बिजनेस स्टैंडर्ड - राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में आसानी
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राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में आसानी

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली 08 27, 2019

अर्थव्‍यवस्‍था

बिजनेस स्टैंडर्ड राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में आसानीकेंद्र सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये स्थानांतरित करने के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्णय से वर्ष 2019-20 के लिए केंद्र का सकल कर राजस्व लक्ष्य 1 लाख करोड़ रुपये तक घटेगा। आरबीआई बोर्ड ने सोमवार को जालान समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया। इससे जीडीपी के 3 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा लक्ष्य आसानी से हासिल होने योग्य रह जाएगा, क्योंकि कर राजस्व (सकल) में अब वित्त वर्ष के शेष हिस्से में 16 प्रतिशत की वृद्धि की जरूरत होगी।

आरबीआई द्वारा यह रकम स्थानांतरित नहीं किए जाने की स्थिति में केंद्र को पूर्ववर्ती वर्ष की तुलना में सकल कर राजस्व में 22 प्रतिशत की वृद्धि करने की जरूरत होती। इसकी वजह यह है कि आरबीआई द्वारा पूंजी स्थानांतरण चालू वित्त वर्ष में केंद्र की झोली में 58,000 करोड़ रुपये जोडऩे में सक्षम बनाएगा। यदि स्थानांतरण रकम केंद्रीय बजट के अनुमानों के अनुरूप रहती तो केंद्र को स्वयं के लिए 58,000 करोड़ रुपये के प्रबंधन के प्रयास में करों के तौर पर 1 लाख करोड़ रुपये जुटाने की जरूरत होती, क्योंकि 14वें वित्त आयोग के फॉर्मूले के तहत 42,000 करोड़ रुपये (42 प्रतिशत) राज्यों की झोली में जाएंगे।  

हालांकि राज्य इस प्रक्रिया में कर राजस्व में सामाजिक रूप से 42,000 करोड़ रुपये का हिस्सा गंवा सकते हैं। एक वरिष्ठï सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'आरबीआई द्वारा दिए जाने वाले प्रत्येक अतिरिक्त रुपये से केंद्र सरकार की कर जरूरत 1.72 रुपये तक घटती है, क्योंकि 42 प्रतिशत कर राजस्व राज्यों को जाता है, जबकि आरबीआई द्वारा स्थानांतरित पूरी अधिशेष रकम केंद्र के लिए होती है।'

आरबीआई के बोर्ड ने जुलाई-जून 2018-19 के लिए केंद्र सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त मुनाफे और पूंजी भंडार स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय केंद्रीय बैंक में पूर्व गवर्नर बिमल जालान के नेतृत्व में आर्थिक पूंजी ढांचे पर गठित समिति की सिफारिशों पर आधारित है। अंतरिम लाभांश के तौर पर पूर्ववर्ती वित्त वर्ष में 28,000 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए जाने के साथ केंद्र को 2019-20 में 1.48 लाख करोड़ रुपये की रकम मिल जाएगी।

चूंकि जुलाई में पेश बजट में आरबीआई से 90,000 करोड़ रुपये के लाभांश तय किया गया था, इसलिए ताजा निर्णय से सरकार को चालू वित्त वर्ष में 58,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। यह खासकर केंद्र के लिए होगा, जिससे उसे राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूर्ववर्ती वर्ष के सकल कर राजस्व के मुकाबले 18 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया था। अब तक प्रत्यक्ष कर संग्रह 5.7 प्रतिशत तक (15 अगस्त तक) बढ़ा है और जीएसटी संग्रह में जुलाई तक 6.8 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया। शुरुआती महीनों में इस धीमी वृद्घि को देखते हुए शेष 9 महीनों (जुलाई-मार्च) में कर राजस्व में 22 प्रतिशत की वृद्घि की जरूरत थी। आरबीआई से रकम की पेशकश के बाद अब जरूरी वृद्घि घटकर 16 प्रतिशत रह गई है। 
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