बिजनेस स्टैंडर्ड - रिजर्व बैंक की राहत पाकर कहीं बेपरवाह न हो जाए सरकार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, September 15, 2019 07:28 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

रिजर्व बैंक की राहत पाकर कहीं बेपरवाह न हो जाए सरकार

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  August 28, 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के डेढ़ महीने बाद गत शुक्रवार को अपनी पहली बड़ी नीतिगत घोषणा की जिसे बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने भी काफी पसंद किया। बीएसई का बेंचमार्क सेंसेक्स सोमवार को कारोबार के दौरान करीब 800 अंक चढ़ गया। अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता बहाल होने की उम्मीदों ने भी समूचे बाजार का मनोबल बढ़ाया लेकिन सीतारमण की घोषणाओं के अनुकूल असर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। सोमवार शाम को इससे भी बड़ी घोषणा की गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निदेशक मंडल की बैठक में विमल जालान समिति की अनुशंसाएं स्वीकार कर लिए जाने की जानकारी एक बयान में दी गई। जालान समिति ने आरबीआई की आकस्मिक निधि के लिए जरूरी पूंजी, मुद्रा एवं स्वर्ण भंडार संबंधी प्रावधानों की समीक्षा कर कुछ सुझाव दिए थे। इन सुझावों को स्वीकार करने का मतलब है कि आरबीआई को अपने आरक्षित भंडार से 1.76 लाख करोड़ रुपये सरकार को देने होंगे। इसमें से 52,637 करोड़ रुपये अधिशेष आकस्मिक निधि संबंधी प्रावधानों के मद में और 1.23 लाख करोड़ रुपये लाभांश के तौर पर दिए जाएंगे। लाभांश की राशि में से 28,000 करोड़ रुपये तो आरबीआई कुछ महीने पहले ही अंतरिम लाभांश के तौर पर सरकार को दे चुका है। सरकार ने उस राशि को 2018-19 के अपने राजस्व का हिस्सा भी बताया था।

 
इस तरह वर्ष 2019-20 में सरकार को आरबीआई से कुल 1.48 लाख करोड़ रुपये का राजस्व ही मिलेगा। इस साल के आम बजट में आरबीआई से 90,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का प्रावधान रखा गया था। इस तरह केंद्र सरकार को इस साल अब 58,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि ही मिलेगी। यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का महज 0.3 फीसदी है। इसके बावजूद शेयर बाजारों ने आरबीआई से सरकार को बड़ी राशि मिलने की घोषणा का दिल खोलकर स्वागत किया और मंगलवार को बाजार 147 अंक चढ़ गया। सरकार की राजकोषीय स्थिति थोड़ी बेहतर होने और उसकी उधारी पर दबाव कम होने की आशा में सरकार के 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल भी सुधरना शुरू हो गया। 
 
हालांकि खतरा यह है कि बाजार में उत्साह का यह दौर सरकार के भीतर यह भ्रम पैदा कर सकता है कि अर्थव्यवस्था की सारी चिंताएं खत्म हो चुकी हैं और समस्या का समाधान निकाल लिया गया है। ऐसा होना बेहद खतरनाक होगा। कोई भी कदम अर्थव्यवस्था की गहरे तक धंसी समस्याओं को दूर करने का सुनिश्चित एवं टिकाऊ तरीका नहीं है। अभी तक अपनाए गए कदमों की अपनी सीमाएं हैं और सरकार बाजार की सोच बदलने में कामयाबी को लेकर अधिक खुशी न ही मनाए तो बेहतर होगा। 
 
