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कच्चा तेल फिसलने से विपणन कंपनियों को मिल रही मदद

उज्ज्वल जौहरी /  September 01, 2019

जून की ऊंचाई से लगभग 30 प्रतिशत गिर चुके हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के शेयरों में अब तेजी देखने को मिल रही है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) में सुधार, और विपणन मार्जिन (पेट्रोल, डीजल आदि जैसे ईधन पर मिलने वाले) के लिए मजबूत परिदृश्य ओएमसी और उनकी आय के लिए अच्छे संकेत हैं। 

कमजोर जीआरएम से अप्रैल-जून तिमाही (पहली तिमाही) के दौरान ओएमसी का मुनाफा लगातार प्रभावित हुआ। पहली तिमाही में, सिंगापुर बेंचमार्क जीआरएम 3.5 डॉलर प्रति बैरल पर था जो एक साल पहले की तिमाही में दर्ज किए गए स्तर की तुलना में आधा है। इससे ओएमसी का मुख्य जीआरएम प्रभावित हुआ, और आईओसी, बीपीसीएल तथा एचपीसीएल ने 10.2 डॉलर, 7.5 डॉलर, और 7.1 डॉलर (जून 2018 की तिमाही) की तुलना में 4.7 डॉलर, 2.8 डॉलर और 0.75 डॉलर का रिफाइनिंग मार्जिन दर्ज किया।

हालांकि अब सकारात्मक बात यह हे कि सिंगापुर जीआरएम में सुधार आता दिख रहा है। दरअसल, तिमाही आधार पर, मार्च 2019 की तिमाही के 3.2 डॉलर प्रति बैरल के औसत से, जीआरएम 2019-20 की पहली तिमाही में 3.5 डॉलर पर थोड़ा बेहतर है और चालू तिमाही में यह और सुधरकर 4.2 डॉलर के स्तर के आसपास आया है।

एडलवाइस के विश्लेषकों का कहना है कि प्रतिस्पर्धा में बदलाव से दोहरा फायदा हुआ है और वैश्विक जीआरएम में मजबूत सुधार से भारतीय ओएमसी को मजबूती मिलने की संभावना है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के पास दुनिया की बेहद प्रतिस्पर्धी रिफाइनरियां भी हैं और विश्लेषकों का कहना है कि इंटरनैशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के सख्त मानक (उत्सर्जन मानक) अगले साल के शुरू में अमल में आएंगे।

ओएमसी ने विपणन मार्जिन में मजबूत रुझान दर्ज किया है और पहली तिमाही में आईओसी, बीपीसीएल, और एचपीसीएल के मिश्रित मार्जिन में सालाना आधार पर 8.8 प्रतिशत, 9.3 प्रतिशत, और 4.5 प्रतिशत सुधार आया।

आम चुनाव बीत जाने के साथ, रिटेल ईंधन मूल्य निर्धारण में किसी तरह के नियामकीय हस्तक्षेप की आशंका भी समाप्त हो गई है। कमजोर वैश्विक तेल कीमतों ने लाभ को मजबूती प्रदान की है, वहीं उनकी कार्यशील पूंजी जरूरत में भी कमी आएगी। इसके अलावा, ओएमसी की शेयर कीमतों में गिरावट ने उनके मूल्यांकन को भी आकर्षक बना दिया है। ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के विश्लेषकों का कहना है, 'हालांकि हम नहीं मानते कि ओएमसी पूरी तरह चिंताओं से उबर गई हैं, लेकिन गिरावट ने मूल्य पेशकशों को कुछ हद तक आकर्षक बना दिया है।'

विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में ताजा गिरावट को देखते हुए, विपणन मार्जिन में सुधार आया है और इससे कमजोर रिफाइनिंग परिदृश्य से मुकाबला करने में मदद मिल सकती है। तीन ओएमसी में, एचपीसीएल विपणन मार्जिन के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील है और नियोजित लागत कटौती तथा खास गैर-वसूली योग्य मदों की प्राप्ति के साथ उसमें सुधार की गुंजाइश बरकरार है। 

हालांकि एचपीसीएल ने पेट्रोल/डीजल गुणवत्ता को बीएस-6 के अनुकूलल बनाने के प्रयास में वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाहियों में विशाखापटनम और मुंबई रिफाइनरियों में कामकाज 45 दिन तक बंद रखने की योजना बनाई है और इसका वित्त वर्ष 2020 में पूरे रिफाइनरी उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि उसके बाद रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत होगा और एचपीसीएल की विस्तारित रिफाइनिंग क्षमता भी 2020-21 से शुरू हो जाएगी। एडलवाइस के विश्लेषकों का कहना है कि आईओसी का विपणन में कम निवेश है, लेकिन अपने डिस्टिलिंग संबंधित बेहतर प्रतिफल की वजह से उसमें अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं। कंपनी को पेट्रोकेमिकल आय, ऊंचे लाभांश प्रतिफल (7.4 प्रतिशत), मजबूत आरओई (12.9 प्रतिशत) और मजबूत नकदी प्रवाह से मदद मिली है। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि बाजार की नजर आईओसी की पारादीप रिफाइनरी से दिखने वाले सकारात्मक बदलाव पर लगी रहेगी और स्थिति सामान्य होने में विलंब से निवेशक धारणा प्रभावित हो सकती है। 

इस बीच, अपस्ट्रीम परिचालन (अन्वेषण परिसंपत्तियों) और डाउनस्ट्रीम परिचालन (रिफाइनिंग एवं विपणन) में निवेश के साथ बीपीसीएल कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता की स्थिति में मजबूत बनी हुई है। सेंट्रम ब्रोकिंग के प्रबाल सेन रक्षात्मक दांव के तौर पर बीपीसीएल को पसंद कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, जहां हालात ओएमसी के पक्ष में तब्दील हो रहे हैं, वहीं निवेशकों को बिक्री हिस्सेदारी के संदर्भ में सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों या विपणन मार्जिन/मूल्य निर्धारण में नियामकीय हस्तक्षेप पर नजर रखने की जरूरत होगी।

Keyword: HPCL, BPCL, Petrol, Diesel, GRM,
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