बिजनेस स्टैंडर्ड - इलेक्ट्रिक कार की सवारी...क्या वाकई है समझदारी?
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इलेक्ट्रिक कार की सवारी...क्या वाकई है समझदारी?

संजय कुमार सिंह /  August 25, 2019

हाल में कारों की बिक्री को कई अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। अर्थव्यवस्था में मंदी के अलावा अप्रैल, 2020 से बीएस-6 नियम लागू होने और हाल में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिए जाने से संभावित ग्राहक भ्रमित और आशंकित हैं। हाल में ये संकेत मिल रहे हैं कि सरकार वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए भविष्य में पेट्रोल-डीजल इंजन वाले वाहनों को लेकर सख्त रुख अपना सकती है। ऐसे में संभावित ग्राहक यह जानना चाहते हैं कि उनके लिए इलेक्ट्रिक कार खरीदना बेहतर होगा या बीएस-6 कार। 

 
पर्यावरण को फायदा 
 
इस समय इलेक्ट्रिक कार खरीदने वाले ज्यादातर लोग पर्यावरण को लेकर ज्यादा सजग हैं। वाहन से संबंधित सूचनाएं मुहैया कराने वाली वैश्विक कंपनी जाटो डायानामिक्स इंडिया के अध्यक्ष रवि भाटिया ने कहा, 'आप इलेक्ट्रिक कार खरीदकर लोगों को यह संदेश दे सकते हैं कि आप पर्यावरण संरक्षक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिक हैं।' इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाने का खर्च भी कम है। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर और लीडर (वाहन) कवन मुख्त्यार ने कहा, 'यह पेट्रोल-डीजल इंजन वाले वाहनों को चलाने के खर्च का महज 20 से 25 फीसदी है।' अमेरिका के डेट्रॉयट शहर की वाहन सलाहकार कंपनी अर्बन साइंस के प्रबंध निदेशक अमित कौशिक ने कहा, 'इसमें सर्विस और इंजन ऑयल बदलवाने जैसे खर्च भी नहीं आते हैं।' इलेक्ट्रिकर कारों में आवाज भी नहीं आती है, इसलिए इन्हें चलाना ज्यादा आनंददायी होता है।  
 
खरीद लागत अधिक 
 
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय केवल आर्थिक आधार पर इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद को तर्कसंगत साबित करना मुश्किल है क्योंकि शुरुआती खरीद कीमत अधिक होती है। इस समय घरेलू विनिर्माता कंपनियों के इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत 10 लाख रुपये से अधिक है। मुख्तयार ने कहा, 'कम से कम अगले तीन वर्षों तक इलेक्ट्रिक कारों की कीमत पेट्रोल-डीजल इंजन वाले वाहनों की तुलना में अधिक रहेगी।' इस समय चार्जिंग स्टेशन भी बहुतायत में नहीं हैं। शहरों में निजी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना में जगह की कमी एक बड़ी बाधा है। भाटिया ने कहा, 'अगर आप किसी बंगल में रहते हैं और आपके पास अपना गैराज है तो आप खुद का चार्जिंग बुनियादीढांचा तैयार कर सकते हैं। लेकिन किसी हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले व्यक्ति के लिए ऐसा करना मुश्किल हो सकती है।' 
 
चार्जिंग की रफ्तार भी एक समस्या है। अमूमन लोगों के पास घरों में धीमे चार्जर होते हैं, जो बैटरी को पूरी तरह चार्ज करने में करीब 8 से 12 घंटे ले सकते हैं। यह उस वाहन पर निर्भर करता है। फास्ट चार्जर की काफी अधिक लागत आती है, इसलिए इन्हें केवल सार्वजनिक स्थानों पर ही लगाया जा सकता है। फास्ट चार्जर बैटरी को महज कुछ घंटों या उससे भी कम समय में चार्ज कर देता है। लेकिन जैसे-जैसे बैटरी पुरानी होती जाती है, वैसे वैसे चार्जिंग में लगने वाला समय भी बढ़ता जाता है। इसके विपरीत पेट्रोल-डीजल वाहनों में ईंधन भरवाने में महज कुछ मिनट लगते हैं। 
 
