बिजनेस स्टैंडर्ड - क्वांटम कंप्यूटिंग से लाभ अपार लेकिन करना होगा इंतजार
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क्वांटम कंप्यूटिंग से लाभ अपार लेकिन करना होगा इंतजार

तकनीकी तंत्र
देवांग्शु दत्ता /  August 22, 2019

क्वांटम कंप्यूटिंग ने बहुत से वादे किए और काफी संसाधनों का उपयोग किया लेकिन इससे बहुत अधिक लाभ नहीं हुआ है। हालांकि क्वांटम कंप्यूटिंग संबंधी शोध कार्यों में निवेश को तर्कसंगत कहा जा सकता है। सैद्धांतिक रूप में क्वांटम कंप्यूटर किसी भी सामान्य कंप्यूटर के मुकाबले काफी तेज गति से काम कर सकता है जिससे अनसुलझे लगने वाले सवालों का हल खोजा जा सकता है। क्वांटम कंप्यूटिंग क्षेत्र में होने वाले कार्यों ने कई वैज्ञानिक घटनाओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद की है। 

 
इंजीनियरिंग क्षेत्र की समस्याएं काफी बड़ी और जटिल होती हैं। सुपरपोजिशन और इंटैंगलमेंट (एक जैसी क्वांटम अवस्था वाले अलग अणु) क्वांटम कंप्यूटिंग क्षेत्र की दो मुख्य विधाएं हैं। क्वांटम स्तर पर कोई अणु एक ही समय में दो अलग-अलग अवस्था में रह सकता है, अथवा उसके दो अवस्थाओं में रहने की संभावना है, जिसे सुपरपोजिशन कहते हैं। अणु की ये अवस्थाएं एक दूसरे से जुड़ी होती हैं, अर्थात एक अणु की स्थिति में बदलाव करने पर उसके जुड़वा अणु में तत्काल परिवर्तन दिखाई देगा, भले ही उनके बीच काफी दूरी हो। इन दोनों बुनियादी विशेषताओं के कारण क्वांटम कंप्यूटर तेज गति से काम करते हैं। हमारे मोबाइल या सामान्य कंप्यूटर ऑन/ऑफ वाले 'लॉजिक गेट' सर्किट के साथ बाइनरी सिद्धांतों पर काम करते हैं। क्वांटम कंप्यूटर में सुपरपोजिशन विशेषता के चलते एक ही समय में किसी अणु को स्विच ऑन या ऑफ, दोनों स्थितियों में रखा जा सकता है। इसलिए किसी बिट में एक समय में केवल एक परिणाम को सहेजा जा सकता है लेकिन क्वांटम बिट (क्यूबिट) में एक ही समय पर दोनों परिणामों को संग्रहीत किया जा सकता है। 
 
दो क्यूबिट का एक सर्किट किसी भी क्षण सुपरपोजिशन की चार संभावित अवस्थाओं में हो सकता है जबकि दो बिट का साधारण सर्किट इनमें से केवल एक अवस्था में होगा। इसलिए अधिक क्यूबिट वाला प्रोसेसर किसी सामान्य सर्किट के मुकाबले तुलनात्मक रूप में कई गुना तेजी से जानकारी संसाधित कर सकता है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के अनुसार, 'पेनिसिलिन की आणविक संरचना को देखें तो इसकी स्थायी अवस्था में 41 परमाणु होते हैं जिसके लिए 1,086 बिट के साधारण कंप्यूटर की आवश्यकता होगी। व्यावहारिक तौर पर इस तरह की मशीन बनाना नामुमकिन है। हालांकि क्वांटम कंप्यूटर के लिए 286 क्यूबिट वाले प्रोसेसर की ही जरूरत होगी।'
 
जब भी क्वांटम सिद्धांत पर आधारित गणना के अंतिम परिणाम को मापा जाता है तो वह सुपरपोजिशन से इतर सामान्य अवस्था में मिलता है। किसी क्यूबिट सर्किट को बनाए रखने के लिए बहुत अधिक मेहनत लगती है क्योंकि छोटी सी गड़बड़ी से अणुओं की संबद्धता टूट सकती है। साथ ही, क्वांटम कंप्यूटर बहुत अधिक डेटा उपलब्ध कराते हैं जिसके लिए बड़े स्तर पर त्रुटि सुधार की आवश्यकता है। फिलहाल क्यूबिट चिप को निर्वात में लगभग शून्य तापमान पर सहेजा जाता है जो केवल नियंत्रित प्रयोगशालाओं में ही संभव है। इन्हें किसी भी तरह की हलचल से दूर रखा जाता है क्योंकि व्यक्ति के चलने की आवाज से भी अणुओं में संबद्धता टूट सकती है। 
 
