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कश्मीर: येचुरी ने उठाए सरकारी दावों पर सवाल

अर्चिस मोहन /  September 05, 2019

माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रमुख सीताराम येचुरी ने सर्वोच्च न्यायालय में दायर हलफनामे में कश्मीर में सामान्य स्थिति लौटने के सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने येचुरी को कश्मीर जाने की अनुमति दी थी। वह बीमार चल रहे अपने दोस्त और पार्टी सहयोगी मोहम्मद यूसुफ तारिगामी से मिलने के लिए 29 और 30 अगस्त को कश्मीर में थे। कश्मीर से लौटने पर येचुरी ने 2 सितंबर को एक हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने कहा कि इस दौरे के अपने अनुभव और तारिगामी के साथ बातचीत के आधार पर वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि 'अवैध हिरासत' और दूसरी पाबंदियों से तारिगामी की शारीरिक तथा मानसिक स्थिति प्रभावित हुई है। साथ ही उनके परिवार की मानसिक स्थिति पर भी इन चीजों का असर हुआ है। येचुरी ने कहा कि कश्मीर में जमीनी स्थिति सरकार के दावों से एकदम उलट है। उन्होंने साथ ही कहा कि तारिगामी परिवार के पास नकदी की कमी हो गई है क्योंकि करीब एक महीने से उन्हें अपने घर से नहीं निकलने दिया जा रहा है और किसी को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं है।

 
माकपा महासचिव ने कहा कि तारिगामी को हिरासत में लेने का कोई आदेश नहीं था। कश्मीरी नेता और उनके परिवार को अवैध तरीके से घर पर कैद किया गया है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबड़े और एसए नजीर के पीठ ने गुरुवार को येचुरी की याचिका पर सुनवाई की और तारिगामी को बिना किसी देरी से श्रीनगर से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) लाने का आदेश दिया। येचुरी ने अपनी याचिका में कहा कि तारिगामी की हिरासत को लेकर कोई आदेश नहीं दिया गया है। इस पर न्यायालय ने केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी करके एक सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगा।
 
माकपा नेता ने न्यायालय में कहा, 'हम पूर्व विधायक की हिरासत को चुनौती देने के अपने अधिकार को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में सुरक्षित रखना चाहते हैं।' सर्वोच्च न्यायालय ने येचुरी को अपने बीमार पार्टी सहयोगी से मिलने के लिए कश्मीर जाने और उनके स्वास्थ्य के बारे में एक हलफनामा दायर करने की अनुमति दी थी।  येचुरी ने अपने हलफनामे ने कहा कि वह 29 अगस्त को श्रीनगर पहुंचे और 30 अगस्त की दोपहर को वहां से निकल गए। इस दौरान स्थानीय प्रशासन ने उन्हें अपनी मर्जी के मुताबिक तारिगामी से नहीं मिलने दिया। उन्होंने कहा कि जब वह श्रीनगर के तारिगामी के घर पर थे तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मीर इम्तियाज हुसैन लगातार उनके साथ बने रहे और उन्होंने वहां से जाने से इनकार कर दिया। इम्तियाज बिना बुलाए मेहमान की तरह बैठक में बैठे रहे जबकि वहां उनकी जरूरत नहीं थी। आखिरकार येचुरी के कहने पर वह कमरे से बाहर गए।
 
जब येचुरी ने तारिगामी से पूछा कि उन्हें किन आरोपों में हिरासत में रखा गया है तो अधिकारी ने संकेत दिया कि उनके खिलाफ कोई कानूनी आरोप नहीं हैं और वह पूरी तरह आजाद हैं। तारिगामी ने कहा कि उन्हें हिरासत के बारे में कोई आदेश नहीं दिखाया गया है। प्रशासन ने सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया है उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों से घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाए। पिछले 25 दिन से वे घर से बाहर नहीं निकले हैं। 
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