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'फर्जी मतदाता आईडी को हटाने में आधार मददगार'

नेहा अलावधी /  August 30, 2019

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के मुख्य कार्याधिकारी अजय भूषण पांडे ने एक साक्षात्कार में नेहा अलावधी को बताया कि आधार फर्जी मतदाता पहचान-पत्रों को रद्द करने और मतदाता डेटाबेस में संशोधन को आसान बनाने में मददगार साबित हो सकता है। प्राधिकरण आधार से और लोगों को जोडऩे की दिशा में भी काम कर रहा है। बातचीत के अंश : 

 
आधार को लेकर क्या योजनाएं हैं? 
 
आधार में लगभग पूरे देश का नामांकन हो चुका है, इसलिए अब हम आधार को अद्यतन बनाने, डेटा सुरक्षा और इसके स्वैच्छिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना पर ध्यान दे रहे हैं, जिसके लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के साथ एक उचित कानून बनाया गया है। उच्चतम न्यायालय के फैसले में कहा गया था कि रोजमर्रा की सेवाएं हासिल करने में सहूलियत की खातिर आधार के स्वैच्छिक इस्तेमाल के लिए एक कानून बनाया जाना चाहिए, जो आधार के इस्तेमाल को अधिकृत करेगा और इस कानून में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए। 
 
अदालत के फैसले और न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा समिति की सिफारिशों को मद्देनजर रखते हुए आधार अधिनियम, पीएमएलए (धन शोधन रोकथाम अधिनियम) और टेलीग्राफ अधिनियम में कुछ संशोधन किए गए हैं। इसलिए अब बैंक खाता, म्युचुअल फंड खाता और डीमैट खाता खोलने, मोबाइल सिम लेने आदि में आधार का स्वैच्छिक इस्तेमाल किया जा सकता है। आधार से सहूलियत मिलती है। पहले लोगों को बहुत से पहचान-पत्र ले जाने होते थे, जिनका सत्यापन नहीं हो पाता था। पहले व्यक्ति को यह भी पता नहीं होता था कि वह जो पहचान पत्र ले जा रहा है, उसे सेवा प्रदाता स्वीकार करेगा या नहीं। 
 
आपका मतलब है कि पहचान-पत्र के रूप में विभिन्न दस्तावेजों के इस्तेमाल से समस्या पैदा होती थी...?
 
हर किसी के पास बहुत से पहचान-पत्र नहीं होते हैं। अगर आप एक पहचान-पत्र, माना कि मतदाता पहचान पत्र देते हैं तो वे दूसरा पहचान-पत्र, माना कि बिजली का बिल मांग सकते हैं। हालांकि आधार कमोबेश एक मानक पहचान दस्तावेज बन चुका है, जो सुरक्षित है और जिसका सत्यापन किया जा सकता है। यह एक ऐसा पहचान-पत्र है, जिसका सत्यापन तुरंत किया जा सकता है और यह काम ऑफलाइन भी संभव है। फर्जी दावेदारों को हटाया जा सकता है। 
 
देश में 124 करोड़ से अधिक लोगों को आधार मिल चुके हैं, इसलिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे? 
 
आप इसे इस तरह समझें। हर साल करीब 2 करोड़ बच्चे जन्म लेंगे, अन्य 2 करोड़ की उम्र 5 साल हो जाएगी और अन्य 2 करोड़ 15 साल की उम्र पार कर जाएंगे। इसलिए कम से कम 6 करोड़ लोगों का आधार में नामांकन करना होगा या उनके बामोमीट्रिक लेने होंगे या अद्यतन करने होंगे। इसके अलावा यह मानकर चलते हैं कि 125 करोड़ लोग हर पांच साल में अपना नाम, पता या फोटो या मोबाइल नंबर बदलते हैं तो इसका मतलब है कि 25 करोड़ लोग हर साल अपने आधार कार्ड में बदलाव करेंगे। इसका मतलब है कि रोजाना 10 लाख आधार को अद्यतन करना होगा। इसका यह भी मतलब है कि हमें यह जरूरत पूरी करने के लिए इसी क्षमता का बुनियादी ढांचा बनाना होगा। इस समय डाकघरों में 12,000 आधार केंद्र हैं। वहीं बैंकों में 11,000 और सरकारी कार्यालयों एवं परिसरों में इतने ही नामांकन एवं अद्यतन केंद्र हैं। हम पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर 53 शहरों में 114 आधार सेवा केंद्र खोल रहे हैं ताकि लोगों को आधार में संशोधन या नामांकन में कोई दिक्कत न हो। 
 
चुनाव आयोग ने विधि मंत्रालय को पत्र लिखा है, जिसमें मतदाताओं के पहचान-पत्रों को आधार से जोडऩे की बात कही गई है। इस पर आप क्या कहेंगे? 
 
अभी आधार का इस्तेमाल ज्यादातर स्वैच्छिक है। केवल कुछ जगह कानून में इसे अनिवार्य बनाया गया है। आधार अधिनियम में हाल के संशोधन के बाद आधार को स्वैच्छिक रूप से बैंक खाता, डीमैट खाता और म्युचुअल फंड खाता खोलने और मोबाइल सिम आदि खीरदने में किया जा सकता है। मतदाता पहचान-पत्र के आधार के साथ सत्यापन के मामले में यह समझना जरूरी है कि इसके लिए एक ऐसा कानून बनाना होगा, जो आधार मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के सभी मानकों को पूरा करे। मेरा मानना है कि एक ऐसे कानून को मंजूरी दी जा सकती है, जिससे मतदाता अपने मतदाता पहचान-पत्र की खातिर आवेदन करने के लिए राशन कार्ड या बिजली बिल देने के बजाय स्वैच्छिक रूप से आधार का इस्तेमाल कर सकें। निस्संदेह आधार मतदाता पहचान के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता क्योंकि आधार निवासी की पहचान का सबूत है, लेकिन यह नागरिकता का सबूत नहीं है। इसलिए आधार के जरिये मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन करने के बाद अधिकारी ऐसे आवेदक की नागरिकता के सत्यापन के लिए अन्य जांच-पड़ताल कर सकते हैं। आधार का इस्तेमाल जाली और फर्जी मतदाता पहचान-पत्रों को समाप्त करने में किया जा सकता है और यह मतदाता डेटाबेस को अद्यतन बनाने में मददगार साबित हो सकता है। अगर लोग एक शहर से दूसरे शहर में जा रहे हैं तो व्यक्ति का नाम एक मतदाता सूची से हटाने और दूसरी जगह मतदाता सूची में शामिल करने की जरूरत पड़ती है। आधार तकनीक से यह काम बहुत आसानी से किया जा सकता है। मतदाता पहचान पत्र आधार से जुड़े होने पर व्यक्ति यह काम ऑनलाइन चुनाव आयोग की वेबसाइट पर कर सकता है। लेकिन ऐसा करने के लिए एक कानून बनाना होगा, जिसके तहत इस मकसद के लिए आधार स्वैच्छिक रूप से इस्तेमाल किया जा सके। जब ऐसा कानून बनाया जाएगा तो हम इस मुहिम में पूरा सहयोग देंगे। 
 
क्या आप गैर-अधिसूचित खानाबदोश आदिवासियों जैसे कुछ विशिष्ट जन समूहों को भी आधार के दायरे में लाने में मदद दे रहे हैं? 
 
हां, आधार एक सत्यापन योग्य पहचान पत्र है और इसे हासिल करना लोगों का बुनियादी अधिकार है। 
Keyword: voter id card, aadhar, UIDAI,
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