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सरकारी बॉन्ड हैं अच्छे विकल्प: विशेषज्ञ

संजय कुमार सिंह /  September 01, 2019

पिछले 10 महीने में बाजार में आए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) में तीन चौथाई से अधिक को पूर्ण अभिदान भी नहीं मिल पाया। दिलचस्प है कि एनबीएफसी ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इन एनसीडी पर 9.5-11.0 प्रतिशत के दायरे में ब्याज देने की पेशकश की थी। वास्तव में निवेशक अब अधिक जोखिम लेने से परहेज कर रहे हैं और यही वजह है कि इन निर्गमों को उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। मोतीलाल ओसवाल प्रावइेट वेल्थ मैनेजमेंट में प्रमुख- इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी आशिष शंकर ने कहा, 'आईएलऐंडएफएस द्वारा भुगतान में चूक और डीएचएफएल की रेटिंग में कमी के बाद कई एनबीएफसी के बॉन्ड कमजोर हो गए हैं और प्राप्तियां बढ़ गई हैं। कई एनबीएफसी की परिसंपत्ति एवं देनदारी में असंतुलन दिख रहा है। निवेशक अब जोखिम से परहेज कर रहे हैं और पुख्ता रिकॉर्ड वाली कंपनियों के बॉन्ड ही पूरी तरह खरीदे जा रहे हैं।' विशेषज्ञ निवेशकों को निवेश योजनाएं चुनने में सतर्क रवैया बरकरार रखने की सलाह दे रहे हैं। वैलिडस वेल्थ में मुख्य निवेश अधिकारी राजेश चेरुवू कहते हैं, 'पहले सुरक्षा एवं तरलता को तवज्जो और उसके बाद ही अपने फिक्स्ड-इनकम पोर्टफोलियो में प्रतिफल पर विचार करें।'

काफी कम जोखिम लेने का माद्दा रखने वाले निवेशकों के लिए बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट सबसे बेहतर विकल्प हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) इस समय अपने 211 दिनों से एक साल से कम अवधि की जमा (डिपॉजिट) पर 6 प्रतिशत और एक साल से कम और दो साल से कम अवधि की जमा पर 6.70 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। आप इन दरों और अवधि की तुलना कर अपने लिए बेहतर प्रतिफल की गुंजाइश बढ़ा सकते हैं। मिसाल के तौर पर आईडीएफसी बैंक तीन साल और एक दिन की अवधि पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। आप अपनी बचत का कुछ हिस्सा लघु वित्त बैंक के साथ भी रख सकते हैं, जो तीन साल की अवधि के लिए 9 प्रतिशत तक ब्याज दे रहे हैं। यह बात जरूर ध्यान में रखें कि निवेशक अगर ऊंचे कर दायरे में आता है तो एफडी पर प्राप्त प्रतिफल पर अच्छा-खासा कर लगता है। 

निवेशक नकद जरूरत के लिए तत्काल नकदी देने वाले फंडों पर विचार कर सकते हैं। पिछले एक साल में उन्होंने 5.93 प्रतिशत औसत प्रतिफल दिया है। चेरुवू कहते हैं, 'लिक्विड फंडों के साथ वित्तीय तंत्र से जुड़ा जोखिम होता हैं, इसलिए वे निवेशकों को ओवरनाइट म्युचुअल फंडों (1 दिन की परिपक्वता वाली प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले फंड) में निवेश की सलाह दे रहे हैं।' जो निवेशक कम से कम तीन साल तक निवेश नहीं बनाए रख सकते हैं, पे आर्बिट्राज फंड का सहारा ले सकते हैं। पिछले एक साल के दौरान इन फंडों ने 6.09 प्रतिशत प्रतिफल दिया है। ये इक्विटी फंडों के बराबर ही नकदी एवं कर बचत की पेशकश करते हैं।

थोड़ा जोखिल लेने की जहमत उठाने वाले निवेशकों को लघु अवधि और रॉल डाउन फंडों में निवेश करना चाहिए। ये फंड 8 से 8.5 प्रतिशत के दायरे में यील्ड-टू-मैच्योरिटी की पेशकश कर रहे हैं। चेरुवू कहते हैं, 'पोर्टफोलियो में विविधता के कारण डेट फंड खासे फायदेमंद होते हैं, जिससे जोखिम सीमित हो जाता है। लिहाजा इस समय वे एनसीडी के मुकाबले बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं।' जोखिम वाले बॉन्ड का पता करने के लिए किसी जानकार की सलाह लेकर फंड पोर्टफोलियो की पड़ताल कर सकते हैं। तीन साल से अधिक  समय तक निवेश बनाए रखने के लिए निवेशक दीर्घ अवधि के पूंजीगत लाभ कर छूट का लाभ (इंडेक्सेशन के बाद 20 प्रतिशत) ले सकते हैं।  

निवेशकों के पास पीएसयू और बैंकिंग फंडों में भी निवेश का विकल्प है। शंकर कहते हैं, 'ये फंड केवल उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड (पीएसयू, बैंकिंग क्षेत्र और अच्छी कंपनियों के बॉन्ड) में ही निवेश करते हैं। तीन साल की अवधि के दौरान ये फंड 7 प्रतिशत प्रतिफल दे सकते हैं और इंडेक्सेशन और पूंजीगत लाभ आदि के कारण इनका करोपरांत प्रतिफल दूसरी योजनाओं के मुकाबले अधिक होता है।' निवेशक सरकारी बॉन्ड में भी निवेश कर सकते हैं, जिसमें 7.75 प्रतिशत तक ब्याज हासिल होता है। उनकी अवधि 7 साल होती है और इन पर कराधान मामूली दर पर होता है और इनकी खरीदारी निजी एवं सरकारी दोनों क्षेत्रों के बैंकों से की जा सकती है। डाकघर लघु बचत योजनाएं भी निवेश के लिहाज से बेहद सुरक्षित समझी जाती हैं। पांच साल के लिए निवेश करने वाले राष्टï्रीच बचत पत्र (एनएससी) पर विचार कर सकते हैं, जो 7.9 प्रतिशत ब्याज की पेशकश करते हैं। बुर्जुग निवेशक वरिष्ठï नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) पर विचार कर सकते हैं। यह योजना 8.6 प्रतिशत ब्याज की पेशकश करती है। लंबी अवधि का सोचें तो कन्या शिशु के लिए सुकन्या समृद्धि खाते में निवेश किया जा सकता है। इस योजना में सालाना 8.4 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है।
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