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बैंक ऋण देने को तैयार, लेकिन पहले करना चाहते हैं पूरी पड़ताल

नम्रता आचार्य, सोमेश झा और अनूप रॉय / कोलकाता/नई दिल्ली/मुंबई August 25, 2019

सरकार से 70,000 करोड़ रुपये मिलने की घोषणा से बैंक एक बार फिर पहले की तरह उधारी देने की प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं। हालांकि परेशानी इस बात को लेकर है कि परिस्थितियां अब बदल गई हैं और कंपनियां पहले के मुकाबले खासी सतर्क हो गई हैं। नई पूंजी आने से बैंकिंग तंत्र में 5 लाख करोड़ रुपये तक की तरलता बहाल हो जाएगी। हालांकि इस रकम के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल बैंक अपनी प्रमुख पूंजी और फंसे ऋणों के एवज में प्रावधानों का पालन करने में इस्तेमाल करेंगे। वाहन क्षेत्र बैंकों से तत्काल पूंजी लेने की हड़बड़ी दिखा सकते हैं। सरकार ने मुश्किल में चल रहे इस क्षेत्र को पटरी पर लाने के लिए कई प्रोत्साहन देने की घोषणा की है। बैंकरों को लग रहा है कि वाहन क्षेत्र के लिए प्रोत्साहनों की घोषणा और सरकार द्वारा बकाया रकम के जल्द से जल्द भुगतान के वादे के बाद कंपनियां एक बार फिर अपना नजरिया बदलने की पहल कर सकती हैं। हालांकि वाहन क्षेत्र से इतर दूसरे खंडों की कंपनियों के मामले में इतनी जल्दी सब कुछ ठीक होता नहीं दिखाई दे रहा है। 

 
सिंडिकेट बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी मृत्युंजय महापात्र ने कहा, 'अर्थव्यवस्था में मांग की हालत खस्ता है। इससे निपटने के दो रास्ते नजर आ रही है। पहला रास्ता यह हो सकता है कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाई जाएं, जिनसे अधिक से अधिक संख्या में लोग बैंकों की ओर रुख करें। एक दूसरी परिस्थिति यह हो सकती है, जिसमें नकदी पर्याप्त है, ब्याज दर भी कम है और उधारी लागत भी कम है। सरकार इस विकल्प पर जोर देती दिख रही है।' सरकार ने अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने कके लिए शुक्रवार को विभिन्न उपायों की घोषणाएं की हैं। 
 
उन्होंने कहा,'बैंकों को ऋण आवंटन के लिए 70,000 करोड़ रुपये देने से कस्बाई एवं ग्रामीण क्षेत्रों में गतिविधियों में तेजी आएगी। इन क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ऋण आवंटन में हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है।' बड़े आकार के कर्ज विभिन्न कारकों पर निर्भर करते हैं, लेकिन अब प्रोत्साहनों की घोषणा से मनोबल जरूर बढ़ेगा। इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के मुख्य कार्याधिकारी वी जी कन्नन कते हैं, 'सरकार की घोषणाओं से हताशा का वातावरण तो जरूर दूर होगा। सबसे पहले वाहन क्षेत्र से ऋण की मांग आनी चाहिए, जिसके बाद इसके सहायक क्षेत्र भी गतिविधियां दिखा सकते हैं। धीरो-धीरे कार्यशील पूंजी बढऩी चाहिए और परियोजनाओं में भी तेजी आनी चाहिए।'
 
कन्नन के अनुसार ढांचागत खंड में खासकर सड़क क्षेत्र को मदद मिलनी चाहिए और बकाया रकम चरणबद्ध तरीके से भुगतान करने के सरकार के वादे के बाद ऋण की मांग भी बढऩी चाहिए। 2 अगस्त को समाप्त हुए पखवाड़े में ऋण आवंटन सालाना आधार पर 12.2 प्रतिशत दर से बढ़ी। जून की समाप्ति पर ढांचागत क्षेत्र को ऋण आवंटन 6.4 प्रतिशत दर से बढ़ा, जिसकी रफ्तार जून 2018 में 0.9 प्रतिशत रही थी। इस उद्योग के भीतर ढांचागत, रसायन एवं रसायन उत्पादों, वाहनों, वाहन पुर्जे एवं परिवहन उपकरण, सीमेंट एवं सीमेंट उत्पाद और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को ऋण आवंटन की दर में तेजी आई। हालांकि आधार धातु एवं धातु उत्पादों, परिधान, खाद्य प्रसंस्करण और निर्माण क्षेत्रों को हुए आवंटन में कमी देखी गई। 
 
