बिजनेस स्टैंडर्ड - सबके चहेते आरबीआई के पूर्व गवर्नर विमल जालान
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, September 15, 2019 11:47 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

सबके चहेते आरबीआई के पूर्व गवर्नर विमल जालान

शुभमय भट्टाचार्य /  September 01, 2019

विमल जालान ने संसद में अपने अनुभव के बारे में 2007 में एक किताब लिखी। यह संसद के दोनों सदनों में तीखी नोकझोंक का दौर था और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर राज्य सभा के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि हंगामे के बीच सैकड़ों अहम दस्तावेज चर्चा के बिना ही पारित कर दिए गए। इनमें सार्वजनिक संस्थाओं की कई वार्षिक रिपोर्ट, परिणाम और प्रदर्शन बजट, कार्रवाई रिपोर्ट और विभिन्न विभागों द्वारा जारी अधिसूचनाएं शामिल थीं। 

राज्य सभा सदस्य का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने अपने संसदीय अनुभवों को एक किताब 'इंडियन पॉलिटिक्स: ए व्यू फ्रॉम बैकबेंच' की शक्ल दी। उन्होंने इससे पहले और इसके बाद भी कई किताबें लिखी लेकिन यह उनकी सबसे चर्चित किताब रही। उन्होंने लिखा कि देश के तीन सबसे उच्च पद राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आज ऐसे लोगों के पास हैं जिनका कई दलों के सत्तारूढ़ गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी के नेता ने अंतिम क्षणों में नामांकन किया था। संसद और राज्य विधानसभाओं में जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के पास कोई पूर्व ज्ञान नहीं था लेकिन उन्हें विधिवत वोट मिला। वोटिंग की जरूरत कहां थी? पार्टी नेताओं के एक चुनिंदा समूह के फैसले की पुष्टिï के लिए।'

जालान बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं। आरबीआई के आर्थिक पूंजी ढांचे की समीक्षा के लिए उनकी अगुआई में गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में भी यह बात साबित होती है। यह मुद्दा पिछले कुछ समय से सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ था। खासकर कर राजस्व संग्रह में कमी के कारण सरकार केंद्रीय बैंक से अपने कोष को हस्तांतरित करने के लिए कह रही थी।

जालान की बेबाकी का कारण यह है कि उन्होंने 78 साल के अपने जीवन में यह सबकुछ देखा है। वह 1981 से 1990 तक मुख्य आर्थिक सलाहकार, बैंकिंग सचिव और फिर वित्त सचिव रहे। इसके बाद वह 1991 से 1993 तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत के कार्यकारी निदेशक रहे। यह भारत के आर्थिक इतिहास में सबसे अहम दौर था जब देश भुगतान संतुलन के संकट में था। संयोग से जालान भारत के एकमात्र अफसरशाह हैं जो लगातार आईएमएफ और फिर विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक रहे।

वह मनमोहन सिंह की अगुआई में भारत की उस आर्थिक संकट प्रबंधन टीम का हिस्सा थे जिसने बेलआउट के लिए आईएमएफ में बातचीत की थी। इसके बाद उन्हें विश्व बैंक को मनाने की जिम्मेदारी दी गई ताकि वह भारत के लिए अपने सहायता कार्यक्रमों कड़ी शर्तें न थोपे। इन जिम्मेदारियों के बाद जब वह भारत लौटे तो 1997 में उन्हें आरबीआई का गवर्नर बनाया गया। वह सबसे लंबे समय तक गवर्नर रहे। जब अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में उन्हें राज्यसभा के लिए नामांकित किया तो उन्होंने आरबीआई गवर्नर के पद से इस्तीफा दिया। जालान जब वित्त मंत्री थे तो उन्हें रिपोर्ट करने वाले निदेशकों में नृपेंद्र मिश्रा भी शामिल थे जो अब प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव हैं।

जब उन्होंने देखा कि संसद में बजट पर भी चर्चा नहीं होती, तो वह बहुत निराश हुए। उन्होंने कहा, 'पिछले साल और उससे पहले साल की तरह, 2007-08 में भी संसद के दोनों सदनों ने हंगामे के बीच चर्चा के बिना कुछ ही मिनटों में आम बजट को मंजूरी दे दी।' अफसरशाही-राजनेता स्पेक्ट्रम के बारे में उनके अनुभव को देखते हुए वह अधिकांश दलों के चहेते रहे हैं। देवेगौड़ा सरकार ने उन्हें आरबीआई का गवर्नर बनाया और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने उन्हें सेवा विस्तार दिया। कोलकाता में जन्मे जालान प्रेसिडेंसी कॉलेज के छात्र रहे वाम मोर्चे की भी पसंद थे। उन्होंने कैंब्रिज और ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय, दोनों से पढ़ाई की है।

इसी महीने उनकी नई किताब रिसर्जेंट इंडिया आई है। आईबीआई के पूर्व गवर्नरों की किताबें एक जरिया बन गई हैं जिनके माध्यम से विश्लेषक भारत के आर्थिक इतिहास की व्याख्या करते हैं। इनमें जालान के उत्तराधिकारी वाई वी रेड्डी, डी सुब्बा राव और रघुराम राजन शामिल हैं। इन किताबों का विमोचन सरकारों के लिए आर्थिक नीतियों पर जनता की नब्ज भांपने का मंच बन गया है। जालान ने भी निराश नहीं किया। 

सॉवरिन बॉन्ड लाने के प्रस्ताव के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार को विदेशी बाजारों से दीर्घकालिक फंड ही उधार लेना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में इसकी राशि जीडीपी के 1.5 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में इस प्रस्ताव की घोषणा की थी और राजन और रेड्डी ने इसकी आलोचना की थी।

Keyword: bimal jalan, RBI, Report, Rajyasabha, IMF, Manmohan Singh,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या 5जी परीक्षण में चीन की कंपनियों से परहेज करना है सही कदम?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.