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आरबीआई से मिलेगी सरकार को रकम

बीएस संवाददाता /  August 27, 2019

आरबीआई ने उठाया कौन सा कदम?

 
भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2018-19 में परिचालन के जरिए अर्जित सरप्लस में से 1,23,414 करोड़ रुपये सरकार को हस्तांतरित करने का फैसला लिया है। आरबीआई का वित्त वर्ष जुलाई से जून तक चलता है। सरकार अंतरिम लाभांश के तौर पर सरकार से पहले ही 28,000 करोड़ रुपये ले चुकी है। इसके अतिरिक्त विमल जालान समिति ने 52,637 करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का सुझाव दिया है। शुद्ध आधार पर सरकार को आरबीआई से तत्काल 1,48,051 करोड़ रुपये मिलने वाले हैं।
 
क्या आरबीआई हर साल सरप्लस का हस्तांतरण करता है?
 
हां, आरबीआई ऐसा करता है। वाई एच मालेगांव की अगुआई वाली समिति के मुताबिक, आरबीआई के पास पर्याप्त पूंजी है और सरप्लस या लाभांश के तौर पर पूरी रकम उसे सरकार को हस्तांतरित करना चाहिए। पिछले पांच वर्षों में आरबीआई अपना भंडार मजबूत नहीं बनाया है, लेकिन सरकार को रकम का हस्तांतरण किया है। पिछले साल आरबीआई ने 50,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए।
 
वैश्विक स्तर पर सुस्ती में भी रिजर्व बैंक ने इतनी रकम कैसे अर्जित की?
 
इसका सही जवाब 29 अगस्त को सालाना रिपोर्ट आने के बाद मिलेगा। लेकिन इस कमाई का बड़ा हिस्सा द्वितीयक बाजार से बॉन्ड की खरीद पर अर्जित होने वाले ब्याज से मिला। व्यवस्था में नकदी झोंकने के लिए आरबीआई ने 3 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे। 
 
सरकार इस रकम का क्या करेगी?
 
यह सरकार पर निर्भर करेगा। 70,000 करोड़ रुपये बैंंक पुनर्पूंजीकरण में जा सकते हैं। कुछ रकम प्रोत्साहन से जुड़े कदमों पर खर्च हो सकती है। बॉन्ड मार्केट खुश है कि सरकार को प्रोत्साहन पैकज व बैंंक पुनर्पूंजीकरण के लिए बाजार से रकम जुटाने की खातिर अतिरिक्त बॉन्ड नहीं उतारने होंगे।
 
क्या रकम के इस हस्तांतरण से आरबीआई कमजोर होगा?
 
वास्तव में नहीं, लेकिन इससे केंद्रीय बैंंक का वित्तीय लचीलापन प्रभावित होगा। लाभांश का हस्तांतरण विवादास्पद मसला है क्योंंकि आरबीआई जो भी अर्जित करता है, उसे हस्तांतरित कर देता है। 2018-19 में आरबीआई की कमाई ज्यादा रही, लिहाजा हस्तांतरण भी ज्यादा हुआ। जहां तक जालान समिति की सिफारिशोंं का प्रश्न है, 52,637 करोड़ रुपये का हस्तांतरण विश्लेषकों की उम्मीद से काफी कम है। वास्तव में आरबीआई अभी भी दुनिया भर में सबसे मजबूत केंंद्रीय बैंकों में से एक है।
 
आकस्मिक निधि और पुनर्मूल्यांकन रिजर्व कितना है?
 
जून 2018 में आकस्मिक निधि 2.3 लाख करोड़ रुपये की थी और पुनर्मूल्यांकन रिजर्व 6.9 लाख करोड़ रुपये की।
 
पुनर्मूल्यांकन रिजर्व से रकम का हस्तांतरण क्यों नहीं होता?
 
आरबीआई उस रकम का हस्तांतरण नहीं कर सकता, जिसे उसने अर्जित न किया हो बल्कि निवेश के पुनर्मूल्यांकन के जरिए उसमें इजाफा हुआ हो। यह अवास्तविक रिजर्व है। दूसरी ओर, आकस्मिक निधि वास्तविक रिजर्व है जिसे आरबीआई ने अच्छे दिनों में अपनी आय से तैयार किया। 
 
यह हस्तांतरण कैसे होगा?
 
यह वास्तव में खाते में प्रविष्टि है। दिल्ली से मुंबई नकदी नहीं जाएगी। आरबीआई सरकार का बैंक है। वह सरकार की नकदी का प्रबंधन करता है। ऐसे में आरबीआई के खाते से रकम डेबिट कर सरकार के खाते में क्रेडिट कर दी जाएगी।
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