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प्रतिशोध की राजनीति का गहराता दुष्चक्र

शेखर गुप्ता /  September 01, 2019

बीते कुछ सप्ताह नितांत अस्वाभाविक गुजरे जब कश्मीर, नरेंद्र मोदी और इमरान खान की चर्चाओं के बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग (आईटी) ने सुर्खियों में जगह बनाई। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल के दिनों में हमने देखा कि कैसे रसूखदार और ताकतवर लोगों के यहां छापे पड़े, आरोपपत्र दाखिल किए गए, सवाल-जवाब हुए और वे अदालतों के चक्कर काटते देखे गए।

सीबीआई के अधेड़ अधिकारियों की पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के घर की दीवार फांदने की तस्वीरें इस समय कश्मीर की तमाम घटनाओं, इमरान की बयानबाजी या ट्रंप के साथ मोदी के दोस्ताना धौलधप्पे पर भारी पड़ रही हैं।

यह बात मुझे एक वरिष्ठ राजनेता के साथ देर शाम हुई एक बातचीत की याद दिलाती है। मैं यहां साफ कर दूं कि यह बातचीत रात्रिभोज के दौरान हुई थी और कोई भी शराब के असर में नहीं था। यह बताना इसलिए जरूरी है क्योंकि कोई यह न समझे कि यह बातचीत अतिरेकी माहौल में हुई थी। नेताजी ने पूछा था कि लोग राजनीति में अपना जीवन क्यों खपाते हैं? हम धूल क्यों फांकते हैं, गर्मियों में क्यों घूमते हैं, धक्का-मुक्की क्यों झेलते हैं, अदालतों के चक्कर काटते हैं, जेल भी जाते हैं? क्या सत्ता पाने के लिए? इसमें ऐसा क्या है? उन्होंने कहा कि यह सब पैसे के लिए नहीं किया जाता क्योंकि तमाम पैसा कमाने के बाद भी आप उसका लुत्फ नहीं उठा सकते। हमारी राजनीति में आपकी कार, घर और कुर्ते का साधारण दिखना जरूरी है। मैंने उनसे पलटकर पूछा कि फिर आप राजनीति क्यों करते हैं? अगर आप सत्ता और संपत्ति का सुख नहीं ले सकते तो आप इसमें क्यों हैं?

'यही आप नहीं समझोगे शेखर गुप्ता जी', उन्होंने जवाब दिया। फिर वह बताने लगे कि सत्ता मिलती है तो क्या होता है। आपने जिसे हराया है उसके साथ आप वही करते हो जो उसने आपके साथ किया। न केवल उसके साथ बल्कि उसके करीबी लोगों के साथ भी आप वही करते हो। उन्होंने कहा, 'हम जानते हैं कि हर जिले, हर गांव में उसके लोग कौन हैं? हम पुलिस और सतर्कता विभाग के लोगों को उनके पीछे लगा देते हैं। हम वाकई में जिन्हें निशाना बनाना चाहते हैं उनके घर तो एक किलो अफीम भी रखवा सकते हैं या फिर हत्या का आरोप लगवा सकते हैं।' इसके बाद क्या होता है? मैंने कहा कि इस तरह आपको अपना प्रतिशोध मिल जाता है।

उन्होंने कहा, 'आपको राजनीति की समझ नहीं है। जब हम ऐसे लोगों को परेशान करते हैं तो वे भागकर अपने आकाओं के पास जाते हैं और बचाने की गुहार लगाते हैं। तब उनके नेता कहते हैं कि वे उनकी सहायता नहीं कर सकते क्योंकि अब उनके पास सत्ता नहीं है। जब वह तड़पता है, तब दिल में जो ठंडक पड़ती है, उसी के लिए हम पांच साल तक धक्के खाते हैं।'

कृपया इस नतीजे पर न पहुंचें कि कि यह कोई अनाम किस्सा है। मैं आपको इस नेता का नाम बताने का वादा करता हूं। इसके लिए आपको यह आलेख पूरा पढऩा होगा क्योंकि आगे इसमें एक दिलचस्प मोड़ है। यह बातचीत करीब दो दशक पुरानी है। तब से अब तक इस बात के अनेक प्रमाण हैं कि वह कितने सही थे।

इस समय चिदंबरम हिरासत में हैं। उन पर और उनके बेटे कार्ति पर आईएनएक्स मीडिया मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा (उम्र 90 वर्ष) को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के भूमि आवंटन मामले में आरोप पत्र दिया गया है, कमलनाथ आयकर जांच के दायरे में हैं, उनके भांजे पर अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद मामले में रिश्वत लेने का आरोप है और वह बैंक धोखाधड़ी मामले में पकड़ा जा चुका है, सोनिया-राहुल और उनके तमाम करीबी लोग नैशनल हेरल्ड मामले में फंसे हुए हैं, कर्नाटक कांग्रेस के बड़े नेता डीके शिवकुमार भी जांच के दायरे में हैं।

सन 2015 में, भाजपा के सत्ता में आने के कुछ ही दिन बाद हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वीरभद्र ङ्क्षसह के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया और उनकी दूसरी बेटी के विवाह के ही दिन उनके घर पर छापा मारा गया। उन्हें विवाह स्थल से घर की ओर भागना पड़ा और इस उपलक्ष्य में आयोजित दोपहर भोज को निरस्त भी करना पड़ा था। प्रफुल्ल पटेल भी कई मामलों में ईडी का सामना कर रहे हैं। ममता बनर्जी के कई पार्टी सहयोगियों एवं निष्ठावान पुलिस अधिकारियों को भी सीबीआई के साथ अनचाही मुलाकातें करनी पड़ रही हैं।

