बिजनेस स्टैंडर्ड - छत पर सौर ऊर्जा बनाने में चुस्ती दिखाता भारत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, September 15, 2019 11:49 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

छत पर सौर ऊर्जा बनाने में चुस्ती दिखाता भारत

ज्योति मुकुल /  September 02, 2019

देश के सौर ऊर्जा क्षेत्र में एक साथ दो मोर्चों पर क्षमता विस्तार का काम हो रहा है। लेकिन न तो दोनों की गति आपस में मेल खाती है और न ही उनसे सरकार के के अक्षय ऊर्जा लक्ष्य का पूर्वानुमान मिलता है। इनमें जमीन पर स्थापित सौर ऊर्जा की परंपरागत परियोजनाएं हैं, जिनकी पूरी बिजली ग्रिड को जाती है। दूसरी परियोजनाएं छतों पर सौर ऊर्जा के उत्पादन (रूफटॉप सोलर) से जुड़ी है जो अलग भी हो सकती हैं और ग्रिड से जुड़ी भी हो सकती हैं। भारत ने 2022 तक 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा की उत्पादन क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 40 गीगावॉट छतों पर स्थापित सौर ऊर्जा इकाइयों से पैदा होगी। पिछले एक साल के दौरान छतों पर सौर पैनल में रिकॉर्ड विस्तार हुआ है, जबकि जमीन पर सौर पैनल लगाने की बड़ी योजनाओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें राज्यों के बिजली बोर्डों से खरीद के समझौते रद्द होना, भूमि अधिग्रहण, भुगतान से संबंधित समस्याएं और पैनल आयात में सुरक्षा शुल्क बढऩा शामिल हैं।

 
31 मई, 2019 तक भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 29.4 गीगावॉट थी जबकि कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 79 गीगावॉट थी। अक्षय ऊर्जा से संबंधित सलाहकार कंपनी ब्रिज टु इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2019 में रिकॉर्ड 1,836 मेगावॉट (1000 मेगावॉट एक गीगावॉट के बराबर होता है) रूफटॉप सोलर क्षमता का विस्तार किया और उसकी कुल क्षमता 4,375 मेगावॉट पहुंच चुकी है। यह सौर ऊर्जा उत्पादन का महज 15 फीसदी है लेकिन ब्रिज टु इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक रूफटॉप सोलर तेजी से बढ़ रहा है और पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इसमें 61 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रूफटॉप सोलर से सबसे अधिक बिजली पैदा करने वाले राज्यों में महाराष्ट्र (618 मेगावॉट), राजस्थान (393 मेगावॉट), तमिलनाडु (365 मेगावॉट), गुजरात (314 मेगावॉट) और कर्नाटक (298 मेगावॉट) अग्रणी हैं।
 
रूफटॉप सोलर में सौर ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यूटिलिटी स्केल ग्रिड से जुड़ी सौर ऊर्जा क्षमता में हालात एकदम उलट हैं। ब्रिज टु इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2019 में इसमें 4,810 मेगावॉट का क्षमता विस्तार हुआ जो पिछले साल की तुलना में 47 फीसदी कम था। 31 मार्च, 2019 तक 17,887 मेगावॉट क्षमता की यूटिलिटी स्केल सोलर परियोजनाएं क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में थीं। इसमें कोई दोराय नहीं है कि रूफटॉप सोलर क्षमता में वृद्घि की रफ्तार इतनी अधिक इसलिए भी है क्योंकि पहले यह क्षमता बहुत कम थी। सरकार, कंपनियां तथा कुछ संस्थाएं कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए रूफटॉप सोलर पर जोर दे रही हैं। स्वच्छ ऊर्जा के लिए काम करने वाले फंड एनर्जी इकनॉमिक्स ऐंड फाइनैंशियल एनालिसिस (आईईईएफए) के मुताबिक मार्च 2019 तक भारत में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 28 गीगावॉट थी यानी तीन साल से भी कम अरसे में इसमें चार गुना इजाफा हो चुका है। लेकिन इसमें रूफटॉप सोलर की हिस्सेदारी केवल 14 फीसदी है और दिसंबर 2018 तक यह 3,855 मेगावॉट थी। सरकार ने इसका हिस्सा 40 फीसदी करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह इससे काफी दूर है। मध्य प्रदेश के हाल के अनुभवों से इसकी कुछ चुनौतियों का पता चलता है। 
 
