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इक्विटी एनएफओ में बढ़ रहा निवेश

जश कृपलानी / मुंबई August 26, 2019

निवेशकों का न्यू फंड ऑफरिंग यानी एनएफओ में निवेश के प्रति रुझान अब बढऩे लगा है। अप्रैल 2019 से जुलाई 2019 के बीच बाजार में उतारे गए 11 इक्विटी एनएफओ के जरिये 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आकर्षित हुए। हालांकि अग्रिम कमीशन के प्रावधान को हटाये जाने के बाद इसमें भारी गिरावट की आशंका जताई गई थी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार में तेजी से इक्विटी एनएफओ में निवेश को बल मिल सकता है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के एक विश्लेषण से पता चलता है कि अप्रैल 2019 और जुलाई 2019 के बीच औसत एनएफओ संग्रह 377 करोड़ रुपये रहा जो पिछले चार महीनों के दौरान हुए औसत संग्रह के मुकाबले दोगुना से भी अधिक है। जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले औसत संग्रह में 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
 
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, चतुर निवेशक हाल में जारी किए गए एनएफओ में निवेश कर रहे हैं। मिरे एएमसी के मुख्य कार्याधिकारी स्वरूप मोहंती ने कहा, 'हमें एनएफओ में दमदार निवेश को देखना अभी बाकी है लेकिन सूझबूझ वाले निवेशकइसमें निवेश कर रहे हैं क्योंकि वे समझते हैं कि बाजार में गिरावट का दौर खरीदारी के लिए अच्छी संभावनाओं को लेकर आता है।' जुलाई में पांच एनएफओ के जरिये 1,927 करोड़ रुपये जुटाए गए। इनमें मिरे ऐसेट मिडकैप फंड, कोटक फोकस्ड इक्विटी फंड, बिड़ला सन लाइफ फार्मा ऐंड हेल्थकेयर फंड और क्वांटम इंडिया ईएसजी इक्विटी फंड शामिल हैं। हालांकि यह पिछले साल जुलाई से अक्टूबर के बीच इसके जरिये जुटाई गई रकम के मुकाबले काफी कम है। उस दौरान औसत संग्रह 569 करोड़ रुपये रहा था।
 
मोहंती ने कहा, 'शेयर बाजार में दमदार बढ़त होने से एनएफओ में निवेश की रफ्तार बढ़ सकती है क्योंकि इससे निवेशक धारणा में सुधार होगा।' सोमवार को बीएसई का बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स दो फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। पिछले सप्ताह सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों पर कर अधिभार हटाने और घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कई उपायों की घोषणा की थी जिससे बाजार को बल मिला। सलाहकारों का कहना है कि कुछ निवेशक नए फंडों में निवेश कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बाजार में गिरावट के समय तैयार किए गए ताजा पोर्टफोलियो में गिरावट की कम गुंजाइश होगी। वित्तीय सलाहकार फर्म प्लान रुपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक अमोल जोशी ने कहा, 'एनएफओ के बाद फंड मैनेजर को आमतौर पर प्रक्रिया पूरी करने में एक से तीन महीने का समय लगता है। निवेशकों को लगता है कि फंड मैनेजर इन फंडों में कहीं अधिक प्रभावी तरीके से निवेश कर सके हैं खासकर मिडकैप एवं स्मॉलकैप के मोर्चे पर क्योंकि इन शेयरों की खरीद-फरोख्त पिछली ऊंचाई के मुकाबले भारी छूट के साथ की जाती है।'
 
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अग्रिम कमीशन के प्रावधान हटाए जाने के बाद नए नियामकीय व्यवस्था के तहत अधिक वितरकों के लिए अधिक कमीशन के प्रावधान से एनएफओ में निवेश कहीं अधिक सुगम हो गया है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पिछले साल सितंबर में योजना के आकार और कुल खर्च अनुपात (टीईआर) को लिंक किया था जिसमें कमीशन भुगतान और फंड प्रबंधन शुल्क भी शामिल थे। नए नियमों के तहत अधिक टीईआर के साथ छोटी योजनाओं को प्रोत्साहित किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे एनएफओ को भी फायदा होगा।
Keyword: equity, PE, MF, market,
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