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समाधान में संपत्ति पुनर्गठन फर्मों की भूमिका होगी अहम

अभिजित लेले / मुंबई September 03, 2019

भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में सकल गैर-निष्पादित आस्तियां एक साल पहले के 9.4 लाख करोड़ रुपये से घटकर मार्च 2020 में 9.1 लाख करोड़ रुपये रह सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि दबाव वाली परिसंपत्तियों के समाधान में हो रही बढ़ोतरी और संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों की बढ़ती भूमिका से ऐसा मुमकिन है। कर्ज में फंसी बड़ी कंपनियों पर कुल कर्ज 5.4 लाख करोड़ रुपये है, जो खुद ही निवेशकों के लिए बड़ा दायरा है। इनमें से नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यू नल की पहली व दूसरी सूची से 2.1 लाख करोड़ रुपये जुड़े हुए हैं और मौजूदा एनपीए बाकी 2 लाख करोड़ रुपये की भागीदारी करता है।
 
इसके बाद 1.3 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्ति दबाव में रहने का अनुमान है, लेकिन अभी तक एनपीए के रूप में इसकी पहचान नहीं हुई है। अल्पावधि से मध्यम अवधि में ये एनपीए में तब्दील हो सकते हैं। एसोचैम के साथ संयुक्त अध्ययन में रेटिंग एजेंसी ने ये बातें कही है। बिजली, बुनियादी ढांचा और स्टील कुल मिलाकर 4.1 लाख करोड़ रुपये की दबाव वाली परिसंपत्तियों में करीब आधे की भागीदारी करते हैं। बिजली क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है और इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा समाधान नहीं हुआ है।
 
क्रिसिल ने कहा, दबाव वाली परिसंपत्तियों का संशोधित ढांचा दबाव वाले बिजली क्षेत्र को फायदा पहुंचा सकता है, जो परिचालन में हैं और आईबीसी के तहत दिवालिया प्रक्रिया के दायरे में आने के कगार पर हैं। एजेंसी ने कहा कि इससे अनुमानित तौर पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये (31 मार्च 2019) जुड़े हुए हैं। हाल के वर्षों में नियामकीय बदलाव इससे संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) को जोडऩ के लक्ष्य के साथ हुए हैं। साथ ही दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए निवेशकों के संभावित आधार को विशाखित करने का भी लक्ष्य है।
 
एआरसी में देसी व विदेशी निवेश और सिक्योरिटी रिसीट्स के नियम नरम किए जाने और एआरसी का कारोबारी मॉडल गहन पूंजी वाला बनने से आने वाले समय में एआरसी के लिए साझेदारी मॉडल अहम होगा क्योंकि इन्हें ज्यादा पूंजी की दरकार होगी। ये चीजें कई जरिये से हो सकती हैं, जो एआरसी व एसआर में निवेश से लेकर दबाव वाली परिसंपत्तियों में सीधा निवेश हो सकता है। चूंकि ज्यादा नकदी नियम बन रहा है, लिहाजा एआरसी को समाधान पर ध्यान केंद्रित करना होगा और सह-निवेशकों को आकर्षित करना होगा। आने वाले समय में नकदी सौदे का अनुपात बढऩे से ज्यादा छूट मिल सकती है। नए अधिग्रहण के लिए राह बनाने और नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एआरसी को तेजी से समाधान करना होगा और एसआर को रिडीम करना होगा।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA,,
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