750 मेगावॉट क्षमता का अल्ट्रा मेगा रीवा सोलर पार्क लेने के बाद मध्य प्रदेश ने पिछले साल सोलर रूफटॉप कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके तहत सरकारी इमारतों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों में सोलर रूफटॉप लगाने के ठेके रेस्को (अक्षय ऊर्जा आपूर्ति कंपनी) मॉडल के तहत दिए गए। इसमें उपभोक्ता न तो कोई निवेश करता है और न ही प्रणाली या उपकरणों पर उसका मालिकाना हक होता है। रूफटॉप संयंत्र की स्थापना और संचालन रेस्को डेवलपर करता है। मध्य प्रदेश सरकार में प्रमुख सचिव (अक्षय ऊर्जा) मनु श्रीवास्तव ने कहा कि रूफटॉप मॉडल का चुनाव करने के पीछे यह वजह थी कि मूल्य बहुत कम था। 
 
अक्टूबर 2018 में 8.6 मेगावॉट सोलर रूफटॉप नीलामी में प्रति किलोवॉट के लिए 1.38 रुपये से 2.17 रुपये की बोली लगी थी। यह पहले मिले मूल्य से भी कम थी। 2012 में केंद्रीय बिजली नियामक आयोग के एक दिशानिर्देश के मुताबिक एक मेगावॉट क्षमता का संयंत्र बनाने पर 8 करोड़ रुपये की लागत आती है, जबकि 2010-11 में यह राशि 16.9 करोड़ रुपये थी। इसके मुताबिक प्रति किलोवॉट बिजली की कीमत 7-8 रुपये बैठती है। 2016-17 में एक मेगावॉट की अनुमानित लागत को फिर बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दिया। अप्रैल, 2019 में सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ने रूफटॉप सोलर ऊर्जा की मूल्य सीमा 2.5 रुपये से 3.5 रुपये प्रति किलोवॉट निर्धारित कर दी। लेकिन श्रीवास्तव का कहना है कि रूफटॉप सोलर परियोजनाओं के लिए ज्यादा नियामकीय चुनौतियां हैं क्योंकि डेवलपर वितरण कंपनी के कारोबार का एक हिस्सा ले जाता है और कंपनी को नुकसान होता है। कुछ मामलों में इमारतों का बिजली बिल एक तिहाई तक घट जाएगा। लेकिन ग्राहकों द्वारा रूफटॉप बिजली उत्पादन की तुक तभी है, जब बिजली वितरण कंपनियों के पास बिजली की किल्लत हो।'
 
श्रीवास्तव और उनकी टीम को 750 मेगावॉट की रीवा परियोजना के लिए भी उतनी ही मेहनत करनी होगी, जितनी 75 मेगावॉट रूफटॉप बिजली उत्पादन के लिए। उन्होंने कहा, 'हर इमारत चुनौती है। इसके लिए आपको कई संस्थाओं से अनुमति लेनी पड़ती है। लेकिन हमने रीवा से कुछ नई चीजें सीखकर अपनी निविदाओं को ज्यादा आकर्षक बनाया।' उदाहरण के लिए अगर किसी परिसर में एक से अधिक इमारत है तो वहां परियोजना को आंशिक रूप से शुरू करने की अवरधारणा आई। रीवा सोलर पार्क में शुरू की गई भुगतान सुरक्षा व्यवस्था को रूफटॉप परियोजना में भी लागू किया गया। इसके अलावा ठेकों के नियमों में बदलाव के अधिकार जैसे प्रावधान भी थे। तो क्या सोलर रूफटॉप उत्पादन का 2022 का लक्ष्य हासिल हो पाएगा? आईईईएफए की रिपोर्ट के मुताबिक रूफटॉप सेक्टर में उल्लेखनीय निवेश हुआ है और काफी प्रगति हुई है। 
 
सकारात्मक नियामकीय ढांचा तैयार करने, छोटे पैमाने पर लोगों को कुशल बनाने, इस नई प्रौद्योगिकी के बारे में बाजार को शिक्षित करने के लिए यह जरूरी है। अनुमानों के मुताबिक अगले तीन साल में रूफटॉप सोलर की स्थापित क्षमता 50 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि से बढ़ेगी और 2021-22 तक यह 13 गीगावॉट तक पहुंच जाएगी, लेकिन यह 40 गीगावॉट के लक्ष्य से बहुत दूर है। मगर श्रीवास्तव का कहना है कि भारत को जमीन और छतों पर सौर ऊर्जा की बड़ी परियोजनाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'यह इनमें से किसी एक का सवाल नहीं है। साथ ही 60:40 का अनुपात काम नहीं करेगा। यह 85:15 होना चाहिए।' हालांकि दिल्ली, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों ने भी अब सोलर रूफटॉप कार्यक्रम शुरू कर दिया है लेकिन इसमें किसी भी कमी से 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा का लक्ष्य बुरी तरह प्रभावित होगा। खासकर ऐसे समय में जब यूटिलिटी स्केल क्षमता विस्तार की रफ्तार सुस्त पडऩे लगी है।
Keyword: power, electric, solar,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या 5जी परीक्षण में चीन की कंपनियों से परहेज करना है सही कदम?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.