शुक्रवार को वाहन क्षेत्र के लिए घोषित पैकेज पर गौर करते हैं। इससे वाणिज्यिक एवं यात्री वाहनों की बिक्री बढऩे में मदद मिलेगी क्योंकि मार्च 2020 के पहले इन वाहनों की खरीद पर मिलने वाले कर लाभ का फायदा हर करदाता उठाना चाहेगा। इसी तरह बीएस-4 इंजन वाले वाहनों को पंजीकरण के 10-15 साल बाद तक परिचालन की अनुमति मिलने से भी वितरकों के पास धूल खा रही गाडिय़ों की मांग बढ़ सकती है। पंजीकरण मानकों में ढील देने और पुराने वाहनों के लिए स्क्रैप नीति लाए जाने से भी गाडिय़ों की बिक्री बढऩे की उम्मीद जगी है।
 
लेकिन इन उपायों का असर कम अवधि तक ही रहेगा। अगले साल में गाडिय़ों की मांग को लेकर वाहन क्षेत्र और सरकार फिक्रमंद बनी रहेगी। वाहन उद्योग का जीडीपी में करीब सात फीसदी हिस्सा है। समूते विनिर्माण क्षेत्र का करीब आधा वाहन उद्योग में ही है और सीधे एवं परोक्ष तौर पर करीब 80 लाख लोगों को रोजगार देता है। बिजली के बगैर चलने वाली गाडिय़ों की दीर्घावधि मांग को लेकर दुनिया भर में आशंकाएं जताई जा रही हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता है। तकनीक का प्रभाव, सहभाजन अर्थव्यवस्था का उदय और युवाओं के बीच सवारी गाडिय़ां खरीदने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते गाडिय़ों की मांग में सुस्ती जारी रहेगी। केवल इस वर्ष के लिए वाहन क्षेत्र की सुस्ती दूर करना ही काफी नहीं है।
 
सरकार के लिए इतना ही अहम मुद्दा यह है कि वित्त मंत्री की कई घोषणाओं के तीव्र एवं सहज क्रियान्वयन पर ध्यान बना रहे। राहत उपायों की घोषणा मौजूदा आर्थिक सुस्ती के नुकसान को दूर करने की शुरुआत भर है। इन घोषणाओं के जमीनी स्तर पर त्वरित क्रियान्वयन से ही तय होगा कि यह राहत पैकेज कितना असरदार होगा? मसलन, पुराने वाहनों की स्क्रैप नीति को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। अगर यह विचार विभिन्न मंत्रालयों की विरोधाभासी राय का शिकार हो जाता है तो स्क्रैप नीति लाने में देरी होगी और इच्छित सुधार अधिक दूर हो जाएगा।
 
सार्वजनिक बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए फौरन 70,000 करोड़ रुपये जारी करने के फैसले के भी क्रियान्वयन के लिए सजग तैयारी एवं योजना की जरूरत पड़ेगी। क्या अपेक्षाकृत सेहतमंद एवं बकाया कर्ज की वसूली में बढिय़ा प्रदर्शन करने वाले बैंकों को पुनर्पूंजीकरण योजना का इस्तेमाल योग्यता-आधारित तरीके से करना चाहिए? क्या इस पैकेज के साथ सार्वजनिक बैंकों के एकत्रीकरण का नया दौर भी शुरू करना चाहिए? सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों के बकाया कर्ज का एकमुश्त समाधान करने वाली योजना के संदर्भ में भी ऐसी ही सजगता की जरूरत है। बकाये का निपटान करने का असर कर्जदारों के बीच भुगतान अनुशासन पर प्रतिकूल रूप से न पड़े। आखिरकार, जालान समिति की अनुशंसाओं के मुताबिक 58,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मिलने के बाद सरकार को जेब ढीली करने के दबाव से बचना होगा। कर राजस्व में गिरावट के खतरे असली हैं, लिहाजा इस अतिरिक्त राशि का इस्तेमाल प्रोत्साहन के बजाय इस राजस्व कमी की भरपाई में करना सही होगा। 
Keyword: RBI, SBI, repo rate, loan, interest, fund, nirmala sitaraman,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या 5जी परीक्षण में चीन की कंपनियों से परहेज करना है सही कदम?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.