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पुनर्वर्गीकरण के नियमों की समीक्षा चाहते हैं म्युचुअल फंड

जश कृपलानी और समी मोडक / मुंबई September 04, 2019

करीब 6 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने वाले इक्विटी फंड मैनेजर बाजार नियामक सेबी की तरफ से दो साल पहले लागू किए गए पुर्नवर्गीकरण के नियमों की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। मैनेजरों का मानना है कि लार्जकैप, मिडकैप या स्मॉलकैप शेयरों के वर्गीकरण के तरीकों में कुछ बदलाव उन्हें निवेश में लचीला रुख अपनाने में सक्षम बनाएगा और निवेश में अनावश्यक बदलाव पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मौजूदा नियम के तहत बाजार पूंजीकरण के लिहाज से 100 अग्रणी कंपनियां लार्जकैप में हैं, अगली 150 कंपनियां मिडकैप में जबकि बाकी स्मॉलकैप के दायरे में होती हैं।

 
फंड मैनेजरों ने सेबी से संपर्क कर कहा है कि लार्जकैप व मिडकैप के दायरे को प्रतिभूतियों की विशिष्ट संख्या तक सीमित रखने के बजाय इसे कुल बाजार पूंजीकरण में कंपनी के योगदान से जोड़ा जा सकता है। एक अग्रणी फंड मैनेजर ने कहा, एक समय में हमें यह देखना चाहिए कि लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों को हम कैसे परिभाषित कर रहे हैं। कंपनियों की संख्या तय करने के बजाय आपके पास बाजार पूंजीकरण आधारित बेंचमार्क होना चाहिे। इससे बाजार को ज्यादा कंपनियों तक विस्तार करने में मदद मिलेगी क्योंकि नई फर्में रैंकिंग की व्यवस्था के बिना सूचीबद्ध होती है। उन्होंने कहा कि इस मसले पर हमने सेबी से चर्चा की है।
 
अक्टूबर 2017 में म्युचुअल फंड योजनाओं के लिए लेबल सुनिश्चित करने के इरादे से सेबी ने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के दायरे को पारिभाषित करने के लिए कुछ निश्चित नियम बनाने का फैसला लिया, जहां म्युचुअल फंड निवेश कर सके। शेयर कीमत में बदलाव के आधार पर उद्योग निकाय एम्फी जुलाई और जनवरी में शेयरों की रैंकिंग तय करता है। फंड मैनेजरों को अपना पोर्टफोलियो दुरुस्त करने के लिए तब 30 दिन का समय दिया गया। एक फंड मैनेजर ने कहा, यह कदम फंडों का प्रबंधन मुश्किल बना रहा है, खास तौर से मिडकैप के क्षेत्र में। व्यापक बाजार में गिरावट के चलते कई मिडकैप शेयरों में नरमी आई है और नई सूची में ये अब मिडकैप श्रेणी में नहीं हैं। ऐसे में आपको ये शेयर बेचने होंगे, जबकि फंडामेंटल के लिहाज से ये अच्छे हैं। यह लागत पर भी असर डालता है जब बाजार कमजोर हो।
 
उद्योग के आंतरिक सूत्रों का भी मानना है कि 150 मिडकैप शेयरों के दायरे में चयन पर पाबंदी लगाना सही नहीं है। एक अन्य फंड मैनेजर ने कहा, मिडकैप योजनाओं का कम से कम 65 फीसदी निवेश मिडकैप शेयरोंं में होना चाहिए। नए नियमों में ऐसे शेयरों की संख्या 150 तक सीमित है, जो मिडकैप क्षेत्र के शेयर चुनने के लिहाज से काफी छोटा दायरा है। फंड मैनेजरों के मुताबिक, बेहतर विकल्प बाजार पूंजीकरण के आधार पर 100 अग्रणी लार्जकैप शेयरों की सीमा को पारिभाषित करना होगा  और फंड मैनेजरों के पास इस सीमा से बाहर शेयरों के चयन की खातिर स्वविवेक का अधिकार होना चाहिए। सेबी उन कंपनियों को लार्जकैप का तमगा लगा सकेगा, जो बाजार पूंजीकरण का 80 फीसदी हो।
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