वह मामूली अंतर से चुनाव हार गए। यह भी उनके लिए एक उपलब्धि की तरह थी क्योंकि देवेगौड़ा तत्कालीन रामकृष्ण हेगड़े सरकार में वरिष्ठ मंत्री थे। देवेगौड़ा ने दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था। उन्होंने साथनूर सीट छोड़ दी। शिवकुमार वहां से दोबारा लड़े और चुनाव जीतने में कामयाब रहे। इसके बाद देवेगौड़ा परिवार के साथ उनका विवाद आरंभ हुआ जो अपना रूप बदलता रहता है लेकिन अब तक बरकरार है। 
 
शिवकुमार ने सन 1989 में कनकपुरा लोकसभा क्षेत्र से देवेगौड़ा के खिलाफ चुना लड़ा, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उस समय देवेगौड़ा शिखर पर थे। परंतु इस हार के बावजूद शिवकुमार ने बेंगलूरु के आसपास के ग्रामीण इलाकों में पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी। यही वह दौर था जब जमीन की कीमतें बढ़ रही थीं। शिवकुमार ने भी खनन और उससे जुड़े कारोबार में निवेश किया। उन्होंने सन 1989 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ा और जीत गए। दो वर्ष बाद 30 की उम्र में वह प्रदेश के सबसे युवा मंत्री बन गए। सन 1991 से 1992 तक वह एस बंगारप्पा की सरकार में राज्य मंत्री रहे। इसके बाद एसएम कृष्णा की सरकार आई। शिवकुमार ने कृष्णा के साथ अच्छे रिश्ते कायम किए। कहा जाता है कि कृष्णा के दामाद स्वर्गीय वीजी सिद्घार्थ के कैफे कॉफी डे के कारोबार में भी उनका पैसा लगा हुआ है। वह अब तक सात बार विधायक रह चुके हैं। उनकी कारोबारी गतिविधियां और उनकी राजनीतिक मेहनत ने भी उनका खूब साथ दिया है। 
 
शिवकुमार ने व्यक्तिगत संपदा के बल पर राजनीतिक पूंजी तैयार की। ये किस्से सभी जानते हैं। सन 2002 में जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता स्वर्गीय विलासराव देशमुख की सरकार अविश्वास प्रस्ताव के कारण लगभग गिरने को थी, तब कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री डी के शिवकुमार ने विधायकों को ईगलटन रिजॉर्ट में एकत्रित किया और मतदान के दिन उन्हें मुंबई ले गए। अगर वहां की दीवारें बोल सकतीं तो जाने कितने रहस्य सामने आते। अहमद पटेल गुजरात में राज्यसभा सीट इसलिए जीत सके क्योंकि शिवकुमार ने 44 विधायकों को सुरक्षित रखा। बाद में उन्होंने हैदराबाद में अपने कारोबारी रिश्तों का इस्तेमाल किया और वह विधायकों को बेंगलूरु से हैदराबाद स्थित एक रिजॉर्ट में ले गए। उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से केवल इतनी गुजारिश की कि वह विधायकों को सुरक्षित रखें। यही वजह थी कि 224 में से 104 विधायक होने के बावजूद येदियुरप्पा मुंह ताकते रह गए और राज्य में एच डी कुमारस्वामी व कांग्रेस की सरकार बनी। इस अभियान में शिवकुमार ने अमित शाह तक को पछाड़ दिया था। 
 
देवेगौड़ा का परिवार और शिवकुमार कभी मित्र नहीं रहे। वे केवल रणनीतिक सहयोगी हैं। कांग्रेस में तमाम अन्य नेताओं की तरह शिवकुमार के बारे में भी कुमारस्वामी ने यही सोचा कि वह उनके साथ कारोबार कर सकते हैं। यही कारण है कि जनता दल सेक्युलर ने भी उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर खूब शोर मचाया। सवाल यह है कि अब क्या होगा? लोग कह सकते हैं कि शिवकुमार का राजनीतिक करियर समाप्त हो गया। परंतु वह कई लोगों के लिए बहुत अधिक उपयोगी हैं। वही उनकी मूल प्रतिभा है। 
Keyword: congress DK shivkumar, ED,,
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