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अर्जेंटीना से सबक ले सरकार: कांग्रेस

अर्चिस मोहन /  August 27, 2019

कांग्रेस ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की धनराशि के हस्तांतरण के मामले में मोदी सरकार को आगाह किया है। पार्टी ने कहा कि सरकार अर्जेंटीना के 2008 से 2014 तक के अनुभव से सबक ले। उस समय इस लैटिन अमेरिकी देश की सरकार ने अपने केंद्रीय बैंक के आरक्षित कोष को इस्तेमाल कर लिया था, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था ढह गई। आरबीआई ने सोमवार को अपना 1.76 लाख करोड़ रुपये का लाभांश और अधिशेष आरक्षित कोष केंद्र को हस्तांतरित करने को मंजूरी दी थी। कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने मंगलवार को सरकार के इस फैसले को 'विनाशकारी' बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को कुछ साल पहले के अर्जेंटीना के अनुभव से सबक लेना चाहिए। उस समय अर्जेंटीना की सरकार ने देश के केंद्रीय बैंक को अपना आरक्षित कोष हस्तांतरित करने के लिए बाध्य किया था, जिसकी वजह से उसकी अर्थव्यवस्था ढह गई। उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था दिवालिया बना रही है और आर्थिक आपातकाल की तरफ धकेल रही है। वर्ष 2009 में अर्जेंटीना की तत्कालीन सरकार ने अपने केंद्रीय बैंक के प्रमुख को हटा दिया और उसके आरक्षित कोष को इस्तेमाल कर लिया। 

 
माकपा पोलितब्यूरो ने एक बयान जारी कर आरबीआई के कोष को इस्तेमाल करने के तरीके की आलोचना की। उसने देश में अपनी सभी पार्टी इकाइयों को अर्थव्यवस्था और लोगों की जीविका पर 'निर्मम प्रहार' के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने कहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी मंगलवार को ट्वीट किया कि अब प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को यह नहीं सूझ रहा है कि वे खुद पैदा की गई आर्थिक विपदा का कैसे समाधान करें। उन्होंने कहा, 'आरबीआई से चोरी करने से काम नहीं चलेगा। यह किसी अस्पताल से बैंड-एड चुराने और इसे गोली के घाव पर चिपकाने के समान है।' कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, 'आरबीआई का आकस्मिक कोष वित्तीय आपात या युद्ध जैसे हालातों के लिए है, जिसे भाजपा सरकार आर्थिक मोर्चे पर अपनी गलत नीतियों को छिपाने में कर रही है। आरबीआई ने आरबीआई की विश्वसनीयता खत्म कर दी है।'
 
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया कि आरबीआई के पूर्व गवर्नर ऊर्जित पटेल और डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने 'किले का बचाव' किया, लेकिन उन्हें इसे 'छोडऩे' के लिए बाध्य किया गया और और इस तरह 'किले में सेंध' लगा ली गई। उन्होंने ट्वीट किया, 'भारत सरकार का आरबीआई से बड़ी धनराशि हड़पना उसके ठीक विपरीत है, जो इस केंद्रीय बैंक के थिंक टैंक सीएएफआरएएल ने कहा था। राजकोष को राहत मिलेगी, लेकिन किसकी कीमत पर?' शर्मा ने मांग की कि सरकार एक सप्ताह के भीतर भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत-पत्र लेकर आए और चालू परियोजनाओं, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों में निवेश और वास्तविक फैक्टरी उत्पादन के आंकड़े जारी करे। शर्मा ने दो सप्ताह के भीतर देश के निर्यात की स्थिति, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों और कृषि क्षेत्र द्वारा लिए गए ऋणों को लेकर भी एक रिपोर्ट लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजस्व के मोर्चे पर केंद्रीय बजट और आर्थिक समीक्षा में अंतर है। उन्होंने कहा कि अब सरकार राजस्व की कमी की भरपाई आरबीआई के कोष में सेंध लगाकर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विमल जालान समिति ने भी कहा था कि यह धनराशि सरकार को 4 से 5 वर्षों में किस्तों में हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने कहा, 'इसके बजाय यह एक साथ दे दी गई। इससे बड़े आर्थिक और वित्तीय संकट की पुष्टि होती है।'
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