बिजनेस स्टैंडर्ड - डेटा सेंटर पर दिग्गजों में जबरदस्त होड़
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डेटा सेंटर पर दिग्गजों में जबरदस्त होड़

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली 09 02, 2019

सबसे बड़ा थर्ड पार्टी डेटा सेंटर खोलने की तैयारी

बिजनेस स्टैंडर्ड डेटा सेंटर पर दिग्गजों में जबरदस्त होड़रियल एस्टेट क्षेत्र के दिग्गज हीरानंदानी समूह द्वारा नियंत्रित कंपनी योटा इन्फ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस इसी साल दिसंबर में देश का सबसे बड़ा थर्ड पार्टी डेटा सेंटर खोलने की तैयारी में है। यह सेंटर नवी मुंबई में होगा। योटा के मैनेजिंग पार्टनर और मुख्य कार्याधिकारी सुनील गुप्ता ने कहा, 'इसमें 7,000 रैक की जगह होगी। नवी मुंबई में बनने वाले इस डेटा सेंटर में 1,100 करोड़ रुपये का निवेश होगा और यह देश में इस समय मौजूद सबसे बड़े डेटा सेंटर से भी 60 फीसदी बड़ा होगा।' उन्होंने कहा कि कंपनी 500 मेगावॉट आईटी पावर के साथ अगले पांच साल में मुंबई, चेन्नई और नवी मुंबई सहित विभिन्न शहरों में 70,000 से अधिक रैक स्थापित करने को तैयार है। अगले 10 साल में यह कारोबार खूब बढ़ेगा। 

गुप्ता ऐसा सोचने वाले अकेले व्यक्ति नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां, भारतीय कंपनी समूह और निजी इक्विटी समर्थित स्टार्टअप भी थर्ड पार्टी डेटा सेंटर बनाने में निवेश करने को तैयार है। इनमें फिडेलिटी इनवेस्टमेंट्स के स्वामित्व वाली कोल्ट डेटा, अमेरिका की इक्विनिक्स और डलास की साइरस वन शामिल है। कोल्ट डेटा यूरोप और एशिया में डेटा सेंटर चलाती है। इक्विनिक्स सबसे बड़ी को-लोकेशन कंपनियों में शामिल है। घरेलू कंपनियों में अदाणी और रिलायंस जियो के साथ पीई फंड्स एप्सिलन और एमएलसी समर्थित पाई डेटासेंटर्स भी शामिल है। पाई डेटासेंटर्स ने 250 करोड़ रुपये जुटाए हैं और वह इस कारोबार में आईपीओ लाने वाली पहली कंपनी बनने की तैयारी में है।

बैंक ऑफ मेरिल लिंच के मुताबिक अगले पांच साल में भारत में 700 से 800 मेगावॉट आईटी पावर क्षमता के डेटा सेंटर बनेंगे जिसके लिए 7 से 8 अरब डॉलर निवेश चाहिए। इनमें से अधिकांश सेंटर पांच महानगरों में बनेंगे।  देश में 250 मेगावॉट आईटी पावर क्षमता के साथ 38 लाख वर्ग फुट अतिरिक्त डेटा केंद्र का पहले से ही निर्माण हो रहा है। यह 12 महीने में काम करना शुरू कर देगा। वित्त वर्ष 2024 तक हर साल इतनी ही क्षमता की जरूरत पड़ेगी। कोल्ट डेटा के मुताबिक देश में 2020 तक क्लाउड सेवाओं की मांग 24 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढऩे की उम्मीद है। हालांकि दूसरे विश्लेषकों के मुताबिक यह 30 फीसदी की सालाना दर से बढ़ सकती है। 

इस कारोबार के तेजी पकडऩे के कई कारण है लेकिन डेटा निजता को लेकर सरकार के नए नियम भी एक मुख्य वजह है। इनके मुताबिक विदेशी कंपनियों को भारतीयों की जानकारी देश में रखनी पड़ेगी। मेरिल लिंच का अनुमान है कि डेटा स्टोरेज की मांग में 30 से 40 फीसदी बढ़ोतरी इसी वजह से होगी। 4जी के आने के कारण भी डेटा के इस्तेमाल में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। साथ ही कपंनियों द्वारा कारोबारी ऐप्लिकेशन के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग अपनाए जाने से भी डेटा स्टोरेज की मांग बढ़ रही है। 

इसके अलावा कृत्रिम मेधा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स का चलन बढऩे से भी स्टोरेज की मांग में अगले कुछ वर्षों में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। देश में इंटरनेट ऑफ थिंग्स अभी शुरुआती दौर में है। यही वजह है कि कोल्ट डेटा मुंबई में 100 मेगावॉट आईटी हाइपर स्केल डेटा सेंटर कैंपस बना रही है। कंपनी को उम्मीद है कि यह अगले साल के मध्य तक काम करना शुरू कर देगा।  कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी डैटलैफ स्पैंग ने कहा, 'हमारी कंपनी भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने वाली पश्चिम की मुख्यधारा की पहली कंपनी है। भारत की आधी आबादी की उम्र 25 साल से कम है और वे डेटा का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। कोल्ट अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियों को अपनी सेवाएं देगी।'इक्विनिक्स का कहना है कि वह भारत जैसे उभरते बाजारों में उतरने के लिए किसी बड़े साझेदार की तलाश में है। हालांकि उन्होंने इस बारे में भेजे गए सवाल का जवाब नहीं दिया। 

अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी को भी इस कारोबार में अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं। अदाणी बिजली कारोबार में भी है और डेटा सेंटर चलाने की लागत में 40 फीसदी हिस्सा बिजली का होता है। अदाणी समूह ने 300 से 400 मेगावॉट क्षमता का हाइपर स्केल डेटा सेंटर बनाने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार से हाथ मिलाया है। उसकी योजना देश में एक गीगावॉट क्षमता के डेटा सेंटर पार्क बनाने की है।
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