इलेक्ट्रिक वाहन एक बार चार्ज के बाद निश्चित दूरी ही तय कर सकते हैं। भारत में बिकने वाली ज्यादातर कार एक बार चार्जिंग के बाद करीब 100 से 140 किलोमीटर चल पाती हैं। हालांकि हुंडई कोना इसका एक अपवाद है, जो एक बार चार्जिंग के बाद 450 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। पुराने इलेक्ट्रिक वाहनों को बेचना भी एक चुनौती है क्योंकि इन्हें खरीदने के इच्छुक लोगों की संख्या सीमित होती है। मुख्त्यार ने कहा, 'ग्राहकों इन वाहनों के पुराने होने के बाद बेचने पर मिलने वाली रकम को लेकर भी फिक्रमंद होते हैं।'
 
सीमित विकल्प 
 
इस क्षेत्र में व्यक्तिगत आवागमन के वाहनों की संख्या अभी दो अंकों में भी नहीं पहुंची है। कवन ने कहा, 'अगले तीन वर्षों में करीब 20 से 30 मॉडल शुरू होने के आसार हैं।' अगर आप पेट्रोल-डीजल इंजन वाली कार खरीदना चाहते हैं तो आपको चुनने के लिए कई सौ मॉडल मिल जाएंगे। कौशिक ने कहा कि भारत में अभी ऐसी इलेक्ट्रिक कार नहीं हैं, जिनके ट्रैक रिकॉर्ड के पुख्ता सबूत हैं। अगर वाहन का मालिक बहुत अधिक डिस्चार्ज नहीं करता है तो इन कारों की बैटरी 7-8 साल चलती हैं। वहीं बैटरी को बदलवाने पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। 
 
शर्मा ने कहा, 'आम तौर पर इन बैटरियों की लागत वाहन की लागत की आधी होती है। हालांकि अब यह धीरे-धीरे नीचे आ रही है। लेकिन अगर यह हर साल 5 फीसदी की दर से भी घटती है तो माना कि पांच साल बाद बैटरी को बदलवाने की लागत काफी अधिक आएगी।' एक अन्य अड़चन ग्राहक के आसपास वर्कशॉपों की संख्या है, जिसके पास इस काम को करने की काबिलियत होनी चाहिए। 
 
बीएस-6 वाहन खरीदें 
 
एक अप्रैल 2020 से बिकने वाले सभी वाहनों को बीएस-6 उत्सर्जन नियमों का पालन करना होगा। ये वाहन बहुत कम प्रदूषण फैलाएंगे, लेकिन उनकी लागत अधिक आ सकती है। इसकी वजह यह है कि वाहन कंपनियों पर बीएस-4 इंजनों की जगह बीएस-6 इंजन का उत्पादन शुरू करने की लागत आएगी। हालांकि गैर-बीएस 6  वाहनों को भी चलने की मंजूूरी होगी। एक अप्रैल की डेडलाइन के आसपास बहुत से विनिर्माता अपने पुराने स्टॉक पर आकर्षक छूट दे सकते हैं। भाटिया ने कहा, 'गैर-बीएस 6 वाहनों को खरीदने में जोखिम यह है कि जब आप कुछ साल बाद उन्हें बेचना चाहेंगे तो ग्राहक मिलना मुश्किल हो सकता है। सरकार इन वाहनों को चलाने की लागत में भी बढ़ोतरी कर सकती है। वह इनकी जांच के लिए कड़े नियम लागू कर सकती है।' कौशिक ने कहा कि गैर बीएस-6 वाहनों के पुराने होने के बाद अच्छी कीमत नहीं मिलने की आशंका है। 
 
आपको कैसे चयन करना चाहिए? पर्यावरण को लेकर जागरूक चालकों, वाहन का भरपूर इस्तेमाल करने वाले लोग और जो महानगरों में रहते हैं और कार को केवल शहर के भीतर ही चलाना चाहते हैं, वे इलेक्ट्रिक वाहन का विकल्प चुन सकते हैं। हाल के बजट में इन वाहनों को खरीदने पर लिए जाने वाले ऋण पर 1.5 लाख रुपये की कर कटौती दी गई है, जो एक अतिरिक्त प्रोत्साहन है।  हालांकि चार्जिंग के बुनियादी ढांचे का मतलब है कि इन कारों में से ज्यादातर को शहर के बाहर ले जाना बहुत मुश्किल होगा। ग्रामीण इलाकों में बिजली की नियमित आपूर्ति भी एक समस्या है। जो लोग कार खरीदने पर शुरुआत में ज्यादा पूंजी नहीं खर्च करना चाहते हैं, उनके लिए आईसीई इंजन चालित कार बेहतर विकल्प है। 
Keyword: vehicle, car, electric, petrol, diesel, BS-6,
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