बिजनेस स्टैंडर्ड - सब्जियां ताजी रखने में सौर ऊर्जा का उपयोग
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सब्जियां ताजी रखने में सौर ऊर्जा का उपयोग

स्नेहा भट्टाचार्य /  September 02, 2019

बचपन में जब वैभव तिड़के सब्जी बेचने वालों के पास जाते थे तो उन्हें गुमान भी नहीं था कि रोज के ये फेरे उनके दिमाग में नई तकनीकी पहल के बीज बो रहे हैं, जो बाद में स्टार्टअप में बदल जाएंगे और किसानों विशेषकर महिला किसानों की जिंदगी बदल देंगे। 2008 में जब वह मुंबई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी में अंतिम वर्ष के छात्र थे तो उनके दिमाग में एक ऐसी तकनीक शुरू करने का खयाल आया, जो किसानों और महिला किसानों की मदद कर सकता था। तिड़के ने अपने साथियों के साथ मिलकर 2014 में सोसायटी4सोसायटी (एस4एस) टेक्नोलॉजीज की नींव रखी। मगर उन्होंने किया क्या? उन्होंने सौर ऊर्जा से चलने वाला ड्रायर बनाया, जो प्रिजर्वेटिव या कृत्रिम रसायनों के बगैर ही कृषि उत्पादों के भंडारण में मदद करता है। 

 
किसान परिवार से आने वाले तिड़के जब हाट बाजार में शाम को खराब हुई सब्जियां बिखरी देखते थे तो उन्हें बहुत बुरा लगता था। वह कहते हैं, 'मेरे घर के पास साप्ताहिक बाजार लगता था। मैं देखता था कि अक्सर शाम के समय किसान सब्जियां सस्ती बेच देते हैं या उन्हें बरबाद होने देते हैं।' इसे देखकर तिड़के को किसानों की समस्या का पता चला और अपने इंजीनियरिंग ज्ञान की बदौलत उन्होंने इससे छुटकारा दिलाने का फैसला किया। सौर ऊर्जा से चलने वाले ड्रायर से किसानों को टिकाऊ समाधान मिल गया है। तिड़के कहते हैं, 'ड्रायर में खाद्य सुखाने की पेटेंट की हुई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे रसायन का उपयोग किए बगैर उत्पाद को लंबे समय तक ताजा रखा जा सकता है।' इसकी मदद से सब्जी और फलों के साथ ही मांस, समुद्री खाद्य और मसालों को भी सहेजा जाता है। यह ड्रायर दूसरे ड्रायर और रेफ्रिजरेशन उपकरणों के मुकाबले कम ऊर्जा खाता है, जिससे कार्बन का उत्सर्जन भी कम होता है। वह कहते हैं, 'सब्जियों को कहीं दूर ले जाने के लिए या सेहतमंद डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।'
 
एस4एस महिला किसानों या कृषि उद्यमियों को चुनती किस तरह है? एक स्थानीय एनजीओ उनके लिए यह काम करता है। एस4एस 80,000 रुपये प्रति यूनिट की लागत से सोलर डिहाइड्रेशन इकाई स्थापित करती है और कृषि उद्यमियों को प्रशिक्षण देती है। कंपनी किसानों से सब्जियां खरीदती है और बाजार कीमत या ठेके के मुताबिक तय कीमतों पर किसानों को भुगतान करती है। इसके बाद कंपनी सब्जियों को कृषि उद्यमियों के पास पहुंचा देती है। कृषि उद्यमी डीहाइड्रेशन प्रक्रिया को पूरा करते हैं और एस4एस उन्हें प्रसंस्करण शुल्क का भुगतान करती है। एस4एस तैयार उत्पाद इक_े कर ओडिशा के अपने गोदाम में भेज देती है। वहां एक बार फिर इनका प्रसंस्करण होता है और पैकिंग के बाद उन्हें ग्राहकों को बेच दिया जाता है। 
 
महाराष्ट्र में कंपनी सूखे फल और सब्जियां तैयार करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग कर रही है। उन्होंने गांवों में महिला उद्यमियों की पहचान की है। ये महिलाएं 15-20 छोटे उद्यमियों के साथ मिलकर समूह में काम करती हैं, जिन्हें कंपनी द्वारा ड्रायर उपलब्ध कराए जाते हैं। बाजार की मांग के हिसाब से ये लघु उद्यमी अदरक, लहसुन, गाजर और चुकंदर आदि को सुखाकर तैयार करते हैं। फिर वे उत्पाद को वापस कंपनी को भेज देते हैं, जो सामान बेच देती है। एस4एस अपने रेडी-टू-ईट ब्रांड देसीविदेशी के तहत खुदरा ग्राहकों को भी कुछ उत्पाद मुहैया कराती है। तिड़के कहते हैं, 'फिलहाल हम एमेजॉन की तरह अपने मंच से ऑनलाइन बिक्री कर रहे हैं और छोटी किराना दुकानों से लेकर बड़े विक्रेताओं के साथ काम कर रहे हैं। अभी तक हमने 2,000 बिक्री स्थल तैयार किए हैं जिसमें से अधिकांश नवी मुंबई में हैं।' 
 
छोटे उद्यमियों के लिए कारोबारी मॉडल एकदम सीधा है। उन्हें मामूली शुल्क देना पड़ता है ताकि पता चले कि वे इस काम को लेकर गंभीर हैं। उन्हें खरीदे बगैर ही सौर ड्रायर अपने घर पर लगाने को मिल जाता है। वे खुद सब्जियां उगा सकते हैं या महिला किसानों से खरीदकर सुखा सकते हैं। एस4एस कंपनी भी इसमें मदद करती है। जब वे कंपनी को उत्पाद देते हैं तो उन्हें लागत के साथ ही मूल्यवद्र्धन शुल्क भी दिया जाता है। औरंगाबाद जिले में एस4एस के लगभग 200 लघु उद्यमी और और 13 एग्रीगेटर हैं जो 1,000 किसानों के साथ काम करते हैं। अलग-अलग गतिविधियों से ये लघु उद्यमी 3,000-4,000 रुपये महीने अलग से कमा भी लेते हैं। तिड़के कहते हैं, 'रखरखाव के नाम पर ट्रे को गीले कपड़े से पोछना भर होता है। हमारी स्थानीय टीम हफ्ते में एक बार दौरा कर देखती है कि रखरखाव ठीक से हो रहा है या नहीं। अगर कहीं सामान की कमी है तो टीम उसे दूसरे गांव से लेकर पूरा करती है।' कंपनी अब तक 2,500 स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले ड्रायर लगा चुकी है और फ्रांस, जमैका, नेपाल, वियतनाम, श्रीलंका, केन्या और बांग्लादेश में भी इनका उपयोग हो रहा है। कंपनी को सोलर डिहाइड्रेशन तकनीक के पेटेंट पर संयुक्त राष्ट्र से पुरस्कार भी मिल चुका है। कंपनी का लक्ष्य है कि अगले 3-5 वर्षों में वह 10 लाख किसानों के साथ काम करे।
Keyword: power, electric, solar,,
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