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आर्थिक चिंता के बीच क्रिस वुड ने घटाया भारतीय निवेश

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली August 23, 2019

डगमगाती अर्थव्यवस्था, कॉरपोरेट आय में नरमी और अचानक जम्मू-कश्मीर पर ध्यान केंद्रित किए जाने के बीच सरकार द्वारा प्रोत्साहन की धूमिल पड़ती उम्मीद की वजह से जेफरीज में वैश्विक प्रमुख (इक्विटी रणनीति) किस्टोफर वुड को भारत के लिए अपने निवेश में एक प्रतिशत तक की कटौती करने और इंडोनेशिया में निवेश बढ़ाने के लिए बाध्य होना पड़ा है। निवेशकों के लिए अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट 'ग्रीड ऐंड फीयर' में वुड ने कहा है कि नरेंद्र मोदी को नोटबंदी के फैसले की तरह, कश्मीर पर भाजपा के एजेंडे के क्रियान्वयन से स्वयं को विचलित नहीं होने देना चाहिए। नोटबंदी को लेकर कई कैबिनेट मंत्रियों को भी अंधेरे में रखा गया था और इसके प्रमाण मौजूद हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। 
 
उन्होंने लिखा है, 'ग्रीड ऐंड फीयर में इस पर ध्यान दिया गया है कि कश्मीर मामले ने एक अतिरिक्त नकारात्मकता को जोड़ा है, क्योंकि ग्रीड ऐंड फीयर का मानना है कि सुरक्षा हालात अब और बदतर होंगे। ग्रीड ऐंड फीयर इसे लेकर आश्वस्त नहीं है कि मोदी अल्पावधि में अर्थव्यवस्था को लेकर क्या कदम उठा सकते हैं। खासकर वाहन क्षेत्र में कुछ मंदी दिखी है और एक साल पहले आईएलऐंडएफएस संकट की वजह से एनबीएफसी क्षेत्र में नकदी दबाव लगातार बढ़ा है।' 
 
राजकोषीय मदद?
 
भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी और व्यवस्था में नकदी की किल्लत को लेकर चिंता जताने वाले वुड अकेले नहीं हैं। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के विश्लेषकों ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में राजकोषीय प्रोत्साहन की जरूरत पर जोर दिया है। बोफाएमएल में इमर्जिंग एश्यिा के लिए निर्धारित आय एवं मुद्रा रणनीतिकार रोहित गर्ग कहते हैं, 'कुल मिलाकर, आर्थिक परिदृश्य को और ज्यादा दबाव से बचाने के लिए वित्तीय शर्तों को आसान बनाए जाने की जरूरत है। इस संबंध में पहला कदम प्रमुख राजकोषीय पैकेज की पेशकश करना।' भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2019-20 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था का वृद्घि अनुमान जून के 7 प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी अपने अनुमानों में कमी की है। उदाहरण के लिए, आईएमएफ को भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2021 में 7 प्रतिशत और 7.2 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान है।
 
बाजार मूल्यांकन
 
बाजार मूल्यांकन पर वुड का कहना है कि 5 जुलाई को बजट पेश होने के बाद से दर्ज की गई भारी गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार अभी भी महंगा बना हुआ है। उनका मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के साथ फंसे कर्ज की समस्या को सरकार द्वारा प्राथमिकता के साथ दूर किया जाना चाहिए जिससे उसे अपने पुनर्पूंजीकरण प्रयास को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।  वुड ने लिखा है, 'निफ्टी 50 वर्ष 2008 के बाद से 15.2 गुना के औसत की तुलना में मौजूदा समय में 16.7 गुना के पीई पर कारोबार कर रहा है।' 
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