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दूरसंचार क्षेत्र में अब बड़ा पूंजी खर्च होगा कम

सोहिनी दास / मुंबई August 25, 2019

भारतीय दूरसंचार कंपनियों में बड़े निवेश का चक्र पूरा हो चुका है और आने वाले समय में पूंजीगत खर्च की तीव्रता कम रहेगी। यह मानना है दूरसंचार क्षेत्र पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का। रिलायंस जियो पहले ही संकेत दे चुकी है कि बड़े निवेश का चक्र पूरा हो चुका है और कंपनी अब अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए मोटे तौर पर पूंजीगत खर्च के रूप में मामूली रकम लगाएगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस महीने कंपनी की सालाना आम बैठक में कहा था कि जियो के निवेश का चक्र अब पूरा हो चुका है।
 
उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए क्षमता बढ़ोतरी पर अब मामूली निवेश की दरकार होगी। जियो ने देश भर में ऑप्टिकल फाइबर समेत डिजिटल बुनियादी ढांचा बनाने पर करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। कंपनी ने हाल में करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये के टावर व फाइबर बुनियादी ढांचे का विनिवेश एक अलग इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) में किया है। मैक्वेरी के विश्लेषकों ने कहा, जियो का पूंजीगत खर्च अब घटकर रखरखाव की ओर आ जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में हमने सालाना पूंजीगत खर्च में 40 फीसदी की कमी देखी है।
 
भारत मेंं वायरलेस उद्योग का राजस्व साल 2016 मेंं जियो के उतरने के बाद से 25 फीसदी घटा है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2020 में उद्योग बढ़त की राह पर लौट आएगा। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने कहा कि भारती एयरटेल के वायरलेस कारोबार का एबिटा जियो के बाजार में उतरने के बाद से 60 फीसदी घटा है, लेकिन अब उम्मीद है कि अगले तीन साल में एबिटा 30 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि की रफ्तार से बढ़ेगी और वित्त वर्ष 2022 तक जियो के पूर्व के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। गोल्डमैन सैक्स ने एक रिपोर्ट में कहा, हमारी राय में भारती ने जियो के साथ नेटवर्क की खाई मोटे तौर पर पाट दी है, खास तौर से शहरी केंद्रों में और हाल की तिमाहियों में इसके राजस्व की रफ्तार जियो के आसपास मिल रही है।
 
ब्रोकरेज फर्म ने कहा, हाल के वर्षों में राजस्व पर दबाव के बावजूद (वायरलेस राजस्व वित्त वर्ष 2017 से वित्त वर्ष 2019 के दौरान 27 फीसदी घटा), भारती ने नेटवर्क में निवेश बढ़ाया है और वित्त वर्ष 2018-19 में इसका भारतीय पूंजीगत खर्च पिछले दो वर्षों से 50 फीसदी ज्यादा रहा है। हालांकि आने वाले समय में पूंजीगत खर्च की तीव्रता घटने की संभावना है। गोल्डमैन सैक्स ने कहा, अब भारती का 4जी नेटवर्क कवरेज 80 फीसदी से ज्यादा है, लिहाजा हमें लगता है कि कंपनी के पूंजीगत खर्च की तीव्रता वित्त वर्ष 2020 में घटनी शुरू होगी और हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020-22 (अनुमानित) में बिक्री के लिहाज से पूंजीगत खर्च करीब 21 फीसदी रहेगा, जो वैश्विक कंपनियों की तरह है।
 
भारती एयरटेल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी गोपाल विट्ठल ने जून तिमाही के नतीजे की घोषणा के समय कहा था, कंपनी ने पूंजीगत खर्च के मोर्चे पर अनुमान जताना बंद कर दिया है, लेकिन यह नहीं बताया कि पिछले साल के मुकाबले पूंजीगत खर्च में कितनी कमी होने जा रही है। मोतीलाल ओसवाल के अली असगर शाकिर का मानना है कि जियो व भारती एयरटेल के पूंजीगत खर्च की तीव्रता घट सकती है, वहीं वोडाफोन आइडिया अगले वित्त वर्ष व उसके बाद इसमें कमी ला सकती है।
 
वोडाफोन आइडिया ने जून तिमाही में क्रमिक तौर पर राजस्व में 4.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की और यह जियो से पिछड़ गई, लेकिन कंपनी देसी बाजार में शायद सबसे ज्यादा दबाव वाली कंपनी है। पिछले एक साल में कंपनी ने लगातार ग्राहक गंवाए हैं (करीब 9 करोड़) और इसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर करीब 33 फीसदी रह गई है। विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ में किसी तरह की बढ़ोतरी का परिदृश्य नहीं है, लेकिन मौजूदा समय में हो रहे नकदी खर्च की दर के लिहाज से वोडाफोन आइडिया का नकदी शेष सितंबर 2020 तक काफी निचले स्तर पर पहुंच सकता है।
 
मेबैंक किम इंग के विश्लेषक नीरव दलाव ने कहा, हमारा अनुमान है कि शुद्ध कर्ज वित्त वर्ष 2022 में बढ़कर 1.4 लाख करोड़ रुपये पर पहंच जाएगा, जो वित्त वर्ष 2019 में 1.2 लाख करोड़ रुपये रहा था। कंपनी को अगले दो साल तक करीब 4,000 करोड़ रुपये सालाना कर्ज चुकाना होगा और अगले 12 महीने में स्पेक्ट्रम संबंधित भुगतान करीब 12,000 करोड़ रुपये का होगा। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे में अपने नकदी के प्रबंधन के लिए वोडाफोन आइडिया को अपने पूंजीगत खर्च व परिचालन खर्च में कटौती पर विचार करना पड़ सकता है।
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