बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकारी बैंकों का विलय: गलत समय में की गई अच्छी पहल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, September 17, 2019 12:23 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

सरकारी बैंकों का विलय: गलत समय में की गई अच्छी पहल

हंसिनी कार्तिक / मुंबई September 04, 2019

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का विलय इस क्षेत्र के लिए लंबे समय से अपेक्षित सकारात्मक कदम हो सकता है। लेकिन विस्तारित सप्ताहांत के बाद स्टॉक एक्सचेंज पर खरीद-फरोख्त शुरू होने पर इन बैंकों के शेयर मूल्य में इस प्रकार की धारणा नहीं दिखी। प्रमुख बैंकों यानी छोटे फ्रैंचाइजी का विलय करने वाले बैंक जैसे पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी), केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक के शेयरों में 8 से 12 फीसदी के दायरे में गिरावट दर्ज की गई। दिलचस्प है कि बैंकों के विलय को लेकर निवेशक अधिक उत्साहित नहीं दिखे।

 
बड़े बैंकों खासकर पीएनबी और यूनियन बैंक के लिए इस पहल से पूंजी पर्याप्तता संबंधी समस्याएं दूर नहीं होंगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या उनमें छोटे बैंकों को समाहित करने की क्षमता है। उदाहरण के लिए, घोटाले के शिकार पंजाब नैशनल बैंक को वृद्धि के लिहाज से वापसी करना है। साथ ही उसे परिसंपत्ति गुणवत्ता संबंधी समस्याओं से भी निपटना है। लेकिन उसे अपने 15.5 फीसदी के गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) अनुपात को एक स्वीकार्य स्तर तक घटाने में कुछ तिमाही लग सकती है।
 
यूनियन बैंक के मामले में भी लगभग यही स्थिति है। केनरा और इंडियन बैंक इस मोर्चे पर कुछ बेहतर स्थिति में दिख रहे हैं। लेकिन 7 से 8 फीसदी सकल एनपीए के साथ वे निजी बैंकों के मुकाबले अभी भी सहज स्थिति में नहीं हैं। इसके अलावा परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी बैंकों खासकर बड़े सरकारी बैंकों को वृद्धि से समझौता किए बिना अपनी रफ्तार बढ़ानी होगी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए चालू वित्त वर्ष (2019-20) को वृद्धि का वर्ष माना जा रहा है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) जैसे पिछले सुदृढीकरण के मामलों से पता चलता है कि प्रबंधन के एकीकरण की प्रक्रिया में कितना समय लगता है जिसका वृद्धि और वित्तीय स्थिति पर परवर्ती प्रभाव हो सकते हैं।
 
नोमुरा के विश्लेषकों ने कहा, 'बैंकों के विलय से निकट भविष्य में वृद्धि और लाभप्रदता पर असर दिख सकता है।' उन्होंने कहा, 'पहले के विलय मामलों में थोड़े समय के लिए बहीखाते तो दुरुस्त हो गया लेकिन इससे अन्य लागत बढ़ गई।' इसलिए विलय का लंबी अवधि में होने वाला फायदा सबको पता है लेकिन निकट भविष्य में वृद्धि के बारे में बाजार की धारणा को विश्लेषकों ने पूरी तरह सकारात्मक करार नहीं दिया है। कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि विलय से ऋण की सीमित उपलब्धता जैसी मौजूदा समस्याएं दूर नहीं हो सकतीं। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का कहना है कि पहले के मामलों पर गौर करने से पता चलता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय से वाहन क्षेत्र में नरमी एवं सर्तकता बढऩे के कारण निजी बैंकों के लिए वृद्धि की रफ्तार सुस्त पडऩे और ऋण वितरण में सुधार नहीं हो सकता। ब्रोकरेज फर्म ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए बैंक उधारी की उपलब्धता पर सतर्क रहने की ओर इशारा किया है।
Keyword: nirmala sitaraman, bank, merge,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 सऊदी अरब में उत्पादन बाधित होने से घरेलू बाजार में बढ़ेंगे तेल के दाम?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.