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'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के नए युग की शुरूआत'

एजेंसियां /  September 05, 2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और रूस हिंद-प्रशांत क्षेत्र को खुला, स्वतंत्र तथा समावेशी बनाने के लिए इस क्षेत्र में सहयोग के नए युग की शुरूआत कर रहे हैं। रूस में होने वाली पूर्वी आर्थिक मंच की पांचवी बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, 'जब व्लादिवोस्तोक और चेन्नई के बीच समुद्री मार्ग खुलने के साथ जहाज चलने शुरू हो जाएंगे, तो रूस का यह बंदरगाह शहर भारत में उत्तर पूर्व एशियाई बाजार को प्रोत्साहित करने वाला केंद्र बन जाएगा।' इस बीच भारत ने गुरुवार को घोषणा की कि रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र के विकास के लिए भारत एक अरब डॉलर की ऋण सहायता देगा। प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के सुदूर पूर्व के साथ भारत के संबंधों को बढ़ावा देने के लिए 'एक्ट फार ईस्ट' नीति की शुरुआत की। सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'यह एक विशिष्ट मामला है जहां भारत किसी दूसरे देश को इस तरह के ऋण की सुविधा दे रहा है। सुदूर पूर्व क्षेत्र के विकास के लिए भारत यह सहायता कर रहा है।' इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने 20वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया और दोनों देशों ने 15 समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
 
रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में चेन्नई तथा व्लादिवोस्तोक के बंदरगाह शहरों के बीच समुद्री संपर्क के विकास के लिए भारत और रूस ने बुधवार को एक आशय-पत्र पर दस्तखत किए थे। मोदी ने कहा, 'हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के नए युग की शुरूआत कर रहे हैं।'  उन्होंने कहा कि सुदूर पूर्व क्षेत्र मजबूत भारत-रूस संबंधों का आधार-स्तंभ बनेगा जो नियम आधारित व्यवस्था, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित है और एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के खिलाफ है। भारत, अमेरिका और दुनिया की अन्य कई महाशक्तियां क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रयासों की पृष्ठभूमि में एक खुले, स्वतंत्र और बढ़ते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र की जरूरत के बारे में बात करते रहे हैं। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। वहीं वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रूनेई और ताइवान इस क्षेत्र को लेकर अलग-अलग दावे करते हैं।
 
शिंजो आबे से मुलाकात
 
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जापानी समकक्ष शिंजो आबे से भी मुलाकात की और दोनों नेताओं ने रणनीतिक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने ओसाका में जून में जी20 शिखर सम्मेलन के बाद अपनी इस दूसरी मुलाकात में व्यापार, संस्कृति और रक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। मोदी ने ट्वीट किया, 'व्लादिवोस्तोक में प्रधानमंत्री शिंजो आबो से मुलाकात करके खुशी हुई। हमने कई विषयों पर गहराई से बातचीत की। हमने विशेष रूप से हमारे देशों के बीच व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संबंध और बेहतर करने पर वार्ता की। हम दोनों देश एक बेहतर ग्रह बनाने के लिए विभिन्न वैश्विक मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं।' 
 
विदाई में भाषाई संबंध 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि किसी को विदा करने के लिहाज से भारत और रूस के बीच भाषाई संबंध हैं। मोदी ने यहां पांचवें पूर्वी आर्थिक मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि उनके गृह राज्य गुजरात में बाइ-बाइ (अलविदा) कहने के बजाय आवजो (आप फिर जल्दी आइए) कहते हैं। और यहां रूस में लोग दसविदानिया कहते हैं। मोदी ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा, 'आवजो, दसविदानिया।' 
 
जाकिर नाइक प्रत्यर्पण पर बात 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद को जम्मू-कश्मीर पर नई दिल्ली के फैसले के पीछे की वजह बताई और विवादास्पद भारतीय इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण की मांग की। नाइक धनशोधन और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के आरोप में भारत में वांछित है। विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि मोदी ने महातिर के साथ बैठक में जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण का मामला उठाया। दोनों पक्षों ने फैसला किया है कि हमारे अधिकारी इस संबंध में संपर्क में रहेंगे और यह हमारे लिए महत्त्वपूर्ण मामला है।' नाइक टेलीविजन के माध्यम से उपदेश देने वाला एक कट्टरपंथी उपदेशक है। उसने 2019 में कथित तौर पर भारत छोड़ा और मुस्लिम बहुल देश मलेशिया चला गया था।
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