कंप्यूटर वैज्ञानिक लॉजिकल क्यूबिट को क्वांटम क्षेत्र की 'मुद्रा' के तौर पर देखते हैं। लॉजिकल क्यूबिट का उपयोग एक समय में दो स्थितियों के लिए किया जा सकता है। इसमें कई भौतिक क्यूबिट या अतिचालकता वाले सर्किट हो सकते हैं जो किसी परमाणु की अवस्था की संरचना का निर्माण करते हैं। एक तथ्य यह भी है कि किसी साधारण कंप्यूटर के सर्किट में लॉजिकल क्यूबिट सर्किट का उपयोग करके क्वांटम मशीन की नकल बनाई जा सकती है। क्वांटम एल्गोरिद्म का परीक्षण करने के लिए कई बार ऐसा किया गया है। 
 
इस क्षेत्र में लगातार बेहतरी के प्रयास हो रहे हैं। फिलहाल विश्व का सबसे बड़ा क्वांटम कंप्यूटर गूगल का ब्रिस्टलेकॉन है जिसमें 72 फिजिकल क्यूबिट प्रोसेसर लगा है। चीन की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी ने 18 क्यूबिट वाला कंप्यूटर बनाया है। न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी (सिडनी) की शोध टीम ने सिलिकन में फॉस्फोरस परमाणु को अंत:स्थापित कर दो क्यूबिट वाले लॉजिक गेट की प्रसंस्करण क्षमता और बढ़ा दी है। क्वांटम क्षेत्र में वर्चस्व हासिल करने के लिए सामान्य कंप्यूटर को पछाडऩे के वास्ते न्यूनतम 50 लॉजिकल क्यूबिट प्रोसेसिंग क्षमता की जरूरत होगी। हालांकि बड़े अणुओं के अध्ययन या कृत्रिम मेधा (एआई) एल्गोरिद्म के लिए लगभग 1,000 लॉजिकल क्यूबिट क्षमता की आवश्यकता होगी। आरएसए 2048 एनक्रिप्शन स्टैंडर्ड के लिए 4,000 क्यूबिट क्षमता वाली मशीन की जरूरत होगी। 
 
एक समस्या त्रुटि से जुड़ी है। अधिक क्यूबिट वाला सर्किट गॉड पार्टिकल की खोज के लिए बनाए गए लार्ज हैड्रॉन कोलाइटर से भी अधिक डेटा उत्पन्न करेगा। इस डेटा में बहुत सी त्रुटियां होंगी जिनमें सुधार करना होगा। क्वांटम एल्गोरिद्म को लिखना और क्वांटम मशीन पर बड़ी मात्रा में डेटा भेजना भी काफी जटिल काम है। बीसीजी का मानना है कि क्वांटम कंप्यूटिंग से उत्पादकता में बेहतरी के चलते सालाना 450 अरब डॉलर से अधिक का लाभ होगा। उसने कहा, 'हालांकि अगले पांच वर्षों के लिए यह गति थोड़ी धीमी रहेगी। हमारा मानना है कि वर्ष 2024 तक यह कीमत 2-5 अरब डॉलर हो जाएगी। तकनीक के उन्नत होने पर इसमें क्रमिक बढ़ोतरी होगी।'
 
क्वांटम कंप्यूटिंग की सहायता से दवाइयों के निर्माण, नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन, पोर्टफोलियो प्रबंधन, मौसम तथा जलवायु परिवर्तन अनुमान और एनक्रिप्शन पद्धति में महत्त्वपूर्ण बदलाव होंगे। शोध के सहारे नए तत्त्वों के बारे में जानकारी मिलेगी लेकिन इसकी वाणिज्यिक व्यवहार्यता के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। 
Keyword: computer, processor, china,,
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