बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रोत्साहन के रूप में करदाताओं के पैसे की नहीं करें उम्मीद
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 16, 2019 03:03 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

प्रोत्साहन के रूप में करदाताओं के पैसे की नहीं करें उम्मीद

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली August 22, 2019

मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने गुरुवार को कहा कि भारत जैसी मुक्त अर्थव्यवस्था में मुश्किल दौर से गुजर रहे क्षेत्रों की कंपनियों को राजकोषीय प्रोत्साहन के रूप में करदाताओं के पैसे की मांग नहीं करनी चाहिए। जिस कार्यक्रम में सुब्रमण्यन बोल रहे थे, उसी में ऊर्जा सचिव और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 5.5-5.6 फीसदी रह सकती है। यह जनवरी-मार्च तिमाही में पांच साल के सबसे कम 5.8 फीसदी वृद्धि से भी कम होगी। 
 
सुब्रमण्यन ने कहा, 'हमें इसे लेकर सतर्क रहना चाहिए। हम 1991 से एक बाजार अर्थव्यवस्था बने हुए हैं और एक बाजार अर्थव्यवस्था में ऐसे क्षेत्र होते हैं, जो एक समय तेजी से बढ़ते हैं और फिर मंदी के दौर से गुजरते हैं। मेरा मानना है कि हम यह उम्मीद करते हैं कि सरकार उन क्षेत्रों में करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल करे, जो मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि आप यह विचार लेकर आए हैं कि बड़ी कंपनियां नाकाम होंगी तो अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा, इसलिए सरकार को उन्हें बचाने आगे आना चाहिए। वहीं ऐसी स्थितियां बनाई हैं, जिनमें लाभ निजी है और घाटा सार्वजनिक, जो बाजार अर्थव्यवस्था के काम करने के तरीके के प्रतिकूल है।'
 
रॉयटर्स की खबर के मुताबिक मुख्य आर्थिक सलाहकार जैसे वरिष्ठ नीति निर्धारकों की टिप्पणियों के कारण देश में शेयर 1.5 फीसदी से अधिक लुढ़के। ये नीति निर्धारक निवेशकों को यह भरोसा नहीं दे पाए कि सरकार आर्थिक वृद्धि को उबारने के लिए कदम उठाने को लेकर गंभीर है। एनएसई का बेंचमार्क सूचकांक 1.62 फीसदी गिरकर 10,741.35 पर बंद हुआ। वहीं बेंचमार्क बीएसई सूचकांक सेंसेक्स 1.59 फीसदी गिरकर 36,472.93 पर बंद हुआ। इस बीच इसी कार्यक्रम में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र के अप्रत्याशित दबाव से निपटने के लिए असाधारण कदम उठाने होंगे। वित्तीय क्षेत्र की मंदी में अहम भूमिका रही है। 
 
उन्होंने वित्तीय क्षेत्र के दबाव को अप्रत्याशित बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 70 वर्षों में किसी को भी ऐसे हालात का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'निजी क्षेत्र में कोई भी किसी पर भरोसा नहीं कर रहा है। कोई भी ऋण देने को तैयार नहीं है। हर कोई नकदी लेकर बैठा है, इसलिए आपको असाधरण कदम उठाने होंगे।'
Keyword: india, economy, krishnmurti, revenue,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बैंक जमा पर बीमा गारंटी बढ़ाने से ग्राहकों के बीच बढ़ेगा भरोसा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.