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अक्टूबर अंत से शुरू होगी गन्ने की पेराई

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ August 23, 2019

गन्ने का 2019-20 पेराई सत्र (अक्टूबर-सितंबर) में 1.45 करोड़ टन चीनी के पहले के स्टॉक के साथ उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें अक्टूबर के अंत से गन्ने की पेराई शुरू करेंगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलें दीवाली के बाद परिचालन शुरू करेंगी। मध्य और पूर्वी यूपी के मिलों को क्रमश: नवंबर के पहले और दूसरे हफ्ते से पेराई शुरू करने को कहा गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने गन्ना आपूर्ति कोटा नीति 2019-20 की घोषणा की है। इस नीति के तहत किसानों के लिए आपूर्ति का कोटा निर्धारित किया गया है। गन्ना विभाग ने कहा कि इसके तहत पात्र किसानों के लाभ और गन्ना माफिया को दूर रखने के उपाय किए गए हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग के प्रधान सचिव संजय भूसरेड्डी ने कहा, 'गन्ने का सर्वेक्षण का काम पूरा हो गया है और मिलें दीवाली के बाद पेराई शुरू कर सकती हैं। नवंबर के मध्य तक सभी मिलों में पेराई शुरू होने की उम्मीद है।'
 
राज्य की निजी चीनी मिलों पर 2018-19 सत्र का भी काफी बकाया है। कुल 8,000 करोड़ रुपये के बकाये में से बड़ा हिस्सा निजी चीनी मिलों का है। राज्य में कुल 119 चीनी मिलों में से 94 निजी क्षेत्र की हैं। सरकार ने हाल ही में 31 अगस्त तक मिलों को बकाया निपटान करने की समयसीमा तय की थी। 33,047 करोड़ रुपये बकाये में से यूपी की मिलों ने करीब 25,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है और करीब 8,000 करोड़ रुपये का बकाया अभी बचा है। सरकार ने बकाया नहीं चुकाने वाली मिलों के खिलाफ आवश्यक जिंस अधिनियम, 1995 की धारा 3/7 के तहत मामला दर्ज करने और वसूली नोटिस जारी करने की चेतावनी दी है। 
 
सिंभावली समूह के एक अधिकारी ने कहा कि बकाया मसले का हल फिलहाल होता नहीं दिख रहा है क्योंकि मिलों की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं है। इसके साथ ही सरकार से भी देनदारियों के भुगतान में किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है। बड़े बकायेदारों में बजाज हिंदुस्तान समूह, सिंभावली, मोदी धामपुर आदि मिलें हैं। उन्होंने दावा किया कि आसान ऋण योजना से केवल बड़े समूहों को ही फायदा मिला है जो अब तक पहले ही अमीर हो चुके हैं क्योंकि उनका किसानों का बकाया चिंताजनक स्थिति में है।
 
2018-19 में उत्तर प्रदेश का चीनी उत्पादन करीब 1.18 करोड़ टन रहा जो 2017-18 के 1.2 करोड़ टन से कुछ अधिक है। 2019-20 में भारत का चीनी उत्पादन करीब 14 प्रतिशत तक गिरकर लगभग 2.8 करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि मौजूदा चीनी सीजन 2018-19 में यह 3.3 करोड़ टन है। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने इससे पहले अपने प्रारंभिक अनुमानों में प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों-महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में कम बारिश और पानी की कम उपलब्धता को इसका जिम्मेदार ठहराया था।
 
चीनी का शुरुआती स्टॉक 1.45 करोड़ टन के शीर्ष स्तर पर रहने का अनुमान है जो 50 लाख टन के पिछले स्टॉक की 'मानक आवश्यकता' से तीन गुना ज्यादा है। चूंकि चीनी की वार्षिक आवश्यकता लगभग 2.65 करोड़ टन है, इसलिए अगले सीजन में तब भी स्टॉक अधिक रहेगा। इस्मा के महानिदेशक अविनाश वर्मा पहले ही कह चुके हैं कि वैश्विक चीनी बाजार में 40 लाख टन चीनी की कमी होने के आसार हैं जिससे भारतीय कंपनियों को मौका मिलेगा। हालांकि केंद्र को शीघ्र ही चीनी निर्यात नीति की घोषणा करनी चाहिए ताकि मिलों को इस अनुकूल परिस्थिति का लाभ उठाने के लिए समय मिल सके।
 
इस्मा ने 2019-20 में गन्ने का घरेलू रकबा 49.3 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान जताया है जो पिछले साल के 55 लाख हेक्टेयर के मुकाबले करीब 11 प्रतिशत कम है। इस बीच उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा दो प्रतिशत कमी के साथ 23.6 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है। 2018-19 में यह 24.1 लाख हेक्टेयर था। हालांकि राज्य में अधिक उपज वाली किस्मों की वजह से प्रति हेक्टेयर बेहतर उपज होने की संभावना जताई गई है।
Keyword: sugar, farmer, mills,,
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