फिर से अतीत की ओर लौट सकते हैं। वर्ष 2001 की गर्मियों में सत्ता में वापसी के दो हफ्ते बाद ही जयललिता ने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को 12 करोड़ रुपये के फ्लाईओवर घोटाले में आरोपी बनाने के साथ आधी रात को उनके घर पर छापा भी डलवाया था। बुजुर्ग करुणानिधि को टांगकर सीढिय़ों से उतारे जाने के नाटकीय दृश्यों को देखकर आप अब भी कांप उठेंगे। 

समय-समय पर लालू, मुलायम और मायावती के खिलाफ भी सीबीआई, ईडी या आयकर विभाग मामले दर्ज करते हैं चाहे सत्ता में राजग रहा हो या संप्रग। इन मामलों को कमजोर करना या सख्त करना इस पर निर्भर करता था कि वे लोग केंद्र के साथ संपर्क में हैं या नहीं। संप्रग सरकार के दौरान परमाणु सौदे के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पहले की घटनाओं को देखें। इन नेताओं की सूची में शामिल होने वाले नए नेता राज ठाकरे हैं। ईडी ने ठाकरे पर आईएलऐंडएफएस से 20 करोड़ रुपये की धांधली करने का आरोप लगाया है।

इन सभी मामलों को अगर गौर से देखें तो आपको एक पैटर्न दिखाई देगा। इन मामलों में अभी मुश्किल में फंसे दल ने मौजूदा हुक्मरानों के साथ कभी यही सब किया था जब वह सत्ता में था। अमित शाह और नरेंद्र मोदी को एक दशक तक कानूनी एवं आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ा। शाह को तो फर्जी मुठभेड़ एवं हत्या के एक मामले में तीन महीने जेल में भी बिताने पड़े थे जिनसे बाद में वह बरी हो गए। शाह को भी उस समय हिरासत में लिया गया था जब वह एक शादी समारोह में गए थे।

शाह के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश देने वाले न्यायाधीश ने सेवानिवृत्ति के महज दो दिन पहले यह आदेश दिया था। न्यायाधीश गाजियाबाद के भविष्य निधि घोटाले में खुद सीबीआई जांच का सामना कर रहे थे। लेकिन सीबीआई ने जल्द ही उन्हें आरोपमुक्त कर दिया और फिर अखिलेश यादव की 'सेक्युलर' सरकार ने उस न्यायाधीश को उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष भी बना दिया था। विवाह समारोह के दौरान कार्रवाई, सेवानिवृत्ति के दो दिन पहले आदेश जारी करना और फिर उसके लिए इनाम की घोषणा। यह सब सुनने में काफी जाना-पहचाना लगता है ना।

इस बहस का कोई मतलब नहीं है कि किसने पहला वार किया था? क्योंकि अब हम एक दुष्चक्र में फंस गए हैं। दो दशक पहले तक जो चीज राज्यों तक सीमित थी, अब वह केंद्र में भी पहुंच चुकी है। बस भाजपा ने इसे नए मुकाम तक पहुंचाने का काम किया है। पहला तरीका, सरकारी एजेंसियों, कुछ टीवी चैनलों और सोशल मीडिया का त्रिशूल के तौर पर इस्तेमाल है। और दूसरा तरीका है अपने पिछले दरवाजे को खुला रखकर दलबदल के लिए तैयार किसी भी नेता को मौका देना।

उस शाम के मेरे मेजबान ने मुझसे यही कहा था। राज्यों में यह पुराना पैटर्न था। बादल बनाम अमरिंदर, मुलायम बनाम मायावती, जयललिता बनाम करुणानिधि, देवीलाल बनाम बंसीलाल बनाम भजनलाल। अब यह रवायत नई दिल्ली तक आ पहुंची है।

मैंने उस वरिष्ठ नेता का नाम बताने का वादा नहीं तोडऩे वाला हूं जिन्होंने प्रतिशोध एवं परपीड़ा आनंद वाली राजनीति के बारे में मुझे गहरी जानकारी दी थी। वह नेता थे ओम प्रकाश चौटाला। उस समय वह हरियाणा के मुख्यमंत्री थे और हमारी बातचीत हरियाणा भवन में हुई थी। आज चौटाला कहां पर हैं? तिहाड़ जेल में। आज चौटाला और उनके एक बेटे भ्रष्टाचार के मामले में 10 साल के कारावास की सजा भुगत रहे हैं। बदले की राजनीति ने उन्हें भी शिकार बना लिया। हालत यह है कि कभी हरियाणा में बहुमत हासिल करने वाली उनकी पार्टी को हालिया लोकसभा चुनाव में महज 1.8 फीसदी वोट मिले। उनके बाहर आने पर मैं जानना चाहूंगा  कि वह राजनीति को किस दिशा में आगे बढ़ता देख रहे हैं?
Keyword: CBI, ED, IT, Income Tax, Enforcement Directorate, P Chidambaram, Narednra Modi, Amit Shah,
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