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डेवलपरों को सस्ते ऋण सरल नियमों की आस

राघवेंद्र कामत और विनय उमरजी / मुंबई August 25, 2019

वित्त मंत्री मकान खरीदारों और प्रॉपर्टी कंपनियों के लिए अगले सप्ताह कुछ राहत की घोषणा करने जा रही हैं। जबकि बड़े रियल एस्टेट डेवलपरों ने इस क्षेत्र के लिए आसान ऋण एवं सरल नियमों की उम्मीद जताई है। पिछले कुछ वर्षों से कमजोर बिक्री की समस्या से जूझ रहे डेवलपरों को भी रेरा और जीएसटी जैसे नए नियमों का सामना करना पड़ा है जिनका उद्देश्य इस क्षेत्र को सुचारु करना और कर प्रणाली को सरल बनाना था। हालांकि मुंबई जैसे शहरों में अनबिके मकानों की इनवेंटरी कुल प्रॉपर्टी स्टॉक के करीब 50 फीसदी तक पहुंच चुकी थी। पिछले साल अगस्त में आईएलऐंडएफएस के डिफॉल्ट के बाद गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने उधारी देना बंद कर दिया था जिससे प्रॉपर्टी डेवलपरों को गंभीर नकदी किल्लत से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में नकदी की उपलब्धता कम हो गई और ब्याज दरों में इजाफा हुआ।
 
डेवलपरों ने उम्मीद जताई है कि अगले सप्ताह वित्त मंत्री द्वारा की जाने वाली घोषणाओं से थोड़ी राहत मिलेगी। डीएलएफ के मुख्य कार्याधिकारी राजीव तलवार ने कहा कि सस्ती आवासीय परियोजनाओं के लिए ऋण के भारांश को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के ऋण के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। रियल एस्टेट क्षेत्र के ऋण से जुड़े भारांश 100 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। तलवार ने कहा, 'बैंकों को प्रीमियम, मंजूरी लागत एवं निर्माण लागत आदि रियल एस्टेट परियोजनाओं के सभी घटकों को ऋण उपलब्ध कराना चाहिए।' उन्होंने कहा कि यदि कोई चारा न हो तो डेवलपरों को नैशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड के जरिये ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है।  हीरानंदानी कम्युनिटीज के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा, 'दबावग्रस्त परिसंपत्तियों को पूरा होने के लिए रकम की जरूरत है। रकम की कुछ व्यवस्था होनी चाहिए जिसका इस्तेमाल परियोजनाओं को पूरा करने में किया जा सकता है।'
 
हीरानंदानी ने कहा कि यदि परियोजनाएं पूरी होती हैं तो खरीदारों को भी उनके अपार्टमेंटों की डिलिवरी होगी। उन्होंने कहा कि सस्ते आवास के लिए 45 लाख रुपये की सीमा पर्याप्त नहीं है और इसका फायदा अधिक खरीदारों को नहीं मिल पाता है। बेंगलूरु की रियल एस्टेट कंपनी शोभा के वाइस चेयरमैन जेसी शर्मा ने कहा कि सस्ते आवास की परिभाषा को सरल और एक समान बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'फिलहाल सस्ते आवास की कई परिभाषाएं हैं कि मकान का मूल्य 45 लाख रुपये और आकार 60 मीटर होने चाहिए। इसे सरल बनाने की जरूरत है।'
 
शर्मा ने कहा कि आवासी परियोजनाओं के लिए जीएसटी दरों में भी एकरूपता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'अच्छी बात यह है कि सरकार मौजूदा समस्याओं को समझती है और उन्हें दूर करने के लिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है।' अरविंद स्मार्टस्पेसेज के एमडी एवं सीईओ कमल सिंघल ने कहा कि सरकार को कुछ कच्चे माल पर जीएसटी दर में कटौती करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'एक प्रमुख कच्चा माल है सीमेंट जिसके लिए जीएसटी दर काफी ऊंची है और इसे घटाकर 5 फीसदी तक लाने की जरूरत है। सीमेंट के अलावा अन्य कच्चे माल पर भी जीएसटी दरों को घटाकर करीब 12 फीसदी तक लाने की जरूरत है। चूंकि अब कोई ऋण उपलब्ध नहीं है, इसलिए जीएसटी का पूरा बोझ उत्पादन लागत को बढ़ा रहा है।' इसके अलावा उनकी नजर किराये पर जीएसटी पर भी है। सिंघल ने कहा, 'यदि पट्टेदारी की समस्याओं को दूर करना है तो पट्टा किराया पर 18 फीसदी जीएसटी काफी अधिक है जिसे कम करने की जरूरत है।'
Keyword: real estate, property, GST,,
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