बिजनेस स्टैंडर्ड - एफपीआई को बढ़ावा
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एफपीआई को बढ़ावा

संपादकीय /  August 22, 2019

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए नियामकीय एवं अनुपालन मानक को शिथिल कर दिया है। बाजार नियामक ने यह आश्वस्ति भी दी है कि वह पार्टिसिपेटरी नोट जारी करने के मानकों को भी तार्किक बनाएगा ताकि एफपीआई के लिए इन उपायों का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की सेवा करना आसान हो सके। इन उपायों की मदद से एफपीआई की नकारात्मक धारणा कम करने और भारतीय शेयर बाजार में उनका दोबारा प्रवेश सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। बजट के बाद से ही वे इस क्षेत्र से भारी बिकवाली कर रहे हैं। इसके अलावा बाजार नियामक ने कर्ज में राहत की घोषणा भी की है। 

 
सूचीबद्घ कंपनियों में वित्तीय अनुषंगियों के साथ पुनर्खरीद के लिए आवश्यक इक्विटी अनुपात शिथिल किया गया है। इतना ही नहीं सेबी ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और उनके ग्राहकों के लिए नियमन सख्त किए हैं। उसने एक स्पष्टï समझौते की मांग की है जिसके जरिये क्रेडिट रेटिंग एजेंसी को मौजूदा या भविष्य की उधारी की पूरी जानकारी देने को कहा गया है। उसने एक सूचना प्रणाली का प्रस्ताव भी रखा है ताकि भेदिया कारोबार के मामलों में समय से प्रमाण जुटाए जा सकें। नए एफपीआई मानक व्यापक तौर पर एचआर खान समिति की अनुशंसाओं का अनुसरण करते हैं। कई चीजों को सरल भी बनाया गया है। 57 प्रासंगिक परिपत्रों को एक परिपत्र में समेट दिया गया है। अब सेबी एफपीआई को तीन के बजाय दो श्रेणियों में बांटेगा। यह वर्गीकरण, ग्राहक को जानने संबंधी मानक तथा अन्य अनुपालन इस बात पर निर्भर करेंगे कि उक्त संस्था का उसके घरेलू बाजार में किस प्रकार नियमन हो रहा है। 
 
वह पुरानी व्यवस्था खत्म की जाएगी जहां एफपीआई को केवल तभी व्यापक प्रभाव वाली श्रेणी दी जाती थी जबकि उसमें 20 या अधिक निवेशक होते थे। भारतीय परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों द्वारा शुरू किए गए बाहरी फंडों को भी देश में निवेश के लिए एफपीआई के रूप में पंजीयन की छूट दी जाएगी। अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों को भी एफपीआई के रूप में पंजीयन की अनुमति दी जाएगी, भले ही वे बैंक ऑफ इंटरनैशनल सेटलमेंट्स के सदस्य न हों। वर्ष 2017 से पी-नोट जारी करने पर प्रतिबंध था। ऐसा केवल हेजिंग के उद्देश्य से किया गया था। यह प्रतिबंध हटाया जाएगा और इन्हें प्राथमिकता देने वालों के लिए चीजें आसान होंगी। हालांकि ये सहजीकरण एफपीआई के पंजंीयन और व्यापार को काफी सहज बनाते हैं लेकिन अगर धारणा में सुधार लाना है तो वित्त मंत्रालय को भी दखल देना होगा। 
 
चुनिंदा एफपीआई मसलन पेंशन फंड आदि को केवल न्यास के रूप में परिचालन की अनुमति है क्योंकि उनके यहां नियमन ऐसे ही हैं। ताजा बजट में एक तय स्तर से अधिक आय पर अधिभार ऐसे सभी एफपीआई को प्रभावित करती है। यही कारण है कि बजट की घोषणा से अब तक एफपीआई 3 अरब डॉलर मूल्य के शेयर बेच चुके हैं। अधिभार खत्म करने से बिकवाली का दबाव कम होगा हालांकि कई निवेशक मंदी को लेकर भी निराश हैं। पुनर्खरीद मानकों में बदलाव से उन कंपनियों को लाभ होगा जो एनबीएफसी और आवास वित्त कंपनियों की मालिक हैं। इन वित्तीय अनुषंगियों का अपना ऋण: इक्विटी अनुपात 6:1 तक हो सकता है। पुराने मानकों के तहत पुनर्खरीद के बाद समेकित कंपनी का अनुपात 2:1 या इससे कम होना था। संशोधन के बाद यह शिथिल हुआ है और अलहदा कंपनी का ऋण और इक्विटी अनुपात 2:1 या उससे कम होना चाहिए। समेकित ऋण इक्विटी अनुपात भी 2:1 या उससे कम होगा। हालांकि समेकित अनुपात का आकलन वित्तीय अनुषंगी को बाहर रखकर किया जाएगा। ये बदलाव एफपीआई और पुनर्खरीद की राह तक रहे कॉर्पोरेट की राह आसान बनाएंगे। यह वित्त मंत्रालय पर निर्भर करता है कि वह कर के मोर्चे पर इसका अनुकरण करे। 
Keyword: FPI, invest, equity, SEBI,,
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