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आयकर रिटर्न गलत तो सीए का जिम्मा नहीं

तिनेश भसीन /  August 25, 2019

माना कि आप इस साल आयकर रिटर्न भरने के लिए किसी ऑनलाइन तकनीकी प्लेटफॉर्म की सेवाएं लेते हैं। लेकिन यह प्लेटफॉर्म रिटर्न में कोई गलती कर देता है, जो रिटर्न भरते समय आपके पकड़ में भी नहीं आती है। इसके बाद आयकर विभाग आपको एक नोटिस भेजता है। नोटिस में कहा जाता है कि आपने वास्तविक आय से कम आमदनी दिखाई है। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि इस गलती के लिए कौन जिम्मेदार होगा? यह हमेशा करदाता की जिम्मेदारी होती है, भले ही गलती प्लेटफॉर्म के स्तर पर हो। प्राइसवाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) इंडिया में पार्टनर और लीडर (पर्सनल टैक्स) कुलदीप कुमार ने कहा, 'भले ही आप कर के विशेषज्ञ नहीं हैं और आपको इस काम में किसी सेवा प्रदाता की जरूरत है। लेकिन अगर इसमें गलती होती है तो जिम्मेदार आपको ही माना जाएगा। कर अधिकारी आपको एक नोटिस जारी करेंगे और जुर्माना लगाएंगे।' कर विशेषज्ञों के मुताबिक आम तौर पर ऐसे मामलों में आकलन अधिकारी (एओ) कर की मांग निकाल सकते हैं और आमदनी कम दिखाने के लिए जुर्माने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। करदाता को यह लंबी लड़ाई लडऩी पड़ेगी। हालांकि कुछ मामलों में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरणों (आईटीएटी) में फैसले करदाताओं के पक्ष में आए हैं। 

 
एक मामले में ऑनलाइन कर भरने वाले प्लेटफॉर्म ने आंकड़े प्रविष्ट करने में गलती कर दी। आकलन अधिकारी ने करदाता को जिम्मेदार ठहराया क्योंकि उसने सत्यापन किया था और उसने नोटिस नहीं मिलने तक अपनी मर्जी से 4.56 लाख रुपये का रिफंड वापस नहीं किया था। ऐसे में अधिकारी ने जुर्माने की प्रक्रिया शुरू कर दी। लेकिन महिला करदाता ने कहा कि वह गर्भवती थी और उस पर काम का दबाव था। इसके अलावा उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भरोसा किया। इसलिए उसने अपने रिटर्न के सत्यापन से पहले ब्योरों की जांच नहीं की। यह मामला न्यायाधिकरण में पहुंच गया। न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि उसने पाया है कि करदाता ने जानबूझकर ऐसा नहीं किया है और इसलिए जुर्माना खत्म कर दिया गया। करदाता को कर विभाग या न्यायाधिकरण से राहत मिलना मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है। 
 
अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक अरविंद राव ने कहा, 'कुछ मामलों में भूलवश होने वाली गलती को माफ कर दिया जाता है, लेकिन तथ्यात्मक गलतियों के लिए माफी नहीं मिलती है।' अगर प्लेटफॉर्म के स्तर पर गलती है तो इसे आम तौर पर साबित करना आसान होता है। एक मामले का उदाहरण लें। इसमें करदाता की आमदनी 12 लाख रुपये थी, लेकिन कर देनदारी की गणना करने वाले व्यक्ति ने एक शून्य छोड़ दी। इससे आय केवल 1.2 लाख रुपये रह गई। हालांकि करदाता के पास रिटर्न के सत्यापन से पहले उसे नहीं जांचने की वाजिब वजह होनी चाहिए। अगर रिटर्न में तथ्यात्मक गलतियां हैं, जिसमें करदाता निश्चित कर योग्य आय को शामिल करना भूल जाता है तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों ने खुद को कर पेशेवर बताकर करदाता को भारी रिफंड के दावे कर गलत रिटर्न भर दिए। यह काम आमदनी कम दिखाकर या उन कटौतियों या छूटों का दावा करके किया जाता है, जिनके लिए करदाता पात्र नहीं होता है। ऐसेे मामलों में भी पूरी जिम्मेदारी करदाता की होती है। 
 
ऐसी गलतियों से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या सीए द्वारा तैयार किए जाने वाले रिटर्न को ठीक से जांचा जाना चाहिए। रिटर्न भरने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका फॉर्म 26एएस आपके रिटर्न से मेल खाता है। इस बात का भी खयाल रखें कि रिटर्न में वह आमदनी भी दिखाई जानी चाहिए, जिस पर छूट मिली हुई है। उदाहरण के लिए सार्वजनिक भविष्य निधि खाते पर ब्याज और म्युचुअल फंडों से प्राप्त लाभांश। अगर आपको रिटर्न भरने के बाद भी किसी गलती का पता चले तो आप इसे अगले कैलेंडर वर्ष के 31 मार्च तक संशोधित कर सकते हैं।  अगर आप इस अंतिम तिथि तक भी रिटर्न में संशोधन करने में चूक गए हैं तो आप स्वैच्छिक रूप से उस आय पर कर दे सकते हैं, जिसे आपने रिटर्न में नहीं दिखाया था या वह रिफंड वापस कर सकते हैं, जो आपको किसी गलत प्रविष्टि की वजह से मिला है। इससे आपको यह दिखाने में मदद मिलेगी कि आपका मामला सही है। 
Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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