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खनन क्षेत्र में जा सकती हैं 2,60,000 नौकरियां

जयजित दास / मुंबई September 03, 2019

अगले साल मार्च तक व्यावसायिक खदानों के पट्टे की अवधि पूर्ण होने की वजह से 2,60,000 लोगों की नौकरियां जाने का खतरा हो गया है, जो इस क्षेत्र से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत 40 साल से ज्यादा समय के सबसे बड़े रोजगार संकट से गुजर रहा है। राष्ट्रीय नमूना सर्वे संगठन (एनएसएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी दर 2011-12 के 2.2 प्रतिशत से बढ़कर 2017-18 में 6.1 प्रतिशत रह गई है और कार्यबल घटकर 3.7 करोड़ रह गया है। इस दौरान श्रम बल हिस्सेदारी दर 55.9 प्रतिशत से गिरकर 49.8 प्रतिशत पर आ गई है। 
 
फेडरेशन आफ इंडियन मिनरल इंटस्ट्रीज (फिमी) के मुताबिक 329 खनन पट्टोंं की अवधि 31 मार्च को खत्म होने वाली है, जिसकी वजह से 2,64,000 नौकरियां जा सकती हैं। पट्टे की अवधि पूरा होने वाली खदानोंं की सूची में 48 खदाने चल रही हैं, जिनके बंद होने से 6 करोड़ टन कच्चे माल की आपूर्ति ठप हो जाएगी, जिसमें लौह अयस्क प्रमुख है। खनन को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद ओडिशा, झारखंड, गोवा और कर्नाटक में 2,00,000 लोगोंं की जीविका छिन चुकी है, जो सीधे तौर पर खनन के काम में लगे थे। इस आदेश से प्रत्यक्ष नौकरियों से जुड़े 10 गुना परोक्ष रूप से आजीविका प्रभावित हुई है। अदालत के आदेश के बाद गोवा में खनन बंद है, वहीं कर्नाटक, ओडिशा और झारखंड में भी काम सुस्त हो गया है।  
 
फिमी के महासचिव आरके शर्मा ने कहा, 'देश में रोजगार के मौजूदा संकट को देखते हुए यह माना जा रहा है कि रोजगार केंद्रित वृद्धि से ही भारत जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा उठा सकता है और वृद्धि हासिल कर सकता है। अगर प्रभावी तरीके से इसका प्रबंधन किया जाए तो इस क्षेत्र में जीडीपी में 1 प्रतिशत बढ़ोतरी पर खनन क्षेत्र मेंं कृषि क्षेत्र की तुलना मेंं 13 गुना और विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में 6 गुना ज्यादा रोजगार दिया जा सकता है। इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की क्षमता बहुत ज्यादा है।' 
 
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को छोड़कर भारत के खनन क्षेत्र में 2012 में प्रत्यक्ष रूप से 23.2 लाख लोगों को रोजगार मिला था और इससे 2.3 करोड़ लोगोंं की आजीविका चलती है। फिमी ने अनुमान लगाया है कि अगर सरकार सकारात्मक हस्तक्षेप करे तो खनन क्षेत्र में 2025 तक 5 करोड़ लोगों को रोजगार मिल सकता है। खनन उद्योग के एक सूत्र ने कहा, 'एकतरफा राजनीति और नीतियोंं को खराब तरीके से लागू किए जाने के कारण भारत के खनन उद्योग में दुव्र्यवस्था की स्थिति है। पिछले दशक में न्यायिक हस्तक्षेप के कारण तमाम खदानें बंद हो गईं या निरस्त हो गईं।' निर्माण,वित्त और रियल एस्टेट के बाद रोजगार देने में खनन का स्थान आता है। 
Keyword: mining, lease, jobs, NSSO,,
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