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आर्थिक मंदी से बिगड़ेगी बैंकों की सेहत

श्रीपाद ऑटे / मुंबई September 02, 2019

जून 2019 की तिमाही के लिए 5 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्घि 25 तिमाहियों में सबसे कम है। इससे आर्थिक गतिविधियों में और कमजोरी आने का संकेत मिला है। आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी से भारतीय बैंकों के लिए आय परिदृश्य प्रभावित हुआ है। इस मंदी से परिसंपत्ति गुणवत्ता दबाव विश्लेषकों के पिछले अनुमान की तुलना में ज्यादा बढऩे की आशंका है। दरअसल, मार्च 2018 और जून 2019 की तिमाहियों में बैलेंस शीट को दुरुस्त बनाए जाने के बाद मुख्य रूप से कॉरपोरेट ऋणदाताओं की परिसंपत्ति गुणवत्ता में बड़ा सुधार आने की उम्मीद जताई गई थी और इसके परिणामस्वरूप ऋण लागत और आय में सुधार की संभावना थी। लेकिन अब सुधार की रफ्तार कमजोर पडऩे की आशंका है। 
 
मॉर्गन स्टैनली ने वित्त वर्ष 2020 के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और ऐक्सिस बैंक के लिए अपने आय अनुमानों में हाल में 30 प्रतिशत और 8 प्रतिशत तक और वित्त वर्ष 2021 के लिए 17 प्रतिशत और 10 प्रतिशत तक की कमी की है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने इन ऋणदाताओं के लिए अपने वित्त वर्ष 2020 के ऋण अनुमानों (औसत ऋण बुक के प्रतिशत के तौर पर प्रावधान) को संशोधित कर 45-50 आधार अंक तक घटा दिया है। आर्थिक मंदी के बीच अतिरिक्त फंसे कर्ज और नए कॉरपोरेट एनपीए की वजह से इन बैंकों के लिए ऋण अनुमानों में यह कटौती की गई है।
 
ध्यान देने की बात यह है कि संभावित परिसंपत्ति गुणवत्ता दबाव सिर्फ कॉरपोरेट सेगमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ बैंकों के रिटेल बहीखाते भी आर्थिक मंदी से प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। ऐम्बिट कैपिटल के अनुसार, ताजा कॉरपोरेट एनपीए के अलावा आर्थिक मंदी से असुरक्षित रिटेल ऋण, कृषि और सूक्ष्म वित्त ऋण, वाणिज्यिक रियल एस्टेट और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से संबंधित ऋध भी प्रभावित होंगे, क्योंकि इन क्षेत्रों में रेटिंग में कमी का जोखिम है। इससे अल्पावधि में बैंकिंग क्षेत्र के दबावग्रस्त ऋण बहीखाते पर प्रभाव पडऩे की आशंका है। 
 
दरअसल, पहली तिमाही में भी कॉरपोरेट एनपीए के अलवा, कुछ बैंकों ने गैर-कॉरपोरेट बहीखाते, खासकर कृषि, खुदरा और एसएमई सेगमेंट में दबाव बढऩे का संकेत दिया था। उदाहरण के लिए, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने पहली तिमाही में अपने व्यक्तिगत ऋणों (क्रेडिट कार्ड और कुछ अन्य रिटेल सेगमेंट समेत) में एनपीए में वृद्घि दर्ज की। हालांकि रिटेल सेगमेंट में एनपीए की समस्या ज्यादा गंभीर नहीं है और विश्लेषक भविष्य में कुछ वसूली की भी उम्मीद कर रहे हैं। इसके अलावा अगले दो वर्षों में कुल ऋण लागत भी पूर्ववर्ती वर्षों की तुलना में बेहतर रहने की संभावना है।  कुल मिलाकर, निष्कर्ष यह है कि बैंकों पर दांव लगाने की संभावना तलाश रहे निवेशकों को चयन पर जोर देने की जरूरत होगी। 
Keyword: GDP, bank, SBI, axsis,,
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