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चिदंबरम को अदालत से थोड़ी राहत

आशिष आर्यन और एजेंसियां /  September 02, 2019

कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सोमवार को उच्चतम न्यायालय से आंशिक राहत मिल गई। शीर्ष अदालत ने कहा कि उन्हें भ्रष्टाचार से जुड़े आईएनएक्स मीडिया मामले में अभी तिहाड़ जेल नहीं भेजा जाएगा। इससे पहले चिदंबरम ने अदालत से गुहार लगाई थी कि भले ही उन्हें नजरबंद कर दिया जाए, लेकिन जेल नहीं भेजा जाए।  उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को शुरुआत में चिदंबरम की सीबीआई गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें गुरुवार तक संरक्षण दिया था। न्यायमूर्ति आर भानुमति और एस एस बोपन्ना के दो सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश में सीबीआई अदालत को निर्देश दिया था कि वह पूर्व वित्त मंत्री की अंतरिम जमानत याचिका पर सोमवार को विचार करे। हालांकि शीर्ष अदालत ने यह शर्त भी जोड़ी कि अगर निचली अदालत उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज करने का फैसला लेती है तो चिदंबरम को न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जाएगा। इसके बजाय वह गुरुवार तक सीबीआई की हिरासत में बने रहेंगे और शीर्ष अदालत मामले की गुरुवार को सुनवाई करेगी। 

 
उच्चतम न्यायालय के दो सदस्यीय पीठ ने कहा, 'संबंधित न्यायालय अंतरिम जमानत की याचिका या याची की पुलिस हिरासत में बढ़ोतरी पर विचार करेगा और आज ही आदेश देगा। अगर अंतरिम जमानत या पुलिस हिरासत में बढ़ोतरी की याचिका खारिज कर दी जाती है तो संबंधित अदालत इस याचिका के लंबित होने की बात को ध्यान में रखते हुए याची की पुलिस हिरासत तीन दिन के लिए बढ़ाएगी।' हालांकि शीर्ष अदालत के आदेश के कुछ घंटों बाद ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिन के करीब तीन बजे मामले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दिन की शुरुआत में पारित किए गए आदेश को लागू करने में 'क्षेत्राधिकार से संबंधित दिक्कत' आएगी। उनका पक्ष सुनने के बाद न्यायमूर्ति आर भानुमति और ए एस बोपन्ना ने अपने फैसले को बदला और गुरुवार के बजाय मंगलवार को मामले की सुनवाई करने करने का आदेश दिया। चिदंबरम ने शीर्ष अदालत में निचली अदालत द्वारा उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और रिमांड के आदेश को चुनौती दी थी। 
 
मेहता ने शीर्ष अदालत में कहा था कि उनके आकलन के मुताबिक चिदंबरम की 15 दिन की हिरासत अवधि मंगलवार या बुधवार को खत्म हो जाएगी, इसलिए सीबआई उन्हें तीन दिन और हिरासत में नहीं रख सकती। मेहता के पक्ष का संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा, 'सीबीआई निचली अदालत में जाकर हिरासत को कल तक बढ़वा सकती है।' भोजनावकाश से पहले मामले की सुनवाई के दौरान चिदंबरम की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चिदंबरम के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चिदंबरम पहले ही 12 दिन से सीबीआई की हिरासत में हैं। 
 
पीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह निचली अदालत द्वारा चिदंबरम के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने और बाद में उन्हें जांच ब्यूरो की हिरासत में देने के आदेश को चुनौती देने के मामले में अपना जवाब दाखिल करे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की सीबीआई हिरासत की अवधि आज खत्म हो रही है और उन्हें दिन में संबंधित निचली अदालत में पेश किया जाएगा। सिब्बल ने कहा, 'मुझे (चिदंबरम) अंतरिम जमानत दी जाए या फिर घर में गिरफ्तार करके रखा जाए। उन्हें तिहाड़ जेल नहीं भेजा जाए। वह 74 साल के वृद्ध व्यक्ति हैं और पिछले 12 दिन से सीबीआई की हिरासत में हैं। ' इस पर पीठ ने सवाल किया, क्या उन्होंने (चिदंबरम) नियमित जमानत का अनुरोध किया है? इस पर सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम सीबीआई की हिरासत में हैं और उन्होंने अभी तक नियमित जमानत के लिए आवेदन नहीं किया है। 
 
सिब्बल ने कहा, 'उन्होंने (सीबीआई) मेरे (चिदंबरम) निवास पर रात के 12 बजे एक नोटिस चस्पा किया और मुझे दो घंटे के भीतर पेश होने के लिए कहा। इस नोटिस के सहारे ही उन्होंने गैर जमानती वारंट हासिल किया।' न्यायालय से इस तथ्य को छिपाया गया कि नोटिस के बाद सवेरे 1.10 पर हमने ईमेल के जरिये जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि हिरासत में देने का निचली अदालत का आदेश शीर्ष अदालत निरस्त कर सकती है। सिब्बल ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा चिदंबरम की याचिका का निबटारा होने तक उन्हें अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए या फिर उन्हें गिरफ्तार करके घर में ही रखना चाहिए।
 
पीठ ने सिब्बल से कहा कि एक सक्षम अदालत इस मामले को देख रही है और चिदंबरम को हिरासत के आदेश को चुनौती देने का अधिकार है। पीठ ने कहा कि हम क्यों नियमित अदालत और उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को लांघें। इस पर सिब्बल ने कहा कि वह इसके लिए न्यायालय को संतुष्ट करेंगे। उन्होंने कहा कि यह हतप्रभ करने वाला है कि सीबीआई ने इस व्यक्ति (चिदंबरम) के साथ यह सब किया है।
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