बैंक अपनी उधारी दर को रीपो रेट से जोड़ रहे हैं, जिससे उधारी दरों में कमी आनी चाहिए, लेकिन इसका सबसे अधिक असर खुदरा खंड पर होगा। सभी बैंक अपने मौजूदा आवास एवं वाहन ऋण रीपो दर से जोड़ रहे हैं, जिससे मौजूद दर के मुकाबले 35 से 40 प्रतिशत आधार अंक का अतिरिक्त फायदा होगा। कंपनियों को आवंटित ऋणों के मुकाबले ये सस्ते होते हैं। अगर बैंक रीपो रेट से जुड़े कर्ज कंपनियों को दें तो इससे उनका मुनाफा काफी प्रभावी होगा। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी अशोक कुमार प्रधान इस बात से सहमत हैं कि रीपो रेट से जुड़ी कर्ज योजनाएं टिकाऊ बनाए रखने के लिए देर-सबेर जमा दरें भी रीपो रेट से जोडऩी होंगी। प्रधान ने कहा, 'आदर्श रूप में बैंकिंग क्षेत्र का शुद्ध ब्याज मार्जिन करीब 3 प्रतिशत रहना चाहिए, जबकि भारतीय बैंकिंग जगत में यह 2.50 प्रतिशत है। बैंकों को जमा दरें रीपो रेट के साथ जोडऩे पर निर्णय लेना होगा नहीं तो उनकी आय प्रभावित होगी।'
 
पंजाब एवं सिंध बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी एस हरिशंकर का कहना है कि यह प्रक्रिया तेजी से पूरी करने के लिए हमें भविष्य में एक पूरी तरह बाहरी मानक से जुड़ी जमा दर की ओर बढऩा पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि फिलहाल इस मोर्चे पर चुनौतियां दिख रही हैं। यूको बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी ए के गोयल ने कहा, 'बैंकों को पूंजी मिलने से अब कर्ज आवंटन में तेजी आएगी, खासकर उन बैंकों को ऐसा करने में आसानी होगी जो मुश्किलें झल रहे थे।' महापात्र ने माना कि रीपो रेट से जुडीं ऋण योजनाओं के कारण बैंकों के मुनाफे पर थोड़ा असर जरूर होगा, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि आखिर आर्थिक विकास को तेजी देने की जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है। महापात्र ने कहा, 'सरकार के इस कदम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर शुद्ध ब्याज मार्जिन सालाना 15-20 आधार अंक प्रभावित हो सकता है।'
 
बैंकरों ने यह भी कहा कि सरकार ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ऋणों के लिए जो उपाय किए हैं, उनसे इस क्षेत्र को बहुत अधिक मदद नहीं मिलेगी, लेकिन इतना जरूर होगा कि एनबीएफसी को ऋण देने के मामले में बैंकरों को किसी बात के लिए नहीं कोसा जाएगा। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने शुक्रवार को सरकार की घोषणाओं का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि सरकार ने बैंकों को बिना किसी डर के ऋण आवंटन संबंधी निर्णय लेने का अधिकार दिया है, जो स्वागत योग्य कदम है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा था कि किसी बैंक की आंतरिक समिति इस बात का निर्णय लेगी कि किस मामले की जांच करानी चाहिए और कौन से कारोबारी निर्णय  गलत साबित हुए।  
 
हालांकि वित्तीय एवं रियल एस्टेट ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें लेकर बैंक वास्तव में सहज नहीं हैं। एक वरिष्ठ बैंकर के अनुसार जो भी व्यक्ति या इकाई बैंक की शर्तों को पूरा करेगा उसे ऋण दिया जाएगा। एक वरिष्ठ बैंकर ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया, 'रियल एस्टेट कंपनियां बुनियादी शर्तें पूरी करती नहीं दिख रही हैं। उनका बहीखाता खस्ताहाल है, मंजूरी मिलने  आदि से जुड़ी प्रक्रिया हमेशा पुख्ता नहीं होती हैं और ज्यादातर कंपनियों के कर्ज चिंताजनक स्तर पर हैं। जब तक सरकार हमें विशेष रूप से इस खंड को ऋण देने के लिए नहीं कहेगी तब तक हम आदर्श रूप में ऐसा नहीं करना चाहेंगे।'
 
हालांकि इस बैंकर ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र को कर्ज देने के लिए बैंकों के पास अब भी खासे विकल्प हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र पर फिलहाल 2 लाख करोड़ रुपये कर्ज बकाया है, लेकिन इनमें 5 प्रतिशत से भी कम दर से इजाफा हो रहा है। इस वजह से रियल एस्टेट क्षेत्र पूंजी के लिए तेजी से एनबीएफसी और निजी इक्विटी फंडों पर निर्भर हो रहा है। विनिर्माता तेजी से मकान नहीं बेच पा रहे हैं, जिनसे वे कर्ज का भुगतान भी नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) आवास वित्त कंपनियों को पूंजी आवंटन बढ़ाकर इन्हें संकट से उबार सकते हैं। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टैंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी कहते हैं, 'मकान, वाहन और उपभोग से जुड़ी वस्तुएं खरीदने के लिए अधिक नकदी का प्रावधान करने का निर्णय स्वागत योग्य कदम है। इस कदम से आवास वित्त कंपनियों को अतिरिक्त 20,000 करोड़ रुपये नकदी मिलेगी और एनएचबी द्वारा नकदी की कमी झेल रहे विनिर्माताओं को भी उधारी देने में तेजी आएगी। कई विनिर्माता नकदी की कमी से फंसी या रुकी अपनी परियोजनाएं अब पूरी कर पाएंगे। इससे उनके खरीदार को भी सीधा फायदा होगा।'
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA,,
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