बिजनेस स्टैंडर्ड - बाजार को मिलेगा करार मगर और राहत की दरकार
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बाजार को मिलेगा करार मगर और राहत की दरकार

सुंदर सेतुरमन और समी मोडक / मुंबई 08 25, 2019

वित्त मंत्री के वादे से सुधार की आस

बिजनेस स्टैंडर्ड बाजार को मिलेगा करार मगर और राहत की दरकारअर्थव्यवस्था को गति देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पिछले दिनों की गई घोषणाएं और आगे भी कुछ उपाय किए जाने के वादे से बाजार में सुधार होने की उम्मीद जगी है। विशेषज्ञों ने वित्त मंत्री के कदम का स्वागत किया लेकिन साथ ही कहा कि निवेशकों और कारोबारियों में भरोसा बढ़ाने के लिए सरकार को और कदम उठाने की जरूरत है। इन उपायों से बाजार में तात्कालिक तौर पर तेजी तो आएगी लेकिन अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्घ और वैश्विक नरमी की वजह से लंबे समय तक तेजी के बने रहने पर संदेह है। वाहन, बैंकिंग, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और रियल एस्टेट क्षेत्र के शेयरों पर नजर रहेगी। इस बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) से अधिभार वापस लिए जाने से उनकी ओर से की जा रही बिकवाली पर लगाम लगेगी, लेकिन वैश्विक जोखिम को देखते हुए वे निवेश में सतर्कता बरत सकते हैं।

सीएलएसए में इंडिया स्ट्रैटजिस्ट महेश नंदूरकर ने अपने नोट में कहा है, 'सरकार की ओर से की गई हालिया घोषणाओं और अगले कुछ हफ्तों में और उपाय किए जाने से निवेशकों की धारणा में सुधार आएगा और निकट अवधि में बाजार में तेजी आ सकती है। सरकार ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आर्थिक नरमी से वह वाकिफ है और इससे निपटने के लिए भी कदम उठाने को तैयार है।'

वित्त मंत्री ने शुक्रवार को घरेलू तथा एफपीआई से इक्विटी पूंजी लाभ पर उच्च अधिभार वापस लेने, बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने, एनबीएफसी तथा अन्य क्षेत्रों में नकदी संकट दूर करने और वाहन क्षेत्र को बढ़ावा देने के उपायों की घोषणा की थी। इसके साथ ही सीतारमण ने आने वाले समय में दो चरण में और प्रोत्साहन की घोषणा का भी वादा किया है।

अवेंडस कैपिटल पब्लिक मार्केट्स अल्टरनेट स्ट्रैटजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, 'अच्छी बात यह है कि सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं। इससे निवेशकों की धारणा को बल मिलेगा और आगे जिस तरह की घोषणाएं होंगी, उस पर भी बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।' आम बजट पेश किए जाने के दिन से अब तक सेंसेक्स करीब 8 फीसदी टूट चुका है। बीएसई स्मॉलकैप में इस दौरान 15 फीसदी की और मिडकैप में करीब 12 फीसदी की गिरावट आई है। एफपीआई ने इस दौरान करीब 3 अरब डॉलर की बिकवाली की जिससे धातु, बुनियादी ढांचा क्षेत्र, पूंजीगत वस्तुओं, वाहन और वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों को काफी चपत लगी है।

मोतीलाल ओसवाल इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुख्य कार्याधिकारी रजत राजगढिय़ा का मानना है कि ये हालिया घोषणाएं शुरुआती उपाय हैं और अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए और उपाय किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'इन घोषणाओं से घरेलू मांग से जुड़े क्षेत्रों को लाभ होगा। इनमें वाहन, वित्तीय और रियल एस्टेट क्षेत्र प्रमुख हैं। यह अच्छी शुरुआत है लेकिन आगे और कदम उठाने की जरूरत है।' निवेशक बड़े प्रोत्साहन पैकेजे की उम्मीद कर रहे हैं लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि राजकोषीय स्थिति को देखते हुए भारी-भरकम प्रोत्साहन पैकेज की गुंजाइश कम है।

नोमुरा ने एक नोट में कहा है कि सरकार बिना भारी-भरकम राजकोषीय प्रोत्साहन के नरमी को काबू में करने का प्रयास किया है। नोमुरा की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने कहा, 'वृद्घि दर को प्रोत्साहित करने करने के लिए सरकार ने क्षेत्र विशेष के लिए कई प्रोत्साहनों की घोषणा की है लेकिन निकट अवधि में राजकोषीय प्रोत्साहन की स्पष्ट संकेत नहीं दिए।  फस्र्ट ग्लोबल के उपाध्यक्ष एवं संयुक्त प्रबंध निदेशक शंकर शर्मा को भी उम्मीद है कि बाजार में सुधार होगा लेकिन आगे यह तकनीकी पहलुओं पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा, 'बाजार में उछाल संभव है। लेकिन एफपीआई की ओर से ज्यादा निवेश की उम्मीद कम है।'
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